‘दरवेश फिर मिलेंगे’…कुंडली के गुणों का क्या ड्रामा है?

‘दरवेश फिर मिलेंगे’…कुंडली के गुणों का क्या ड्रामा है?

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Pratima Jaiswal
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आज बाजार पहले से ज्यादा गुलजार लग रहा था. सामने मिठाई की दुकान पर बड़ी-सी लग्जरी कार खड़ी थी. अचानक खिड़की का शीशा नीचे सरका और आवाज आई ‘भईया… 1 किलो काजू कतली पैक करना’.
जानी-पहचानी आवाज सुनकर पीछे मुड़कर देखा. वाह! कुंडली के साढ़े तीन गुण वाले साहब गाड़ी में बैठे थे. साथ में उनकी मैडम और हमारी कभी न होने वाली सासू मां पैदल चलने वालों को तिरछी नजरों से घूर रही थी.
वाह! तुम्हारा टशन आज भी बिल्कुल वैसा ही है. आईफोन को स्टाइल से हाथ में लेकर जरूर मेल चेक कर रहे होंगे. आपकी मैडम भी नई वाली मिस वर्ल्ड जैसी लग रही है. उनके लिए एक शब्द ‘खूबसूरत’ और हमारी सासू मां, माफ करना! कभी न होने वाली सासू मां पैदल चलने वाले लोगों को कीडे-मकौडे समझकर घूर रही थी. उनका ये बनावटी गुस्सा सच में हमेशा से बहुत क्यूट लगता है मुझे.
हमारी कुंडली के साढ़े तीन गुण मिले थे. जब सासू मां ने आसमान सिर पर उठा लिया था. मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि हमारी आदतें, मन तो सौ प्रतिशत मिलता है, फिर कुंडली के गुणों का क्या ड्रामा है? साथ रहने के लिए क्या ये जरुरी है?
‘सुनो लड़की तुम्हें कुछ नहीं पता. आजकल के बच्चे अपने मन की करते हैं. गुण नहीं मिलेंगे, तो तलाक हो जाएगा और हमारे यहां ये सब नहीं होता.’
उस दिन भी उनकी बातें बहुत क्यूट लगी थी मुझे. उधर पापा सासू मां को खुश करने के लिए उनको बड़ी-सी लग्जरी कार गिफ्ट करने की सोच रहे थे.
‘क्यों गाड़ी देने से कुंडली मिल जाएगी? दहेज को गिफ्ट का नाम देने वाली बात है पापा! अगर ऐसी ही बात है, तो मत मिले कुंडली और न हो शादी’
बस… उस दिन जुबान पर सरस्वती बैठी थी. नहीं मिली कुंडली, नहीं हो पाई शादी.
कितने चुपचाप होकर तुम कार में बैठे हो, जैसे आसपास कुछ भी न हो. उतने ही शांत जैसे उस दिन थे. कभी-कभी सोचती हूं कि मुझे भी चुप हो जाना चाहिए था. जो हमारे बड़े कर रहे थे. करने देते दोनों. कम से कम आज तुम अपने ससुराल की गाड़ी में बैठे होते और मैं तुम्हारे साथ.
खैर, गिफ्ट तो सासू मां को नई बहू से भी मिल ही गया. यहां से भी मिलता तो यही होता. वैसे सासू मां है तो एटीट्यूड तो सूट करता है उनपर. क्यूट लगती हैं वो.
वैसे मैडम और तुम्हारे बीच की टूयूनिंग को देखकर लग रहा है कि कुंडली के 28-30 गुण तो जरूर मिलते होंगे., क्योंकि दिल तो कतई मिलता नहीं दिख रहा.
तुम्हारे लिए एक गुड और एक बैड न्यूज है. अगले महीने शादी है. कुंडली के 28 गुण मिल गए हैं दूसरे साहब से. गुण मिल गए हैं लेकिन मन नहीं मिला.
अब कौन-सी न्यूज गुड है और कौन-सी बैड ये तुम खुद सोच लो.
चलो… अब अपनी गाड़ी आगे बढ़ाओ. स्कूटी निकालनी है.
~प्रतिमा
(मेरी किताब ‘दरवेश फिर मिलेंगे’ की आखिरी कहानी. जल्द ही आपके पास होगी)