परदेस से 600 अरब डॉलर, फिर भी…!

परदेस से 600 अरब डॉलर, फिर भी…!

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटॉनियो गुटेरेस ने कहा है कि लोगों का कामकाज के लिए अपने स्थानों से दूसरे स्थानों पर जाना यानी माइग्रेशन आर्थिक प्रगति का एक सकारात्मक साधन साबित हो रहा है.

Migration से वैश्विक आर्थिक प्रगति को सुनिश्चित बनाने के अलावा असमानता, लड़ाई-झगड़े दूर करने के साथ-साथ आपसी समझ बढ़ाने में भी मदद मिलती है.

महासचिव ने गुरूवार को न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में Migration की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी करते हुए ये विचार व्यक्त किए.

रिपोर्ट का नाम है – “Making Migration Work For All“.

इस मौक़े पर उनका कहना था कि अलग-अलग पहचान वाले Migrants के बारे में नकारात्मक या पूर्वाग्रह वाले विचार बनाने के बजाय तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए.

“अगर वैश्विक तौर पर इस बारे में ठोस पहल और कार्रवाई हो तो ये बहुत असाधारण कामयाबी होगी. ये एक मौक़ा है कि हम सभी प्रवासियों के उस योगदान को पहचानें और उसकी अहमियत को समझते हुए अपने समुदायों और समाजों के लिए फ़ायदेमन्द बनाएँ. साथ ही ये भी सुनिश्चित करें कि प्रवासियों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाए ताकि उनके साथ अन्याय और ज़्यादती ना हो.”

कामकाज, रोज़गार और बेहतर हालात की तलाश में जो लोग अपना स्थान छोड़कर किसी अन्य स्थान पर जाने को मजबूर होते हैं, उनके योगदान के बारे में सही जानकारी फैलाना बहुत ज़रूरी है.

इन करोड़ों Migrants यानी प्रवासियों और शरणार्थियों को अपनी ज़िन्दगी की जद्दोजहद में बहुत सी चुनौतियाँ का सामना करना पड़ता है.

महासचिव का कहना था कि Migrants यानी प्रवासियों की बदौलत अन्तरराष्ट्रीय विकास में बहुत बड़ा योगदान मिलता है.

प्रवासी लोग जहाँ रहकर कामकाज और रोज़गार के ज़रिये धन कमाते हैं, वो वहाँ से अपने देशों और घरों को भारी रक़म भेजते हैं.

साल 2017 में प्रवासियों द्वारा अपने घरों और देशों को भेजी गई रक़म क़रीब 600 अरब डॉलर थी.

इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि भारत के भी बहुत से लोग खाड़ी देशों, ब्रिटेन, अमरीका, कनाडा और यूरोपीय देशों में कामकाज करते हैं और भारी-भरकम रक़म अपने परिवारों को भेजते हैं.

उसी तरह बहुत से लोग भारत के भीतर ही रोज़गार और कामकाज की तलाश में जगह बदलते हैं इसलिए उन सभी के लिए हमदर्दी का माहौल होना बहुत ज़रूरी है.

महासचिव अंटॉनियो गुटेरेस का कहना था, “हमारे पास बेहतरीन मौक़ा है कि हम Migrants यानी प्रवासियों के लिए माहौल और हालात बेहतर बनाने के लिए एक नया चलन शुरू करें.”

“अगर वैश्विक तौर पर इस बारे में ठोस पहल और कार्रवाई हो तो ये बहुत असाधारण कामयाबी होगी. ये एक मौक़ा है कि हम सभी प्रवासियों के उस योगदान को पहचानें और उसकी अहमियत को समझते हुए अपने समुदायों और समाजों के लिए फ़ायदेमन्द बनाएँ. साथ ही ये भी सुनिश्चित करें कि प्रवासियों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाए ताकि उनके साथ अन्याय और ज़्यादती ना हो.”

“Migration यानी प्रवासन को आपसी भाई चारे और आर्थिक प्रगति के लिए एक उम्मीद के तौर पर देखा जाना चाहिए, ना कि नफ़रत फैलाने या परेशानी के किसी कारण के तौर पर.”

महासचिव का कहना था कि Migrants यानी प्रवासियों के साथ बुरा बर्ताव या बदसलूकी को रोकना भी एक बहुत बड़ी चुनौती है.

चूँकि बहुत से लोग दूसरे स्थानों से आए प्रवासियों से नफ़रत करते हैं और उन्हें नुक़सान पहुँचाने की कोशिश करते हैं, इससे प्रवासियों की ज़िन्दगी और कामकाज करने के हौसले पर बहुत बुरा असर पड़ता है.

रिपोर्ट प्रस्तुति: महबूब ख़ान