सऊदी अरब को फ़िलिस्तीन का सौदा करने का अधिकार किसने दिया है?

सऊदी अरब को फ़िलिस्तीन का सौदा करने का अधिकार किसने दिया है?

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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने फ़िलिस्तीनी प्रशासन से कहा है कि वह बैतुल मुक़द्दस से दावा छोड़ दे और इसे इस्राईल के हवाले कर दे।

न्यूयार्क टाइम्ज़ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि मुहम्मद बिन सलमान ने फ़िलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास को रियाज़ बुलाकर उन पर दबाव डाला कि फ़िलिस्तीनी बैतुल मुक़द्दस से अपना दावा छोड़ दें। न्यूयार्क टाइम्ज़ ने जो अपनी सटीक जानकारियों के लिए ख्याति रखता है जानकार सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट दी है कि नवम्बर महीने में रियाज़ में महमूद अब्बास से मुहम्मद बिन सलमान की जो मुलाक़ात हुई थी उसमें बिन सलमान ने कहा था कि फ़िलिस्तीनियों को बैतुल मुक़द्दस से अपना दावा वापस ले लेना चाहिए।

मुहम्मद बिन सलमान ने महमूद अब्बास के सामने एक रोडमैप पेश किया है जिसमें कहा गया है कि फ़िलिस्तीनी अपने लिए अलग राज्य की स्थापना कर सकता हैं लेकिन यह स्थापना इस तरह होगी कि उसमें वह यहूदी बस्तियां शामिल नहीं होंगी जिन्हें सारी दुनिया इस्राईल की ग़ैर क़ानूनी बस्तियां और फ़िलिस्तीन का हिस्सा मानती है। इसी प्रकार जिन फ़िलिस्तीनियों को इस्राईल ने फ़िलिस्तीन से पलायन करने पर विवश किया है वह अपने स्वदेश नहीं लौट सकेंगे।

मुहम्मद बिन सलमान ने महमूद अब्बास को धमकी दी कि यदि वह इस नए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते तो उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा। बिन सलमान ने कहा कि यदि महमूद अब्बास ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया तो फ़िलिस्तीनियों को भी और महमूद अब्बास को निजी रूप से भारी आर्थिक सहायता दी जाएगी। बहरहाल महमूद अब्बास ने यह जवाब दिया है कि इस प्रस्ताव को स्वीकार कर पाना कठिन है। एक सऊदी अधिकारी ने फ़िलिस्तीनियों के सामने यह प्रस्ताव रखा कि उन्हें फ़िलिस्तीन का जितना भाग इस्राईल को देना पड़ेगा उसके बराबर ज़मीन उन्हें सीनाई मरुस्थल में दी जाएगीं।

न्यूयार्क टाइम्ज़ का कहना है कि मुहम्मद बिन सलमान का यह प्रस्ताव इस्राईल को बहुत पसंद आया है और बिन सलमान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के इशारे पर यह प्रस्ताव दिया है और ट्रम्प अमरीका का दूतावास बैतुल मुक़द्दस स्थानान्तरित करने की बात इसी तैयारी के तहत कर रहे हैं। अख़बार का कहना है कि महमूद अब्बास से बिन सलमान की मुलाक़ात से दो सप्ताह पहले ही ट्रम्प के सलाहार जेर्ड कुशनर ने रियाज़ का दौरा किया था जहां उन्होंने इस नए प्रस्ताव के बारे में बिन सलमान को ज़रूरी निर्देश दिए थे।

बहरहाल फ़िलिस्तीन के हमास और अलफ़त्ह सहित सभी संगठनों ने कह दिया है कि यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं है। हमास के प्रवक्ता हसन युसुफ़ ने कहा है कि यदि फ़िलिस्तीनी प्रशासन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया तो यह प्रशासन बाक़ी नहीं रहने दिया जाएगा। हमास के प्रवक्ता ने इस प्रस्ताव पर फ़िलिस्तीनी प्रशासन की ख़ामोशी की भी निंदा की।

वाइट हाउस के प्रवक्ता जोश्वा राफ़ाएल का कहना है कि यह प्रस्ताव अमरीका ने नहीं दिलवाया है।

फ़िलिस्तीनी संगठनों की कड़ी प्रतिक्रिया को देखते हुए सऊदी अरब के अधिकारी भी घबरा गए और वाशिंग्टन में सऊदी अरब के राजदूत ने तत्काल बयान जारी करते हुए कहा कि प्रस्ताव के बारे में मीडिया में आ रही ख़बरें झूठ हैं।

अमरीकी और सऊदी अधिकारी इसलिए और भी घबरा गए हैं कि फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैकरां ने भी जो अमरीका के घटक देश के राष्ट्रपति समझे जाते हैं स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह प्रस्ताव फ़िलिस्तीनियों के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता।

यहां यह सवाल उठता है कि मुहम्मद बिन सलमान को किसने फ़िलिस्तीन का सौदा करने का अधिकार दे दिया है?