क्या सोशल मीडिया कर सकता है मदद!

क्या सोशल मीडिया कर सकता है मदद!

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ये तो हम सभी जानते हैं कि कामकाज और रोज़गार की तलाश में बहुत से लोग अन्य स्थानों और देशों में भी जाते हैं. प्रवासियों के योगदान को देखते हुए अन्तरराष्ट्रीय बाधाएँ भी दूर की जा रही हैं.

इसके बावजूद Migrants यानी प्रवासियों के लिए नफ़रत, उनके साथ बुरा बर्ताव करने और उनका शोषण करने का चलन भी बन्द नहीं हो रहा है.

साल 2017 के दौरान ऐसे मामले सामने आए थे कि अन्तरराष्ट्रीय गैंग विभिन्न देशों के नागरिकों को बेचने के लिए लीबिया के रास्ते सप्लाई करने का रैकेट चला रहे थे.

प्रवासियों को इंसानों के तस्करों से बचाने के लिए सोशल मीडिया की मदद लेने की गुहार लगाई गई है.

ख़ासतौर से फेसबुक से अनुरोध किया गया है कि वो बेहतर जीवन की तलाश में अन्य देशों के लिए निकलने वाले लोगों की तकलीफ़ों के बारे में जारूकता फैलाने में मदद करे जिससे और ज़्यादा लोग इस दलदल में ना फँसें.

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी संगठन के मीडिया डायरेक्टर लियोनार्ड डॉयल ने ये ख़ास गुज़ारिश की है.

उन्होंने बताया कि इंसानों के तस्कर सोशल मीडिया, ख़ासतौर से फ़ेसबुक को इस्तेमाल करके लोगों को एक बेहतर भविष्य का लालच देकर अपने जाल में फँसा रहे हैं. ये तस्कर लोगों को यूरोपीय देशों में सुरक्षित पहुँचाने और बेहतर कामकाज दिलाने के भी वादे करते हैं और बहुत से लोग इन झाँसों में आ जाते हैं.

बहुत से ऐसे लोगों को लीबिया में अनेक स्थानों पर बन्दी बनाकर रखा गया था और उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया जा रहा था.

उन मामलों के प्रकाश में आने के बाद अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी संगठन और अन्य एजेंसियों ने लोगों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाने और उन्हें स्वदेश पहुँचाने के लिए सक्रिय अभियान चलाया था.

इनमें बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं जो बेहतर कामकाज और बेहतर ज़िन्दगी जीने के लिए यूरोपीय देशों की तरफ़ भी रुख़ करते हैं मगर तस्करों के चंगुल में फँस जाते हैं.

अनेक स्थानों पर प्रवासियों को बेचने के मामले भी देखे जाते हैं.

लीबिया में नाईजीरिया के 180 नागरिकों को बन्दी बनाकर रखा गया था जिन्हें मंगलवार को नाईजीरिया वापिस भेजा गया है.

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी संगठन (IOM) ने ये इन्तज़ाम कराया था. संगठन एक जनवरी 2018 को भी इसी तरह की एक अन्य विमान यात्रा का इन्तज़ाम कर चुका है.

उसमें लीबिया में बन्दी बनाकर रखे गए 142 लोगों को गाम्बिया वापिस भेजा गया था.

साल 2017 के दौरान भी लीबिया की राजधानी त्रिपोली के आसपास के इलाक़ों में बन्दी बनाकर रखे गए क़रीब 20 हज़ार लोगों को उनके देशों को वापिस भेजने में मदद मुहैया कराई गई थी.

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी संगठन के आँकड़ों से पता चलता है कि अन्य देशों के क़रीब चार लाख 32 हज़ार नागरिक लीबिया में प्रवासी के तौर पर रह रहे हैं.

जबकि कुल मिलाकर ये संख्या सात से दस लाख के बीच होने का अनुमान लगाया गया है.

संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन मामलों की एजेंसी – International Organisation For Migration (IOM) ने तमाम अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आहवान किया है कि इंसानों की मजबूरी का फ़ायदा उठाने वाले इन तस्करों को तलाश करके गिरफ़्तार किया जाए और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाए.

ख़बरें आई हैं कि साल 2018 शुरू होने के कुछ ही दिनों के भीतर भूमध्य सागर में क़रीब 200 ऐसे लोगों की मौत हो गई जो बेहतर जीवन जीने की उम्मीद में यूरोपीय देशों की तरफ़ जा रहे थे.

लीबिया के समुद्री सुरक्षा बल ने बताया कि सिर्फ़ एक ही दिन यानी बुधवार को 100 से भी ज़्यादा ऐसे लोग लापता हो गए जो नावों में सवार होकर यूरोपीय देशों की तरफ़ जा रहे थे.