पंडित ने कहा-मैंने जो मुर्गा और सोमरस की बोतल नौकर के हाथ भेजी थी वही दे दो…वीडियो

पंडित ने कहा-मैंने जो मुर्गा और सोमरस की बोतल नौकर के हाथ भेजी थी वही दे दो…वीडियो

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Krishna Chandra Verma
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पंडित के लिये उसका एक भगत भुना हुआ मुर्गा और एक बोतल फल का सोमरस ले कर आया पंडित ने अपने नौकर को बुलाकर चीजें उनके घर ले जाने को कहा !

नौकर एक बहुत चालाक था…यह जानते हुए पंडित ने उससे कहा—देखो !! उस कपड़े में जिंदा चिड़िया है…और बोतल में जहर है !

खबरदार…जो रास्ते में उस कपड़े को हटाया…क्योंकि अगर उसने ऐसा किया तो चिड़िया उड़ जाएगी…और बोतल सूंघ भी ली तो तुम निबट जाओगे !! समझे…?

नौकर भी पंडित को खूब पहचानता था…उसने एक आरामदेह कोना ढूंढा और बैठकर भुना मुर्गा खा गया….उसने बोतल में जो सोमरस था वह भी सारा पी डाला…एक बूंद भी नहीं छोड़ा !

उधर पंडित भोजन के समय घर पहुँचा और पत्नी से भोजन परोसने को कहा…उसकी पत्नी ने कहा—जरा देर ठहरो…खाना अभी तैयार नहीं है !

पंडित ने कहा—मैंने जो मुर्गा और सोमरस की बोतल नौकर के हाथ भेजी थी वही दे दो…वही काफी है…उसके गुस्से की सीमा न रही जब उसकी पत्नी ने बताया कि नौकर तो सुबह का गया अभी तक लौटा ही नहीं !

बिना कुछ बोले गुस्से से भरा पंडित अपने काम की जगह वापस गया तो देखा नौकर तान कर सो रहा है…उसने उसे लात मारकर जगाया और भगत द्वारा लाई गई भेंट के बारे में पूछा !

नोकर ने कहा—पंडित जी मैं घर जा रहा था तो इतने जोर की हवा चली कि चिड़िया के ऊपर ढका कपड़ा उड़ गया और जैसा आपने कहा था !! वह भी उड़ गई !

मुझको बहुत डर लगा कि आप सज़ा देंगें और मैंने बचने के लिए बोतल में जो जहर था वह पी लिया…और अब यहाँ लेटा-लेटा निपटने का इंतजार कर रहा था !😉

पंडित जी सर पकड़ कर बैठा है !!! 😥

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पाखण्डी बाबा बलात्कारी का आशीर्वाद हुआ खुफ़िया कैमरे में कैद….इस बाबा की करतूत को देख कर आप हैरत में पढ़ जाएंगे.
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Gopal Kant
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मेरी समझ मे ये नही आ रहा कि ममता बनर्जी के साथ लंदन गये उन हुनरमंद संपादको ,वरिष्ठ पत्रकारो के चम्मचें चुरा लेने पर इतनी हाय तौबा मचाने की जरूरत क्या है ! और तो और मौका देखकर पडौसी के बरामदे का बल्ब चुरा लेने वाले भी इसे राष्ट्रीय शर्म की बात बता रहे हैं ! कायदे से हमें इन काबिल आदमियो की इज्जत करनी चाहिये ! सलाम करना चाहिये इन बहादुरो को जो लंदन से चाँदी की चम्मच चुरा लाने का हौसला दिखा सके ! इसे इतनी मामूली बात भी मत समझिये ! सात हाथ का कलेजा चाहिये इसके लिये ! इतनी सारी चाक चौबंद व्यवस्था के बावजूद अंग्रेजो के घर मे घुसकर उनकी चाँदी की चम्मचे चुरा लेना बडी बात है ! इसके लिये इस गुणी आदमियों का सार्वजनिक सम्मान किया जाना चाहिये !
और फिर चोरो से अपना सामान वापस लेने मे शर्म करना भी क्यों चाहिये ! ये अग्रेंज दुनिया के सबसे बडे चोर हैं ! ये दो सौ साल तक हमारे यहाँ चोरी करते रहे ! ऐसे मे हमें इन बंदों की ,उनके नेक इरादे की तारीफ ही करना चाहिये जो अपना माल वापस लेने के इरादे से ये हिम्मत दिखा सके !
इस सारे मामले मे एक और बात की तरफ ध्यान दिया जाना जरूरी है ! चम्मचे चुराना हाथ की सफाई है ! आँखो से काजल चुरा लेने की टक्कर की कला है ये ! हमारी अपनी हस्तकला को हम ही प्रोत्साहित नहीं करेंगे तो और कौन करेगा ! इन बंदों ने सात समंदर पार जाकर गोरो को ये बताया है कि उनकी लाख कोशिशो के बाद भी भारतीय लोक कलायें जीवित हैं !
ये भी हो सकता है कि चूंकि ये बहादुर लोग पत्रकार है ! वैसे पत्रकार होते ही आदमी बहादुर और अकलमंद हो ही जाता है ! इसलिये ये तो पक्का है इन्हें चमचो की हैसियत पता होगी ! जानतें होगें ये कि जिंदगी मे चमचो की क्या अहमियत होती है ! चमचो के बिना जीना बेकार ही है ! किसी के पास चार चमचे भी ना हो तो उसे बात करने लायक नही माना जाता हमारे यहाँ ! ऐसे मे चमचे चुरा लेना तो उनकी दानिशमंदी का ही सबूत माना जाना चाहिये !
बंदें है तो हिंदुस्तानी ! हमसे ज्यादा कौन जानता है ! हम बडा आदमी मानते ही उसे है जिसके पास चार छह चमचे हो ! चमचे हों हमारे पास तो हम ज्यादा सुविधा से ,ज्यादा इत्मीनान से खा पी सकते हैं ! चमचे आपकी अपनी उँगलियो को गंदा होने से बचाते हैं ! आप लाख गंदे हों ,चमचे आपको साफ सुथरा दिखने मे मदद करते हैं ! ऐसे मे उन शरीफ आदमियों ने अपने लिये चार चमचे चुरा लिये हों तो किसी के पेट मे दर्द क्यो होना चाहिये !
सो मेरी सलाह तो यही है ! इन होशियार ,बहादुर ,गुणी लोगो की लानत मानत बंद करें ! इज्जत करें उनकी क्योकि उन्होने हमारी इज्जत बढाने का ही काम किया है !