भारत में 2024 का चुनाव एससी/एसटी/ओबीसी और आर्य ब्राह्मण/सवर्ण के बीच होगा

भारत में 2024 का चुनाव एससी/एसटी/ओबीसी और आर्य ब्राह्मण/सवर्ण के बीच होगा

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पूना पैक्ट को बाबा साहेब अम्बेडकर ने सिर्फ इसलिए स्वीकार किया क्योकि उस वक्त दलितों के अस्तित्व पर ही सवाल बन आया था। तब शोषित लोग किसी भी तरह की सत्ता सम्भालने के लायक नहीं थे यानी आर्थिक रूप से शिक्षा के स्तर से सामाजिक रूप से संगठित नहीं थे। इसलिए उन्होंने पूना पैक्ट को स्वीकार किया और उसके बदले भारत के मूलनिवासी जिन्हें एससी\एसटी\ओबीसी कहा गया उनके लिए नौकरी, शिक्षा, राजनैतिक प्रतिनिधित्व दिलाया और इस प्रतिनिधित्व को पूरा करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई। यानी आरक्षण सबसे पहले कोई खैरात नहीं क्योकि यह पूना पैक्ट के जरिये बाबा साहेब द्वारा एक बहुत बड़ा बलिदान दे कर मिला है। यानी यह खुद भारत पर एक अहसान था और कोंग्रेसी गाँधी की नौटंकी से भी निपट लिया गया। अगर आज आरक्षण समाप्त किया जाता है तो भारत में सरकार द्वारा पूना पैक्ट को लागू करना होगा। दूसरा यह की बाबा साहेब द्वारा यह देश को विकसित करने, सभी का विकास करने और एकता बनाए रखने की एक बहुत बड़ी पहल थी। जबकि इसके उल्ट गांधी, नेहरु, सावरकर और अन्य संघियो ने न सिर्फ देश को तोड़ने की वकालत की बल्कि अंग्रेजो की सत्ता बनाए रखने की भी वकालत की।

यहाँ एक बात साफ़ कर देना बहुत जरूरी है कि आर्य विदेशी आक्रमणकारी है और इस देश में रोटी पानी की तलाश में आये थे। कालन्तर में ये शिक्षा के दम पर राज्य की गतिविधिओ में शामिल रहने लगे और लगभग १८० इसा पूर्व में एक ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने व्रुहदत्थ की हत्या कर शासन पर कब्जा कर लिया। इसके बाद पुष्यमित्र शुंग ने बौध्दो की हत्याएं की यहाँ तक की गर्भवती स्त्रियों के पेट फाड़ कर बच्चों की हत्याएं की, चौरासी हजार बौध्द स्तूप और विहारों को तोड़ उनके मंदिर बनवाये, बौध्दो को शिक्षा और सम्पति से वंचित कर दिया और इसके बाद २३० ईसा बाद तक ऐसे ग्रन्थ लिख लिए जिसमे अपने आपको भगवान का प्रतिनिधि बताया और सभी लोगो को अपने से निचे बताया और समाज को जाती में विभाजित कर यहाँ के मूलनिवासियो को नीच/शुद्र चंडाल घोषित कर दिया। इसके बाद इन्होने मुस्लिम राजाओं को निमन्त्रण दे कर बुलाया उनके दरबारों में रहे उनसे अपनी बेटियो की शादी की।

बाबा साहेब के सपने १९५६ से टूटने शुरू हो गए जब वामपंथी, संघी औ कोंग्रेस के रूप में छिपे ब्राह्मण भेडियों ने अपने रंग दिखाना शुरू कर दिये। हिन्दू कॉड बिल का विरोध, स्त्री शिक्षा और सम्पत्ति के अधिकार का विरोध और ओबीसी आरक्षण का विरोध हुआ तो बाबा साहेब ने इस्तीफा दे दिया।
ब्राह्मण तीन तरीके से मूलनिवासियो को बर्बाद करने के षड्यंत्र में लगे रहे। संघी आरक्षण का विरोध करते रहे लेकिन हिन्दू कह कर इन्हें अपने दंगो का ईंधन बनाए रखा। यह बात मूलनिवासी बिलकुल समझ ही नहीं पाए की अगर ब्राह्मण/संघी हिन्दू हैं तो हिन्दुओ को मिलने वाली आवश्यक सुविधाओं का विरोध क्यों करते है। जब की मुल्सिम मुस्लिम के खिलाफ आन्दोलन नहीं करता, सिख सिख के विरोध में आन्दोलन नहीं खड़ा करता तो ये ब्राह्मण हिन्दू होने के बावजूद एसी\एसटी\ओबीसी का विरोध कैसे करते है ?

यानी डरपोक ब्राह्मण मुस्लिम का डर दिखा कर मूलनिवासीयो को आज भी हिन्दू कहता है ओर वामपंथी समानता का सपना दिखा इन्हें मार्क्सवाद के नाम पर छलता रहता है। यानि ये लोग मूलनिवासी का अपना कोई आन्दोलन या पार्टी न खड़ी हो हमेशा इस कार्य में लगे रहे।

अब २०१७ मे वामपंथी, कांग्रेस और संघी एक समान कार्य करने वाले लोगो के आतंक से सिर्फ मूलनिवासी ही नहीं बल्कि अल्पसंख्यक भी परेशान और आतंकित है। बाबरी मस्जिद विध्वंश, गुजरात दंगे, गोधरा काण्ड, सहारन पुर काण्ड, रोहित वेमुला हत्या, डेल्टा मेघवाल हत्या, अख़लाक़ हत्या और ऐसे हजारो केस फेक एनकाउंटर के, मोदी योगी के दौर में लगातार सपा बसपा के लोगो की रोज हत्या ओर दलित और प्रगतिवादी लेखको की हत्याओं का दौर जारी है। सबसे बड़ी बात संघी शासन में लोकतंत्र की हत्या हो चुकी है। लोकतंत्र के नाम पर ईवीएम् के इस्तेमाल को संघियो ने एक ऐसा हथियार बना लिया है जिसके जरिये ये लोग अपने हक में जनमत दिखाते है लेकिन असल में इन लोगो ने लोकतंत्र की हत्या कर दी है।

जीएसटी ओर नोट्बंदी ने देश के आम आदमी की कमर तोड़ दी है। महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी बेतहाशा बढती जा रही है। अगर यह कर्म और क्रम चलता रहा तो देश में आने वाले समय में ग्रह युद्ध लाज़मी बन जाता हैं।

विदेशी मूल के ब्राह्मण जिन्होंने भारत पर कब्जा किया हुआ है, इन्होने देश को विभिन्न जातिओ में बांटा हुआ है, यह समझते है की इनके द्वारा फैलाए गए अंधविश्वास और अज्ञानता हमेशा बनी रहेगी, लेकिन ये सब कुछ खत्म हो जाएगा जब अंतिम लोकतंत्रिक चुनाव २०१९ में या २०२४ में भारत के मूलनिवासी यानी एससी\एसटी\ओबीसी\अल्पसंख्यक और विदेशी आर्य आतंकी ब्राह्मण\सवर्ण के बीच होगा।
हालांकि इन्होने वक्त को समझते हुए हर चीज का भगवाकरण कर दिया है। यहाँ तक की सेना, पोलिस, न्यायपालिका जो हर तरीके से एससी\एसटी\ओबीसी\अल्पसंख्यक के खिलाफ काम करती है।

लेकिन हमारे महापुरुषो ने जो वैचारिक क्रांति के बीज डाले है जल्द ही सामाजिक शान्ति, एकता, भाईचारे और सबके विकास के लिए ब्राह्मणों का अंत जरूर कर देंगे और तभी भारत सच में सोने की चिड़िया बनेगा।
जय भारत …

–Suryansh Mulnivashi

नोट : लेख सोशल मीडिया से प्राप्त है, लेखक के निजी विचार हैं, तीसरी जंग का कोई सरोकार नहीं है|