#देश ख़तरे में है_चार जजों को जनता के सामने क्यों आना पड़ा, अब सुप्रीम कोर्ट के 21 जज बताएंगे!

#देश ख़तरे में है_चार जजों को जनता के सामने क्यों आना पड़ा, अब सुप्रीम कोर्ट के 21 जज बताएंगे!

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भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के एक दो नहीं चार जजों ने मीडिया के सामने के सामने आ कर देश की सर्वोच्या न्यायलय में क्या चल रहा है से पूरी दुनियां और देश की जनता को अवगत करवाया, जजों का कहना था कि हम नहीं चाहते कि बाद में सवाल हो कि समय था तब क्यों नहीं बोले|

न्याय विवस्था की तरफ से उठे सवाल बेहद गंभीर हैं, बात खुल कर नहीं की गयी है पर सारी बात साफ़ हो चुकी है कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के इक्षा अनुसार काम कर रहा है, उन मुकदमों का निपटारा उन अदालतों में कराया जा रहा है जहाँ से सरकार को फायदा हो सके| जजों का कहना है कि देश खतरे में हैं, यकीनन देश खतरे में है, यहाँ बड़े बड़े दंगाई, दंगाइयों के समर्थक, आतंकवाद के आरोपी, आतंकवादी अदालतों की वजह से आज आज़ाद हैं, प्रज्ञा,प्रोहित, अमित शाह, वंजारा और खुद मोदी को सभी मामलों में क्लीन चित मिलना किसी अचम्भे से कम नहीं है|

गुजरात के मामलों में साफ़ दीखता है कि बड़े स्तर पर ‘सेटिलमेंट’ किये गए थे|

मामला बहुत अधिक गंभीर है, न्याय विवस्था पर उठे सवालों ने देश को झकझोड़ दिया है|

सुप्रीम कोर्ट की दिक्कतों को लेकर जनता के बीच आए चार जजों में से एक ने यह मान लिया था कि इसका हल न्यायालय के अंदर ही ठीक है। तो अब ये बात सामने आने लगी है कि 21 जजों के साथ क्यों जनता के बीच आए 4 जजों ने आपसी सहमति से रास्ता नहीं निकाला? यानी कि पहले सुप्रीम कोर्ट के चार जज जनता के बीच ये बताने आए कि सब कुछ ठीक नहीं है तो अब विचार किया गया है कि इन चार जजों के अलावा बाकी 21 जज अब चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मिलने वाले हैं। उम्मीद की जा रही है कि ये सम्मेलन अगले हफ्ते किया जाएगा।

बता ये भी दें कि कल जस्टिस कुरियन ने जो कि चार जजों में शामिल है, इस विचार पर कायम हुए कि सब कुछ ठीक तो सुप्रीम कोर्ट के अंदर ही होगा। चारों जजों में दो का लगभग बाकी 21 जजों से मेल जोल ठीक वहीं बाकी दो थोड़ा इस विषय पर दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे में खबर तो आ रही है कि बाकी 21 जजों के चीफ जस्टिस से मिलने का उद्देश्य इस मामले को सुलझाना है जो बीते शुक्रवार को हुआ।

आपको याद होगा कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये बात जनता के बीच रखी थी कि भारतीय लोकतंत्र को खतरा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। इन चारों जजों ने चीफ जस्टिस पर ये आरोप लगाए थे कि वो रोस्टर को अपने तरीके से चला रहे थे। यानी कि किस बेंच को कौन से मामले की सुनवाई करनी है इसमें चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा अपनी मनमानी चला रहे हैं।

जिन चार जजों ने शुक्रवार को मीडिया के सामने आकर देश की सर्वोच्च अदालत की अनियमितताओं को उजागर किया और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की निष्ठा पर सवाल उठाए उनमें जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल हैं।

जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर क़ानून के जानकारों की राय, जानिये!
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सलमान खुर्शीद : कूटनीतिक उत्तर देते हुए कहा ” तनाव को लेकर जजों को आज मीडिया को एड्रेस करना पड़ा ।” उज्ज्वल निकम : काला दिन ,, अब नागरिक सभी ज्यूडिशियल ऑर्डर को संदेह के तौर पर देखेगा।
केटीएस तुलसी : चौकाने वाली घटना । कोई ठोस वजह हो सकती है। जिसकी वजह से उन्हें इस तरह अपनी बात रखनी पड़ी।
रिटायर्ड जस्टिस मुकुल मुदगल : जब उनके पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता न बचा हो तभी वो सामने आये । लेकिन क्या जस्टिस लोया केस से इसका कनेक्शन है , मैं नहीं जानता ?
हंसराज भारद्वाज : पूर्व लॉ मिनिस्टर हंसराज भारद्वाज ने कहा, प्रतिष्ठा कम हुई। जब जनता का भरोसा खो दिया तो फिर क्या बचा? .
इंदिरा जयसिंह : ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस । जनता को यह जानने का हक कि ज्यूडिशियरी में क्या चल रहा है।
रिटायर्ड जस्टिस आरएस. सोढ़ी : चारों जजों के खिलाफ महाभियोग लाया जाना चाहिए । लोकतंत्र .बचाने के लिए हमारे पास संसद, कोर्ट और पुलिस सिस्टम है।
सुब्रमण्यम स्वामी : उनकी (जजों) की आलोचना नहीं करते। बड़े ईमानदार व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपनी लीगल करियर की भेंट चढ़ाई । प्रधानमंत्री देखें, साथ मिलकर काम करें ।
रिटायर्ड जस्टिस सोढ़ी के अलावा किसी क़ानून के ज्ञाता ने विरोध नहीं किया है ।