KHAMIR IDP SETTLEMENT,  AMRAN GOVERNORATE, YEMEN - 14 APRIL 2017.

Ibtissam, a 15-year-old orphan girl lives in a ragged tent with her 7 siblings, in an IDP settlement in Khamir, about 100 km north of the capital Sana'a. 

The settlement houses more than 400 internally displaced families. 

Ibtissam fled here from the northern city of Saada. Her father was killed when her hometown was attacked in 2015 and her mother died of a stroke shortly after. Together with her brothers and sisters,  Ibtissam was evacuated from Saada by an uncle and aunt. They have been living in this IDP settlement in Khamir ever since.

Ibtissam and her siblings are among the more than 3 million people who have fled their homes in search for safety and security since the escalation of the conflict in 2015.

KHAMIR IDP SETTLEMENT, AMRAN GOVERNORATE, YEMEN - 14 APRIL 2017. Ibtissam, a 15-year-old orphan girl lives in a ragged tent with her 7 siblings, in an IDP settlement in Khamir, about 100 km north of the capital Sana'a. The settlement houses more than 400 internally displaced families. Ibtissam fled here from the northern city of Saada. Her father was killed when her hometown was attacked in 2015 and her mother died of a stroke shortly after. Together with her brothers and sisters, Ibtissam was evacuated from Saada by an uncle and aunt. They have been living in this IDP settlement in Khamir ever since. Ibtissam and her siblings are among the more than 3 million people who have fled their homes in search for safety and security since the escalation of the conflict in 2015.

जारी गृहयुद्ध से यमन में भारी तबाही, मदद की कोशिश

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यमन में कई साल से जारी गृहयुद्ध ने लाखों लोगों की ज़िन्दगी को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया है. बहुत से लोगों को भरपेट खाना-पानी नहीं मिल पा रहा है, तो बहुत से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं.

इन्हीं अमानवीय हालात को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने मदद पहुँचाने के वास्ते पाँच करोड़ डॉलर की रक़म मुहैया कराने का फ़ैसला किया है.

संयुक्त राष्ट्र के राहत कार्यों के प्रमुख मार्क लॉवकॉक ने यमन में गृहयुद्ध की वजह से पैदा हुए मानवीय संकट के हालात में लोगों की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र के Central Emergency Response Fund (CERF) से ये रक़म मुहैया कराने की घोषणा की है.

ग़ौरतलब है कि यमन में सरकार और हूथी विद्रोहियों के बीच कई साल से लड़ाई चल रही है.

यमन की सरकार को सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबन्धन का समर्थन हासिल है.

जबकि हूथी विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल होने की बात कही जाती है.

हाल के महीनों के दौरान ये लड़ाई और गम्भीर हो गई है जिसकी वजह से एक तरफ़ तो मानवीय संकट के हालात बन गए हैं और हज़ारों लोगों की मौत भी हो गई है.

लड़ाई में बुनियादी ढाँचा भी बुरी तरह तबाह हुआ है जिससे हैज़ा महामारी भी फैल रही है.

संयुक्त राष्ट्र के आपदा राहत कार्यों के प्रमुख मार्क लॉवकॉक का कहना था कि यमन में बद से बदतर और बेक़ाबू होते जा रहे मानवीय संकट को तभी रोका जा सकता है जब लड़ाई तुरन्त बन्द हो.

पिछले कुछ महीनों के दौरान सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबन्धन ने यमन जाने वाले लगभग सभी रास्ते बन्द कर दिए थे जिससे रोज़मर्रा के सामान का पहुँचना बन्द हो गया था.

अब एजेंसियों ने पुकार लगाई है कि यमन में सामान पहुँचाने के रास्तों और बन्दरगाहों को पूरी तरह खोला जाए तभी सामान की आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी.

इसके अलावा हालात बेहतर बनाने के लिए दिल खोलकर आर्थिक मदद की भी ज़रूरत पड़ेगी.

संयुक्त राष्ट्र के Deputy Spokesperson फ़रहान हक़ के ज़रिए जारी एक वक्तव्य में मार्क लॉवकॉक ने कहा कि यमन में लड़ाई तुरन्त रुकना बहुत ज़रूरी है तभी लोग अपनी ज़िन्दगियों को संगठित करके अपने हालात बेहतर बनाने के लिए कोशिशें शुरू कर सकेंगे.

इसके लिए ज़रूरी है कि लड़ाई से सम्बन्धित तमाम पक्ष आपसी समझदारी दिखाएँ और भविष्य की बेहतरी पर ध्यान दें.

इसके लिए एक टिकाऊ राजनैतिक हल निकाला जाना बहुत ज़रूरी है जिसमें संयुक्त राष्ट्र मदद करने के लिए तैयार है.

रिपोर्ट प्रस्तुति: महबूब ख़ान