चीन को मदद पहुंचाने पर सीआईए का पूर्व अधिकारी गिरफ़्तार

चीन को मदद पहुंचाने पर सीआईए का पूर्व अधिकारी गिरफ़्तार

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अमरीका में सीआईए (सेंट्रल इंटैलिजेंस एजेंसी) के एक पूर्व अधिकारी को गिरफ़्तार किया गया है.

अमरीका के न्याय विभाग ने बताया कि जैरी चुन शिंग ली नामक अमरीकी नागरिक को सोमवार को न्यूयॉर्क के जेएफके एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया. उन पर कुछ गुप्त दस्तावेज़ रखने के आरोप लगाए गए हैं.

ली ने 1994 से 2007 तक सीआईए में काम किया, उसके बाद वे हॉन्गकॉन्ग चले गए.

ली की गिरफ़्तारी को एफ़बीआई की 2012 में शुरू हुई जांच से जोड़ कर देखा जा रहा है. यह जांच तब शुरू हुई जब चीन में अमरीका के जासूसी अभियान को बहुत नुकसान पहुंचा था.

दो साल पहले अमरीका के लगभग 20 मुख़बिरों को या तो मार दिया गया या फ़िर उन्हें जेल हो गई. अमरीकी खुफ़िया विभाग की हाल के सालों में यह सबसे बड़ी असफ़लता रही.

इस असफ़लता के लिए कौन ज़िम्मेदार है इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.

अमरीकी मीडिया में सूत्रों के हवाले से ऐसी ख़बरें चल रही हैं कि ली को चीन की मदद करने के शक़ की वजह से गिरफ़्तार किया गया.

जैरी चुन शिंग ली को ज़ेंग चेंग ली के नाम से भी जाना जाता है. कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार वे 1982 से 1986 तक अमरीकी सेना में रहे.

सीआईए के साथ उन्होंने 1994 से काम करना शुरू किया. उन्हें केस ऑफ़िसर का काम दिया गया जिसमें वे गुप्त तरीके से होने वाली बातचीत, गुप्त जगहों का पता लगाना, नियुक्तियां और एजेंट व मुख़बिरों के पैसों का लेनदेन आदि जिम्मेदारियों संभालते थे.

साल 2007 में जब उन्होंने सीआईए छोड़ा तो इस तरह की ख़बरें सामने निकलकर आईं कि उन्होंने एजेंसी से खफ़ा होकर नौकरी छोड़ी है.

नौकरी छोड़ने के बाद वे हॉन्गकॉन्ग चले गए और फ़िर साल 2012 में अमरीका लौटकर नॉर्थ वर्जीनिया में रहने लगे

चीन में अमरीका के मुख़बिरों का अचानक पकड़ा जाना और उनकी मौत होने पर अमरीकी खूफ़िया विभाग ‘एफ़बीआई’ ने इस मसले की जांच शुरू की.

अमरीका के न्याय विभाग के अनुसार इसी जांच के दौरान एफ़बीआई के एजेंटो ने हवाई और वर्जीनिया में जैरी के होटल के कमरों की तलाशी की, तलाशी में उन्हें दो छोटी किताबें मिलीं जिसमें गुप्त रिकॉर्ड रखे हुए थे.

इसके साथ ही इसमें हस्तलिखित कुछ जानकारियां भी थी जैसे, ”सीआईे के गुप्त कर्मचारियों के असली नाम और फोन नंबर.”

एफ़बीआई अधिकारियों ने इसी सिलसिले में ली से लगभग पांच बार सवाल-जवाब किए, जिसके बाद वे साल 2013 में अमरीका छोड़कर चले गए.

कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार होटल से मिली किताबों को जैरी ने कभी भी अपना नहीं बताया.

न्याय विभाग के अनुसार 53 साल के ली पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारियां अवैध तरीके से अपने पास रखने के आरोप लगे हैं. अगर ली पर लगे आरोप साबित हो जाते हैं तो उन्हें 10 साल तक की सज़ा सुनाई जा सकती है.

हालांकि ली पर जासूसी के आरोप नहीं लगे हैं, जासूसी के आरोपों में मृत्युदंड तक की सज़ा हो सकती है.

इसके साथ ही कोर्ट के दस्तावेज़ों में इस बात का ज़िक्र भी नहीं है कि ली और चीन की सरकार के बीच किसी तरह की गुप्त बातचीत हुई. हालांकि सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान उन पर चीन को मदद पहुंचाने का शक है.

हिरासत में लिए जाने के बाद मंगलवार को ली को ब्रुकलिन फ़ेडेरल कोर्ट के सामने पेश किया गया था.