#जस्टिस लोया की मौत ने न्यायपालिका को भयभीत किया है_देश में ‘तानाशाही’ आ चुकी है : संजय सिंह

#जस्टिस लोया की मौत ने न्यायपालिका को भयभीत किया है_देश में ‘तानाशाही’ आ चुकी है : संजय सिंह

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12 जनवरी 2018 का दिन भारत के इतिहास में दर्ज हो चूका है, यह दिन भारतीय लोकतंत्र में ‘काले दिन’ के सामान दर्ज हुआ है जब देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इन न्यायाधीशों में जस्टिस जे. चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे। इन जजों ने आरोप लगाया हैं कि न्यायपालिका में कार्य सही से नहीं हो रहा है।

जजों ने मुख्य न्यायाधीश पर भी अप्रत्यक्ष रूप से आरोप लगाए। जजों ने न्यायपालिका में गड़बड़ी और कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया। चार जजों में से एक ने ये भी कहा कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का संबंध सीबीआई जज लोया की मौत से भी है।

बता दें, कि कि सोहराबुद्दीन मामले की सुनवाई कर रहे है सीबीआई जज लोया की संदिग्ध परिस्तिथियों में मौत हो गई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हैं। लोया के परिवार ने भी उनकी मौत की जांच की मांग करी है।

गौरतलब हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट में लोया की मौत की जांच के लिए याचिका दायर करी गई है।

इस मामले को लेकर आप आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने ट्विट किया।

Sanjay Singh AAP

@SanjayAzadSln
जस्टिस लोया की संदिग्ध मौत ने न्यायपालिका को भयभीत किया है, केंद्र सरकार, न्यायपालिका की आज़ादी पर ताला लगाना चाहती है, देश में तानाशाही आ चुकी है आज की घटना इसका सीधा संकेत है। …

2:58 PM – Jan 12, 2018
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संजय सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा कि, जस्टिस लोया की संदिग्ध मौत ने न्यायपालिका को भयभीत किया है, केंद्र सरकार, न्यायपालिका की आज़ादी पर ताला लगाना चाहती है, देश में तानाशाही आ चुकी है आज की घटना इसका सीधा संकेत है।