बाबरी मस्जिद ढहाने में शामिल कारसेवकों को पछतावा है, तीन ने इस्‍लाम कबूल कर लिया है

बाबरी मस्जिद ढहाने में शामिल कारसेवकों को पछतावा है, तीन ने इस्‍लाम कबूल कर लिया है

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बाबरी मस्जिद विध्वंस की पच्चीसवीं बरसी पर पूरे भारत में काला दिवस मनाया गया और इस संबंध में 30 संगठनों की ओर से दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च निकलला गया, प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार देश्बर में बाबरी मस्जिद की शहादत के मौके पर लोगों ने काला दिवस ‘ब्लैक डे’ मनाया, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, रांची, पटना, श्रीनगर, जयपुर, भोपाल, बंगलौर, चेन्नई, अहमदाबाद, पंजी समेत अनेक जगहों पर मुस्लिम समाज के साथ हिन्दू समाज के लोगों ने बाबरी मस्जिद की शहादत के मोके पर काला दिवस मनाया और संघ की कट्टरवादी विचारधारा का विरोध किया, अलीगढ, आगरा, लखनऊ, फ़िरोज़ाबाद, कानपुर, ग़ज़िआबाद, अलाहबाद समेत उत्तर प्रदेश के हर शहर में बाबरी मस्जिद के पुनः निर्माण व मस्जिद को गिराने के ज़िम्मेदारों को सज़ा दी जाये के लिए ऑल इंडिया मजलिस इत्तिहादुल मुस्लिमीन पार्टी ने ज्ञापन दिया|

6 दिसंबर, 2017 को अयोध्‍या में बाबरी मस्जिद विध्‍वंस के 25 साल पूरे हो गए। मस्जिद का ढांचा गिराने को कारसेवक ‘गर्व का क्षण’ मानते हैं, मगर सभी ऐसा नहीं सोचते। उस दिन ढांचा ढहाने में शामिल रहे कुछ पूर्व कारसेवकों को अपने किये पर पछतावा है। इनमें से तीन ने इस्‍लाम कबूल लिया है। डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, पानीपत के बलबीर सिंह तब शिव सेना के सदस्‍य थे। वह 6 दिसंबर, 1992 को मस्जिद ढहाने चढ़े थे। उनके साथ रहे योगेंद्र पाल सिंह ने भी बाद में इस्‍लाम अपना लिया। अब बलबीर को मोहम्‍मद आमिर और योगेंद्र को मोहम्‍मद उमर के नाम से जाना जाता है। दोनों ने कसम खाई है कि जो उन्‍होंने 6 दिसंबर को किया, उसका प्रायश्चित करने के लिए वे 100 मस्जिदों का निर्माण या मरम्‍मत करवाएंगे। हालांकि अभी तक दोनों ने 50 मस्जिदों के निर्माण व मरम्‍मत में सहयोग किया है।
इनपुट : Jansatta