#देश ख़तरे में हैं मितरौ_EVM_न्यायपालिका_क्या पूरे देश को गुजरात बनाना चाहते हो!

#देश ख़तरे में हैं मितरौ_EVM_न्यायपालिका_क्या पूरे देश को गुजरात बनाना चाहते हो!

Posted by

परवेज़ ख़ान
==========
क्यूंकि आरोप सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पर लगे हैं और वह भी खुलेआम पूरे देश और दुनियां के सामने लगे हैं, मीडिया के कैमरों के सामने लगे हैं, इन्साफ करने वाले इंसाफ के रखवाले आज मजबूर थे, लाचार थे, उनकी कोई सुनने वाला नहीं था, तभी तो वह सारी मर्यादा लाँघ कर जनता के सामने आये और जो हो रहा है उससे देश की जनता को अवगत करवाया, यह इसलिए कि अगर आगे चल कर बुरा होता है तो उन्हें खुस से तो संतुष्टि रहेगी कि समय रहते वह खामोश नहीं रहे|

देश की न्यायपालिका पर जनता आज भी विश्वास करती है, और शायद भविष्य में भी यह विश्वास बना रहेगा पर सवाल तीखे हो चुके हैं, जनता के मन में न्यायपालिका को लेकर सवाल उठते हैं लोग डर की वजह से कुछ बोलते नहीं हैं, लेकिन ज़यादा समय खामोश रहना भी घातक हो सकता है, इसीलिए चार जजों को बोलना पड़ा है|

जजों के बोलने के बाद मोदी सरकार को बोलना चाहिए कि उसके राज में यह हो क्या रहा है, क्या आप पूरे देश को गुजरात बनाना चाहते हो, वैसे मोदी साहब का ‘गुजरात मॉडल’ सभी को याद है जहाँ मॉस किलिंग होती है और आरोपी दंगाई बच जाते हैं, जहाँ फ़र्ज़ी एनकाउंटर होते हैं और आरोपी बच जाते हैं, जहाँ मंदिरों पर आतंकवादी हमले होते हैं और मुसलमानों को फंसाया जाता है जो बाद में अदालत से बेकसूर साबित हो कर छूटे हैं, जहाँ सांसद को ज़िंदा जला दिया जाता है और उसके परिजनों को इन्साफ नहीं मिलता, वह गुजरात मॉडल जहाँ पूरी सरकार अपराधियों के साथ नज़र आती है और हर केस में शामिल अपराधी बच जाते हैं, अदालतों से क्लीन चिट मिल जाती है, तड़ीपार लोगों को अपराध मुक्त होने का सर्टिफिकेट मिल जाता है|

गुजरात में मोदी ने पूरे सिस्टम को बंधक बना लिया था, वहां पुलिस, अदालत, जज, नेता सब के सब मोदी के खौफ में काम करते थे|

प्रधानमंत्री बनने के बाद आज भी PMO गुजरात के अधिकारीयों से भरा हुआ है, यह वही अधिकारी हैं जो मुख्यमंत्री रहते गुजरात में मोदी के ‘गुजरात मॉडल’ में सहियोगी रहे थे| अब उन्हीं के ही सहयोग से देश को चलाया जा रहा है|

आतंकवाद के केसों में बंद सभी भगवाधारी आज रिहा होकर आज़ाद घूम रहे हैं, प्रोहित, प्रज्ञा को रिहा करने के लिए सरकारी वकील पर दबाव बनाया गया था, वह मजबूर वकील भी मीडिया के सामने अपनी बात बोली थी, पर ‘फिर भी बच गए’,,,देश सच ही में खतरे में हैं, हिंदी भाषी भारत में साम्प्रदायिकता चरम पर है, हिंदी भाषी समाचार पत्र, समाचार चैनल सरकारी संस्था का काम कर रहे हैं, देश खतरे में है,,,4 जजों ने जो कहा है वह कोई मामूली नहीं है,,,गंभीर हो चुकी बीमारी से आगाह कराया है,,,बीमारी का इलाज न किया गया तो देश पर साशन सीधे सीधे दिल्ली की जगह ‘नागपुर’ से चलने लगेगा,,,,मदरसों में मुस्लिम समाज के बच्चे ‘संस्कृत’ पढ़ेंगे,,,क्या नागपुर में अरबी, उर्दू पढाई जाएगी, क्या नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा लहरायेगा,,,सामंती, धर्म आधारित विवस्था की तरफ बढ़ रहे मौजूदा भारत में ‘गुजरात मॉडल’ सफल होगा,,,,देश ख़तरे में हैं मितरौ

मोदी सरकार के लिए न्यायपालिका से उठे तमाम सवाल अब काफी कठिन हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने चीफ जस्टिस पर आरोप लगाए हैं।

क्योंकि चीफ जस्टिस कहीं ना कहीं सरकार के दवाब में आकर काम कर रहे हैं। न्याय में निष्पक्ष भूमिका निभाने वाले जजों को साइड किया जा रहा है।

ऐसी बातों से नाराज जजों ने इतिहास में पहली बार प्रेस कांफ्रेंस की। इस प्रेस कांफ्रेंस को काफी गहरे नजरिए से देखा जा रहा है। इसके तमाम मतलब निकाले जा रहे हैं। वरिष्ठ वकीलों ने जजों के इस कदम की तारीफ की है।


लेकिन अब सवाल केंद्र नीत मोदी सरकार पर उठ रहे हैं। जिन जजों ने न्यायालय की कार्यप्रणाली पर तमाम सवाल उठाए हैं। उनमें से एक सवाल जस्टिस लोया की संदिग्ध मौत पर भी उठ रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट से तमाम लोग निष्पक्ष जांच की मांग की उम्मीद रख रहे हैं। जस्टिस लोया की मौत पर उठ रहे सवालों के घेरे में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह हैं।

इसलिए जांच में फेरबदल और निष्पक्ष ना होने के चांस बढ़ रहे हैं। इसी बात से सुप्रीम कोर्ट के चार जज काफी नाराज थे।

अब सवाल न्यायपालिका और सरकार की मंशा पर उठ रहे हैं। आम लोगों को न्याय की उम्मीद न्यायपालिका से होती है लेकिन जब न्यायपालिका ही न्याय नहीं करेगी तो न्याय व्यवस्था पर सवाल उठने लगेंगे। सरकार और स्वतंत्र न्याय व्यवस्था का गठजोड़ काफी घातक हो सकता है।

सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने न्यायपालिका के साथ चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े कर दिए।

एक यूजर ने लिखा कि, जब न्यायपालिका का हाल ये है तो सोचिए चुनाव आयोग का हाल क्या होगा ?

Shehla Rashid
@itsshehlafans
मोदीराज में जब ‘सुप्रीम कोर्ट’ के जजों का ये हाल है, तो सोचिए ‘चुनाव आयोग’ का क्या हाल होगा?#SupremeCourt #ElectionCommission #JusticeChelameswar

7:00 PM – Jan 12, 2018
1 1 Reply 10 10 Retweets 34 34 likes

दरअसल काफी समय से चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। ईवीएम में तमाम जगहों पर गड़बड़ी पाई गई हैं। जहां जहां गड़बड़ी निकली है वहां भाजपा के पक्ष में वोट जाते पाए गए हैँ।

तमाम विपक्षी दलों ने ईवीएम गड़बड़ी का आरोप लगाया है। लेकिन चुनाव आयोग कोई कार्यवाही नहीं करता है।

परवेज़ ख़ान