बाबर की हुमायूँ को मरने से पहले वसीयत, ग्वालियर के संग्रहालय में सुरक्षित है!

बाबर की हुमायूँ को मरने से पहले वसीयत, ग्वालियर के संग्रहालय में सुरक्षित है!

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Izhar Sayyed Arif
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बाबर के बारे में कृपया चश्मा लगा कर पढ़ें l
बाबर ने अपने पुत्र हुमायूँ को मरने से पहले जी वसीयत की थी वो आज भी ग्वालियर के संग्रहालय में सुरक्षित है, उसका हिंदी अनुवाद इस प्रकार है :
——ग्वालियर के इतिहासकार डॉ.हरिहर निवास द्विवेदी ने लिखा है कि तुजुक-ए-बाबरी में ही वसीयत के ग्वालियर किले पर लिखे जाने का उल्लेख है। त्रिवेदी के अनुसार वसीयत में बाबर ने हुमायूँ को हिदायत दी कि”वह और उसके वारिस धर्मनिरपेक्ष रहें”
— – डॉ. हरिहर निवास द्विवेदी के मुताबिक वसीयत में बाबर ने लिखा था, “‘ए फ़र्ज़ंद (बेटे)! हिंदुस्तान की सल्तनत मुख़्तलिफ़ ( विभिन्न ) मज़हब से भरी हुई है, ख़ुदा का शुक्र है कि तुमको इसकी बादशाहत अता हुई (मिली) है, तुम पर लाज़िम (तुम्हारा फर्ज) है कि अपने लोहे के दिल से (सख्ती से) तमाम मज़हबी भेदभाव और कट्टरता को मिटा दो, और हर मज़हब के तरीक़ों के मुताबिक़ इंसाफ़ करो।
—– हे मेरे बेटे तुम ख़ास तौर पर गाय की क़ुर्बानी को खुद तो छोड़ ही दो साथ ही इसकी हत्या पर पाबंदी भी लगाओ। क्योंकि गाय हिंदुस्तानियों के दिल में बसी है, इससे तमाम हिंदुस्तान के लोगों के दिलों की की इच्छा पूरी कर उन्हे खुश कर सकोगे।
– बाबर नें हुमायूं को लिखआ है कि जो क़ौम हुकूमत के कानूनों का आदर करे, उसके मंदिरों और इबादतगाहों को मुनहदिम (नष्ट) न करो, अनादर न करो। अदल-ओ-इंसाफ़ (लॉ एंड ऑर्डर) इस तरह करो कि प्रजा बादशाह से ख़ुश रहे।”