#बाबरी मस्जिद के ख़िलाफ़ कोई भी कार्रवाई मस्जिद निर्माण में बाधक नहीं हो सकेगी

#बाबरी मस्जिद के ख़िलाफ़ कोई भी कार्रवाई मस्जिद निर्माण में बाधक नहीं हो सकेगी

Posted by

Mohd Sharif

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बाबरी मस्जिद को तोड़ने वाले हुकूमत पर क़ाबिज़ होने के कारण इस भ्रम में हैं कि वह जो चाहें कर सकते हैं। वह जैसा चाहें क़ानून बना सकते हैं। वह अख़लाक़ और पहलू ख़ाँ की तरह किसी भी अल्लाह का नाम लेने वाले शख़्स को चाहें तो क़त्ल कर सकते हैं। वह सत्ता का दुरुपयोग करते हुए चाहें तो गुजरात की तरह मुसलमानों का क़त्ले आम करा सकते हैं और उनकी महिलाओं की इज़्ज़त से खिलवाड़ कर सकते हैं। वह इस भ्रम में भी हैं कि अदालत को धमका कर वह मुसलमानों को क़त्ल करने वाले अपने गिरोह के ज़ालिमों को को क्लीन चिट दिलवा कर इज़्ज़तदार लोगों में शामिल हो सकते हैं और सत्ता के उच्चतम शिखर पर पहुँच सकते हैं।
इन सब बातों को होता हुआ देख कर यह लोग इस बात को भूल रहे हैं कि अल्लाह ऐसे ज़ालिमों और गुनाहगारों को ढील देता है ताकि वह सुधरना चाहें तो सुधर जाएं लेकिन यह अगर न सुधरना चाहेंगे तो अपना ही भाविष्य ख़राब करेंगे।
ऐसे नाज़ुक हालात में पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद स अ व के साथ होने वाली घटना को याद करने से मुसलमानों को राह मिल सकती है। घटना इस प्रकार थी, कि मक्का शहर के काफ़िरों ने जब पैग़म्बर स अ व को सताने की सारी सीमाएं पार कर दीं तो वह हज़रत ज़ैद बिन हारिसा र अ को साथ लेकर एक दूसरे शहर तायफ़ तशरीफ़ ले गए लेकिन वहां के लोगों ने मक्का वासियों से भी बुरा सलूक किया और आप स अ व को पत्थरों से ज़ख़्मी तक कर दिया। इसके बाद जब आप स अ व वापस लौट रहे थे तो अल्लाह के भेजे हुए पहाड़ों के फ़रिश्ते ने हाज़िर होकर विनती की कि आप अगर कहें तो मैं इस शहर के दोनों तरफ़ के पहाड़ों को शहर वासियों के ऊपर पलट कर इनको हलाक कर दूं तो इसके जवाब में पैग़म्बर स अ व ने जवाब दिया था कि, “नहीं, बल्कि मैंउम्मीद रखता हूँ कि अल्लाह इनकी नस्ल से वह लोग पैदा करेगा जो अल्लाह की बन्दगी करेंगे।”
बाबरी मस्जिद के सम्बन्ध में बात करें तो उसी तरह का माहौल बन रहा है लेकिन ऐसे हालात में पैग़म्बर स अ व ने जो अमल किया था वह मुसलमानों की रहनुमाई के लिये काफ़ी है। जिस तरह उन अपराधियों को पहाड़ों के फ़रिश्ते के कहे अनुसार सज़ा देने में सक्षम होते हुए भी उनको सज़ा न दी थी और जिसके बाद उन्ही की सन्तानों में अल्लाह की बन्दगी करने वाले पैदा हुए थे और उन्होंने खुद ही अपने मन्दिरों को तोड़ कर कुफ़्र का ख़ात्मा किया था उसी तरह आज भी भारत के मुसलमान अपराधियों को सज़ा देने में सक्षम होते हुए भी क़ानून हाथ में लेने से बचते आए हैं और हर तरह की नाइंसाफ़ियों को झेलते हुए भी क़ानून पर भरोसा करते आए हैं।
इस तरह भारत के मुसलमान यही उम्मीद करते हैं अदालत ने अगर इंसाफ़ से काम लिया तो मस्जिद बन ही जाएगी लेकिन अगर ऐसा न हो सका और मस्जिद की जगह कोई दूसरा निर्माण करा दिया गया तो मस्जिद तोड़ने वाले गुण्डों में शामिल इन्ही ज़ालिमों, क़ातिलों और बलात्कारियों की नस्ल में ऐसे लोग पैदा होंगे जो अपने हाथों से उस नाजायज़ निर्माण को तोड़ कर पहले से भी ज़्यादा आलिशान मस्जिद बनाएंगे। इस तरह अन्त में सारी बाधाओं को तोड़ कर उस स्थान पर मस्जिद ही बनेगी। इन्शा अल्लाह।