#ईमान_की_ज़रूरत : इस्लाम हमारी ज़रूरत है

#ईमान_की_ज़रूरत : इस्लाम हमारी ज़रूरत है

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Sikander Kaymkhani
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#ईमान_की_ज़रूरत

मरने के बाद के जीवन के अलावा इस संसार में भी ईमान और इस्लाम हमारी ज़रूरत है और मनुष्य का कर्तव्य है कि एक स्वामी की उपासना और आज्ञापालन करे।
वह कैसा मनुष्य है, जो अपने सच्चे मालिक को भूल कर दर दर झुकता फिरे।
मेरे दोस्तों बहनों भाइयो बुजुर्गो में सिकन्दर कायमखानी आप सब से क्षमा चाहता हूं अगर मेने दिल दुखाया कष्ट पहुंचाया तो सच्चे ह्र्दय से माफ कर दे पर इस्लाम हक़ है मौत का समय न जाने कब आ जाए। जो सांस अन्दर है, उसके बाहर आने का भरोसा नहीं और जो सांस बाहर है उसके अन्दर आने का भरोसा नहीं। मौत से पहले समय है। इस समय में अपनी सबसे पहली और सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी का आभास कर लें। ईमान के बिना न यहजीवन सफ़ल है और न मरने के बाद आने वाला जीवन।

कल सबको अपने स्वामी के पास जाना है। वहाँ सबसे पहलेईमान की पूछताछ होगी। हाँ, इसमें मेरा व्यक्तिगत स्वार्थ भी हैं कि कल हिसाब के दिन आप यह न कह दें कि हम तक पालनहार की बात पहँचाई ही नहीं गयी थी।

अगर ये सच्ची बातें आपके दिल में घर कर गयी। तो आइए! सच्चे दिल और सच्ची आत्मा वाले मेरे प्रिय मित्र उस मालिक को गवाह बनाकर और ऐसे सच्चे दिल से जिसे दिलों का हाल जानने वाला मान ले, इक़रार करें और प्रण करें:

‘‘अशहदु अल्लाइलाह इल्लल्लाहु व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू’ ’

‘‘मैं गवाही देता हूँ इस बात की कि अल्लाह के सिवा कोईउपासना योग्य नहीं (वह अकेला है उसका कोई साझी नहीं)और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल (दूत) हैं’’।

दयावान और करीम मालिक मुझे और आपको इस रास्ते पर मरते दम तक जमाए रखे। आमीन! इस इस्लाम और ईमान के कारण आपकी आज़माइश भी हो सकती है मगर जीत सदैव सच की होती है। यहां भी सत्य की जीत होगी और यदि जीवन भर परीक्षा से जूझना पड़े तो यह सोचकर सहन कर लेना कि इस संसार का जीवन तो कुछ दिनों तक सीमित है, अपने मालिक को प्रसन्न करने के लिए और उसको आँखों से देखने के लिए ये परीक्षाएँ कुछ भी नहीं हैं।

आपका कर्तव्य:

एक बात और – ईमान और इस्लाम की यह सच्चाई हर उस भाई काहक़ और अमानत है, जिस तक यह हक़ नहीं पहुँचा है, इसलिएआपका भी कर्तव्य है कि निःस्वार्थ होकर अल्लाह के लिए केवल अपने भाई की हमदर्दी में उसे मालिक के प्रकोप और दण्ड से बचाने के लिए दुख दर्द के पूरे अहसास के साथ जिस तरह अल्लाह के रसूल मुहम्मद ( सल्लल्लाहो अलैहेवसल्लम ) ने उम्र भर यह सच्चाई पहुँचाई थी, आप भी पहुँचाएँ। उसको सही सच्चा रास्ता समझ में आ जाए। उसके लिए अपने मालिक से दुआ करें। क्या ऐसा व्यक्ति मनुष्य कहलाने का हक़दार है, जिसके सामने एक अन्धा आँखों की रोशनी से महरूम होने के कारण आग के अलाव में गिरने वाला हो और वह एक बार भीफूटे मुँह से यह न कहे कि तुम्हारा यह रास्ता आग के अलाव की ओर जाता है। सच्ची मानवता की बात तो यही है कि वह उसे रोके, उसको पकड़े, बचाए और संकल्प करे कि जबतक अपना बस है, मैं कदापि उसे आग में गिरने नहीं दूंगा।

ईमान लाने के बाद हर मुसलमान पर हक़ है कि जिसको दीन की, नबी की, कुरआन की रोशनी मिल चुकी है वह शिर्क और कुफ़्र की शैतानी आग में फंसे लोगों को बचाने की धुनमें लग जाए। उनकी ठोड़ी में हाथ दे, उनके पाँव पकड़े कि लोग ईमान से हट कर ग़लत रास्ते पर न जाएँ। निःस्वार्थ और सच्ची हमदर्दी में कही बात दिल पर प्रभाव डालती है। यदि आपके द्वारा एक आदमी को भी ईमान मिल गया और एक आदमी भी मालिक के सच्चे दर पर लग गया तो हमारा बेड़ा पार हो जाएगा, इसलिए कि अल्लाह उस व्यक्ति से बहुत अधिक प्रसन्न होता है, जो किसी को कुफ़्र और शिर्क से निकाल कर सच्चाई के मार्ग पर लगा दे। आपका बेटा यदि आपसे बाग़ी होकर दुश्मन से जामिले और आपके बदले वह उसी के कहने पर चले फिर कोई भला आदमी उसे समझा बुझा कर आपका आज्ञा पालक बना दे तो आप उस भले आदमी से कितने प्रसन्न होंगे। मालिक उस बन्दे से इससे कहीं ज्यादा खुश होता है जो दूसरों तकईमान पहुँचाने और बाँटने का साधन बन जाए।