भाजपा और संघ नफ़रत की सियासत छोड़ें : मौलाना अरशद मदनी

भाजपा और संघ नफ़रत की सियासत छोड़ें : मौलाना अरशद मदनी

Posted by

Mohd Zahid
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काका माफी मांगें :-

भाजपा और संघ नफ़रत की सियासत छोड़ें तो हम साथ देने को तैयार , मुल्क की ख़राब सूरत-ए-हाल से निपटना हर हिंदुस्तानी का फ़र्ज़ है। अगर मुल्क़ में ख़ुदा ना ख़ास्ता बरबादी आई तो वह हिंदू या मुसलमान नहीं देखेगी :-मौलाना अरशद मदनी

मौलाना अरशद मदनी के इस बयान का स्वागत किया जाना चाहिए।

इस देश में संघ और भाजपा का वजूद सिर्फ़ और सिर्फ़ नफरत की राजनीति के कारण ही है , उसके नफ़रत की राजनीति छोड़ते ही उसका आस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

और यदि आस्तित्व समाप्त नहीं भी हुआ तो नफरत की राजनीति परे रखने के बाद उसके समर्थन करने में कोई हर्ज भी नहीं , आखिरकार इस देश का मुसलमान 70 साल से कांग्रेस, सपा, बसपा या ऐसी ही अन्य पार्टियों को समर्थन देता ही तो रहा है, संघ और भाजपा के बदलने से वह भी इन पार्टियों की श्रेणी में ही आ जाएगी।

तो समर्थन क्युँ नहीं करना चाहिए ? आखिरकार संघ और भाजपा से हमारा कोई जायदाद का झगड़ा तो नहीं बल्कि उनके मौजूदा नफरती विचार के कारण ही तो विरोध है ?

दरअसल , अरेबिक और इस्लामिक मुल्कों में रहने वाले भारत से रोजी रोटी कमाने गये कुछ मुसलमान , भारत की ज़मीनी हकीकत से अन्जान हैं और ऐसे लोग देश में सभी धर्मों के लोगों को एक साथ मिल कर रहते देखना ही नहीं चाहते।

वहाँ के कट्टर वातावरण से इनके दिमाग में जड़ता और कट्टरता आ गयी है जैसे की संघ और भाजपा के दिमाग में आ गयी है।

मौलाना अरशद मदनी से किसी का धार्मिक वैचारिक विरोध हो सकता है परन्तु उनके इस परिपक्व बयान पर उन पर गलीच और नीच टिप्पणी करके उनकी “सेक्स सीडी” की आशंका में भाजपा और संघ के पक्ष में दिया बयान समझने वाले “मानसिक रोगी” से अधिक और कुछ नहीं।

यह बयान संघ और भाजपा के समर्थन में नहीं बल्कि उनके विचारधारा के विरोध में दिया बयान है। समझने की अक्ल होनी चाहिए।

फेसबुक के बड़े फालोवर्स वाले यूज़र्स और मेरे मित्र “काका” हों या कोई और, उनको मौलाना अरशद मदनी पर ऐसी ओछी टिप्पणी से बचना चाहिए था , अपने घटिया आरोप पर ओवैसी के आधे दिमाग के समर्थकों का साथ पाने के लिए ओवैसी को इस मुद्दे में घुसेड़ना बेहद शातिराना कृत्य है।

फेसबुक पर फालोवर्स बढ़ाने, लाईक शेयर और कमेन्ट बटोरने के इतर भी एक सुलझी हुई दुनिया है, उनको इस टिप्पणी पर माफी माँगनी चाहिए।

अन्यथा फेसबुक पर उनका बहिष्कार कर देना चाहिए।