5 दिसम्बर का इतिहास : 16 रबीउल अव्वल 1433 हिजरी क़मरी को रसूल अल्लाह की हिजरत के बाद पहली नमाज़े जुमा का आयोजन हुआ

5 दिसम्बर का इतिहास : 16 रबीउल अव्वल 1433 हिजरी क़मरी को रसूल अल्लाह की हिजरत के बाद पहली नमाज़े जुमा का आयोजन हुआ

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  1. 5 दिसम्बर सन 1898 ईसवी को उर्दू के महान कवि और भाषा विशेषज्ञ जोश मलीहाबादी का जन्म हुआ।

  2. 5 दिसम्बर 1901 ईसवी को मिक्की माउस कार्टून के जनक और प्रोड्यूसर वाल्ट डिज़्नी का जन्म हुआ।

  3. 5 दिसम्बर सन 1958 ईसवी को विख्यात कूटनयिक और लेखक पितरुस बुख़ारी का न्यूयार्क में निधन हुआ।

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5 दिसम्बर सन 1230 ईसवी को जर्मनी के रसायन शास्त्री और दार्शनिक अलबर्ट महान का निधन हुआ। 13 वी शताब्दी ईसवी में विख्यात रसायनशास्त्री के रुप में अलबर्ट ने आर्सेनिक द्वारा तांबे को सफेद करने में सफलता प्राप्त की। बाद में इस वैज्ञानिक प्रक्रिया पर और भी काम हुआ तथा इसमें बड़ी प्रगति भी हुई।

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5 दिसम्बर सन 1573 ईसवी को ब्रिटेन के विख्यात कवि और ड्रामा लेखक जॉन्सन का जन्म हुआ। उन्होंने बहुत दिनों तक ड्रामों में अभिनय भी किया। उनका विख्यात ब्रिटिश लेखक शेक्सपियर से मैत्रीपूर्ण संबंध था जिससे उनके साहित्य ज्ञान पर अच्छा प्रभाव पड़ा। सन 1637 ईसवी में जॉन्सन का निधन हुआ।

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5 दिसमबर सन 1812 ईसवी को नेपोलियन बोनापार्ट रुस में भारी पराजय और नुक़सान का सामना करने के बाद फ़्रास लौटे। योरोप में भारी सफलताओं के बाद उन्होंने 1812 के जून महीने में विशाल देश रुस पर व्यापक आक्रमण आरंभ किया। 6 महीने तक जारी रहने वाली इस सैनिक चढ़ाई में नेपोलियन ने मास्को पर अधिकार कर लिया किंतु नेपोलियन के सैनिक रुस की तेज़ ठंड और रुसी सैनिकों के कड़े आक्रमणों का सामना न कर सके। और नेपोलियन के साढ़े तीन लाख सैनिकों में केवल 30 हज़ार सैनिक जीवित फ़्रांस लौटने में सफल हुए। नेपोलियन की अंतिम लड़ाई वाटरलू युद्ध थी जिसके बाद उनका पतन हो गया और वे देश छोड़ने पर विवश हो गये।

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5 दिस्म्बर सन 1820 ईसवी को फ़्रांस के कवि लो कैंट डूलेल का जन्म हुआ। उन्होंने कुछ समय भारत और ऑस्ट्रेलिया में बिताया और फिर फ़्रांस लौटकर विख्यात फ़्रांसीसी लेखक विक्टर होगो के निधन के बाद इस देश की आकादमी में उनका स्थान संभाल लिया।

सन 1894 ईसवी में उनका निधन हुआ।

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5 दिसंबर 2013 को दक्षिण अफ़्रीक़ा के पूर्व राष्ट्रपति व नस्लभेद के ख़िलाफ़ संघर्ष के नायक नेल्सन मंडेला का 95 साल की उम्र में देहान्त हुआ। उनका जन्म 1918 में हुआ था। उन्होंने अपनी आधी से ज़्यादा ज़िन्दगी नस्लभेद से संघर्ष में बितायी। दक्षिण अफ़्रीक़ा के दिवंगत नेता ने लगभग 27 साल जेल में बिताए यहां तक कि 90 के दशक में रिहा हुए। दक्षिण अफ़्रीक़ी जनता ने 1994 में बहुमत से मंडेला को पहला अश्वेत राष्ट्रपति चुना। मंडेला ने राष्ट्रपति बनने के बाद नस्लभेदी शासन के अधिकारियों यहां तक कि जेल के अधिकारियों के साथ भी अचछा व्यवहार अपनाया। उनके इस शिष्टाचार ने उन्हें दुनिया में अमर कर दिया और वर्ष 1993 में उन्हें शांति का नोबल पुरस्कार दिया गया। यूं तो उन्होंने अनेक किताबें व लेख लिखे हैं किन्तु उनकी जीवनी पर आधारित किताब बहुत प्रसिदध है जिसका नाम है आज़ादी के लिए लंबा सफ़र।

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14 आज़र सन 1214 हिजरी शम्सी को ईरान में क़ाजार शासन के काल के रानीतिज्ञ मिर्ज़ा अबुल कासिम कायम मक़ाम फ़राहानी की हत्या कर दी गयी। वे एक अचछे लेखक भी थे। वे कुछ समय तक ईरान के महामंत्री रहे जिसके दौरान देश में कई सुधार कार्यक्रम आरंभ हुए। किंतु साम्राज्यवादियों और आंतरिक शत्रुओं ने अपने अवैध हितों को ख़तरे में पड़ता देख उनकी हत्या की भूमिका तैयार की। इस राजनीतिज्ञ ने कई पुस्तके लिखीं हैं। जिनमें जलायर नामा आदि का नाम लिया जा सकता है।

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14 आज़र सन 1345 हिजरी शम्सी को ईरान के समाजसेवी जब्बार बाग़चेबान का निधन हुआ। वे 1261 हिजरी शम्सी में पैदा हुए थे। वर्ष 1302 में उन्होंने बाग़े अतफाल के नाम से एक पाठशाला खोली जिसमें बहरे बच्चों को शिक्षा दी जाती थी इसके अतिरिक्त उन्होंने बच्चों की शिक्षा के लिए कुछ नयी पद्धतियों की खोज की जो आज भी ईरान में प्रचलित हैं।

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16 रबीउल अव्वल वर्ष 1433 हिजरी क़मरी को कुछ कथनों के आधार पर मक्के से पैग़म्बरे इस्लाम सलल्लाहो अलैह व आलेही व सल्लम के पलायन के बाद पैग़म्बरे इस्लाम द्वारा पहली नमाज़े जुमा का आयोजन हुआ। पैग़म्बरे इस्लाम जब मदीने के निकट पहुंचे तो उन्होंने बनी सालिम बिन औफ़ नामक क़बीले के निवास स्थान कोबा में शुक्रवार के दिन दोपहर में भाषण दिया और नमाज़े जुमा का आयोजन किया। इतिहासकारों के अनुसार यह इस्लामी इतिहास की पहली नमाज़े जुमा थी। यह विषय इस बात का स्पष्ट चिन्ह है कि नमाज़े जुमा का कितना महत्त्व है कि पैग़म्बरे इस्लाम ने अवसर मिलते ही जिसका तुरन्त आयोजन किया। जिस स्थान पर पैग़म्बरे इस्लाम ने पहली नमाज़े जुमा का आयोजन किया था वहां एक मस्जिद का निर्माण किया गया जो अब भी बाक़ी है।