आरएसएस, भाजपा,,, मेरे देश को बार-बार गाली मत दो!

आरएसएस, भाजपा,,, मेरे देश को बार-बार गाली मत दो!

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Mukul Saral
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जिन शब्दों को एक बार लिखने तक में मेरे हाथ कांप रहे हैं, उन्हें बार-बार बोलते हुए उनकी जुबां नहीं कांपती! जी हां! मैं देख रहा हूं कि आजकल एक बार फिर आरएसएस के कुछ ‘जानकार’, भाजपा प्रवक्ता और कुछ टीवी एंकर अपने कार्यक्रम में धड़ल्ले से “भारत तेरे टुकड़े होंगे” जैसे शब्द बार-बार दोहरा रहे हैं। साफ दिख रहा है कि इन लोगों का खास एजेंडा है। ये वाक्य या शब्द उन लोगों खासकर उमर खालिद और कन्हैया का नाम लेकर दोहराए जा रहे हैं जिनके ऊपर आज तक ये आरोप सिद्ध नहीं हो सका कि उन्होंने ऐसा कहा था। ये लोग भी सार्वजनिक तौर पर इससे इंकार कर चुके है और उनके खिलाफ इस सरकार की पुलिस भी अभी तक आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सकी है। फिर भी इन नौजवानों का नाम लेकर इस तरह की अनर्गल बातें कही जाती हैं। अब तो इसमें उन्होंने गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवाणी का नाम भी शामिल कर लिया है। पूरी चर्चा में इन सब लोगों के लिए बेतरह घृणा का प्रदर्शन किया जाता है और तरह-तरह के नाम दिए जाते हैं। जबकि दो साल पहले जिन लोगों ने ऐसे नारे लगाए थे वो तो नारे लगाकर फरार हो गए और उन लोगों को हमारी सरकार और हमारी पुलिस आज तक नहीं पकड़ सकी। तो ये भाजपाई, संघी और कुछ न्यूज़ एंकर दोहरी गलती या अपराध कर रहे हैं। एक तो इसके लिए उन लोगों को दोषी ठहरा रहे हैं जो इसमें शामिल नहीं रहे और दूसरा एक ऐसी बात दोहरा रहे हैं जिसे सुनने से आत्मा भी छलनी हो जाती है। जी हां, आप बताइए कि अगर आपके मां-बाप को कोई गाली दे तो क्या आप सार्वजनिक तौर पर बार-बार उस गाली को दोहराएंगे कि फलां ने मेरे मां या बाप को ऐसा कहा। ऐसे ही हमारा देश हमारा मां-बाप है, या कहूं कि उससे भी ज़्यादा। तो फिर उसके लिए हम टीवी पर बार-बार ऐसे शब्द मुंह से कैसे निकाल सकते हैं? ये शब्द मुंह से निकाले बिना भी तो हम अपनी बात कह सकते हैं, अपने आरोप लगा सकते हैं। लेकिन तब शायद घृणा और नफ़रत का हमारा एजेंडा कामयाब नहीं होगा। क्यों ग़लत कहा?