डिजिटल इंडिया….कंबल बाबा के स्वास्थ्य शिविर का गज़ब नज़ारा, हाथ मरोड़ कर कैंसर का इलाज!

डिजिटल इंडिया….कंबल बाबा के स्वास्थ्य शिविर का गज़ब नज़ारा, हाथ मरोड़ कर कैंसर का इलाज!

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Sagar_parvez

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डिजिटल इंडिया …….देश बदल रहा है टेक्नोलॉजी अपने चरम पर!

कंबल बाबा के स्वास्थ्य शिविर का गज़ब नज़ारा, पैर पकड़ा, हाथ मरोड़ा और हो गया कैंसर का इलाज

पैर पकड़ा, हाथ मरोड़ा और जोर से दबा दिया। पोलियो ग्रसि त लोगों के पैर को झटका मारना तो कहीं किसी व्यक्ति का सिर पकड़कर उसे आगे-पीछे करना। ये नजारा है जबलपुर शहर के कंबल बाबा के स्वास्थ्य शिविर का।

यहां पर मरीजों को कोई दवा नहीं दी जाती है बस केवल कंबल ओढ़ाया जाता है और उसके हाथ-पैर की कसरत करवा दी जाती है। बस इसके बाद मरीज को आशीर्वाद देकर वहां से विदाई दे दी जाती है। बाबा का कहना है कि उसके कंबल में ही चमत्कार है।

तंत्र-मंत्र और काले जादू से असाध्य रोगों को दूर करने का दावा करने वाले मायावी बाबाओं की लम्बी फेहरिस्त है। जबलपुर के इस बाबा का भी यही दावा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बाबा यह दावा करते हैं कि वह महज उढ़ाकर बीमारी को छू-मंतर कर देते हैं। बाबा का दावा है कि उसे भगवान से अद्भुत शक्ति मिली है।

हालांकि इस बाबा की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये लोगों का इलाज मुफ्त में करते हैं। ऐसा भी नहीं है कि ये छिपकर अपना काम करते हैं। ये बाबा शिविर लगाकर सबसे सामने लोगों की बीमारी को दूर करते हैं। इस इलाज के लिए मरीज को पांच हफ्ते आना ही पड़ता है तभी वह बीमारी दूर होगी। पांचों हफ्ते बाबा मरीज को कंबल ओढाता है और उसकी पीठ ठोकता है।

एक ये भी शामिल है कि जब बाबा ने शिविर लगाया था उन दिनों 15 साल के बेटे को गोद में लेटाए बैठी ममता की आंखों में उम्मीद की लौ थी, कि उसका बेटा फिर से चल पाएगा। उसके बुढ़ापे की लाठी बनेगा। दुर्घटना के बाद उसका पैर तिरछा हो गया है। बेटा फिर चल सके इस ममता ने सब कुछ लुटा दिया। जमा पूंजी, यहां तक कि जेवर तक बेचकर अस्पताल में बेटे का इलाज कराया, लेकिन राहत नहीं मिली। फिर इस मां को कंबल वाले बाबा की जानकारी मिली। और कुछ ही दिन में बेटा चलने फिरने लगा।

बाबा का कहना है कि मैं गुजरात का रहने वाला हूं। भगवान की कृपा मुझ पर है। मैं नि:शुल्क दुआ देता हूं। कंबल ओढ़ाकर लोगों को ठीक कर देता हूं। मेरे नाम से कई लोग पैसा खाने लगे हैं इसलिए मैं जगह बदल देता हूं। इसके पहले सतना, रीवा आदि में शिविर लगा चुका हूं। पांच हफ्ते तो मरीज को आना ही पड़ेगा।