अपने ही देश इसराइल में बुरी तरह घिरे हुए हैं ‘नेतन्याहू’

अपने ही देश इसराइल में बुरी तरह घिरे हुए हैं ‘नेतन्याहू’

Posted by

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू भारत के छह दिवसीय दौरे पर हैं. नेतन्याहू का भारत दौरा उस वक़्त हुआ है जब उन्हें अपने बेटे के कारण शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है.

पिछले सोमवार को नेतन्याहू के 26 वर्षीय बेटे याइर नेतन्याहू का एक ऑडियो टेप सार्वजनिक हुआ था.

ऑडियो में 26 वर्षीय याइर नेतन्याहू गैस टायकून कोबी मैमोन के बेटे ओरी से एक वेश्या पर खर्च करने के लिए पैसे उधार मांग रहे हैं. 2015 के बताए जा रहे इस टेप में याइर कह रहे हैं, “ब्रो, मेरे पिता ने तुम्हारे लिए 20 अरब डॉलर का सौदा करवाया है और तुम मुझे 400 शेकेल उधार नहीं दे सकते?”

इस ऑडियो टेप के सार्वजनिक होने के बाद इसराइल के विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नेतन्याहू से इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं. पूरे वाक़ये पर नेतन्याहू को सफ़ाई देने के लिए सामने आना पड़ा.

प्रधानमंत्री के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि उनका कोबी मैमोन से कोई संबंध नहीं है और उन्हें अपने बेटों के संबंधों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “याइर को गैस सौदे के बारे में कोई जानकारी नहीं है, और अगर उन्होंने इस बारे में कोई टिप्पणी की भी है तो ऐसा मज़ाक में ही किया है.”

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने एक लेख में लिखा है कि जिस शाम नेतन्याहू के बेटे की बेवकूफ़ी सार्वजनिक हुई उसी रात इसराइली एयरफ़ोर्स ने सीरियाई आर्मी ठिकानों पर हमला किया.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि इस तरह के हमले में प्रधानमंत्री की संलिप्तता सीधी होती है. न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि यह हमला नेतन्याहू के बेटे के टेप सार्वजनिक होने से उपजे विवाद से ध्यान हटाने के लिए था.

प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसराइल के दो स्कॉलरों का हवाला देते हुए लिखा है इसराइल के प्रधानमंत्री दुनिया के सबसे व्यस्त प्रधानमंत्रियों में से एक होते हैं. इतनी व्यसस्ता के बावजूद इसराली पीएम भारत के छह दिवसीय दौरे पर हैं.

इसराइल में नेतन्याहू के इस्तीफ़े की मांग तेज़ी से बढ़ रही है. नेतन्याहू ने इसे अतार्किक क़रार दिया है. उन्होंने कहा कि इस्तीफ़े की मांग किसी अनियमितता के कारण नहीं है बल्कि लोगों को उनकी नीतियों से समस्या है.

इसराइली मीडिया कि रिपोर्ट के मुताबिक़ अवैध रूप से गिफ्ट लेने के मामले में भी नेतन्याहू पर आरोप लगाए गए हैं. इसके साथ ही वो एक अख़बार से सकारात्मक कवरेज को लेकर सौदा करने के मामले में भी संदिग्ध हैं.

जर्मनी से युद्धपोत ख़रीद में भ्रष्टाचार के मामले में नेतन्याहू के क़रीबी सहयोगी भी संदिग्ध हैं.

नेतन्याहू के विरोधियों का कहना है कि उन्हें दो कारणों से पीएम पद से अयोग्य ठहराया जा सकता है. इसराइली मीडिया का कहना है कि जो व्यक्ति किसी अपराध में संदिग्ध है उसके हाथों इसराइल की कमान नहीं होनी चाहिए.

इसराइली मीडिया के मुताबिक देश को पूर्णकालिक प्रधानमंत्री चाहिए, ऐसा पीएम नहीं चाहिए जो अपना आधा वक़्त जांचकर्ताओं से पूछताछ में या बचाव पक्ष के वकीलों के साथ रणनीति पर काम करने में नष्ट करे.

इसराइल में जब तक कोर्ट दोषी नहीं ठहरा देता तब तक किसी व्यक्ति को गुनाहगार नहीं माना जा सकता. क़ानून के अनुसार आरोप लगने भर से कोई अपने पद से इस्तीफ़ा दे दे, ऐसा ज़रूरी नहीं.

ऐसा नहीं है कि बिन्यामिन नेतन्याहू पहले प्रधानमंत्री हैं जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. इससे पहले के प्रधानमंत्रियों के ख़िलाफ़ भी भ्रष्टाचार के मामले में जांच हुई है.

पूर्व प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट को भ्रष्टाचार के मामले में इस्तीफ़ा देना पड़ा और उन्हें जेल हुई. इसराइल के पूर्व पीएम एरियल शेरॉन की मौत जांच के दौरान ही हो गई थी. अब देखना है कि क्या नेतन्याहू को भी इस्तीफ़ा देना पड़ेगा? ज़ाहिर है नेतन्याहू अपने पूर्ववर्तियों पर हुई कार्रवाई से अवगत होंगे.

पत्नी पर भी लगाए गए हैं आरोप

1997 में पुलिस ने वोटों की ख़रीद की जांच में नेतन्याहू का नाम शामिल करने की सिफारिश की थी. हालांकि नेतन्याहू के ख़िलाफ़ कभी जांच नहीं हुई.

मध्य-पूर्व में भारतीय राजदूत रहे तलमीज़ अहमद कहते हैं, ”ज़ाहिर है कि नेतन्याहू अपने ही देश में घिरे हुए हैं, लेकिन इससे उनके भारत दौरे पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला है.”

लेकिन अगर भ्रष्टाचार की जांच में नेतन्याहू का नाम भी शामिल किया जाता है तो मामला कोर्ट में जाएगा. 1993 में इसराइली सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री के लिए यह अनिवार्य कर दिया था कि अगर उनकी कैबिनेट में किसी मंत्री के ख़िलाफ़ जांच होती है तो उसे मंत्रिमंडल से बाहर करना पड़ेगा. कुछ लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री के साथ भी ऐसा ही होना चाहिए.

राजनीतिक रूप से बिन्यामिन नेतन्याहू ख़ुद को दक्षिणपंथी बताते हैं. 1992 के आम चुनाव में लिकुड पार्टी की जब हार हुई तो उन्हें पार्टी का चेयरमैन बनाया गया.

बिन्यामिन नेतन्याहू के बेटे तो विवादों में अभी घिरे हैं लेकिन उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू पहले से ही विवादों में हैं. सारा नेतन्याहू पर सरकारी खज़ाने से 3,59,000 शेकेल के दुरुपयोग के आरोप हैं. इसराइल के न्याय मंत्रालय ने सारा नेतन्याहू को लेकर यह बात कही थी. यह मामला पिछले साल सितंबर महीने का ही है. हालांकि इसे भी बिन्यामिन नेतन्याहू ने बकवास क़रार दिया था.

नंवबर 2016: जर्मनी से ख़रीदे गए नए युद्धपोतों में गड़बड़ी को लेकर जांच शुरू हुई. इस सौदे में नेतन्याहू के वक़ील के शामिल होने के दावों के बाद जांच शुरू हुई थी.
जून 2016: एक फ्रांसीसी दलाल ने दावा किया कि उन्होंने 2009 के चुनावी कैंपेन में नेतन्याहू को लाखों यूरो दिए था ताकि नेतन्याहू चुनाव जीत सकें. नेतन्याहू ने इस आरोप को ख़ारिज कर दिया था. इसराइल के अटॉर्नी जनरल ने इसकी जांच का आदेश दिया था.
जुलाई 2015: नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा पर एक सरकारी कॉन्ट्रैक्टर से निजी काम कराने का आरोप लगा. हालांकि बाद में इस आरोप को वापस ले लिया गया.
मई 2013: एक सिंगल फ्लाइट में निजी बेडरूम के लिए एक लाख 27 हज़ार डॉलर की सार्वजनिक रक़म निजी शौक के ख़ातिर बर्बाद करने का आरोप.
नेतन्याहू के पहले कार्यकाल में उन पर अवैध रूप से गिफ्ट लेने का आरोप लगा.