भगतसिंह और अछूत समस्या,,प्रधानमंत्री के मेरे बारे में यह विचार है तो क्या मुक्ति की उम्मीद रखूं!

भगतसिंह और अछूत समस्या,,प्रधानमंत्री के मेरे बारे में यह विचार है तो क्या मुक्ति की उम्मीद रखूं!

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Abhay Vivek Aggroia
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भगतसिंह (1923) – अछूत समस्या
” सिन्ध के एक मुस्लिम सज्जन श्री नूर मुहम्मद ने, जो बम्बई कौंसिल के सदस्य हैं, इस विषय पर 1926 में खूब कहा-वे कहते हैं कि जब तुम एक इन्सान को पीने के लिए पानी देने से भी इनकार करते हो, जब तुम उन्हें स्कूल में भी पढ़ने नहीं देते तो तुम्हें क्या अधिकार है कि अपने लिए अधिक अधिकारों की माँग करो? जब तुम एक इन्सान को समान अधिकार देने से भी इनकार करते हो तो तुम अधिक राजनीतिक अधिकार माँगने के अधिकारी कैसे बन गए?

“बात बिल्कुल खरी है। लेकिन यह क्योंकि एक मुस्लिम ने कही है इसलिए हिन्दू कहेंगे कि देखो, वह उन अछूतों को मुसलमान बना कर अपने में शामिल करना चाहते हैं।

अर्थात् क्योंकि एक आदमी गरीब मेहतर के घर पैदा हो गया है, इसलिए जीवन भर मैला ही साफ करेगा और दुनिया में किसी तरह के विकास का काम पाने का उसे कोई हक नहीं है, ये बातें फिजूल हैं। इस तरह हमारे पूर्वज आर्यों ने इनके साथ ऐसा अन्यायपूर्ण व्यवहार किया तथा उन्हें नीच कह कर दुत्कार दिया एवं निम्नकोटि के कार्य करवाने लगे। साथ ही यह भी चिन्ता हुई कि कहीं ये विद्रोह न कर दें, तब पुनर्जन्म के दर्शन का प्रचार कर दिया कि यह तुम्हारे पूर्व जन्म के पापों का फल है। अब क्या हो सकता है?चुपचाप दिन गुजारो! इस तरह उन्हें धैर्य का उपदेश देकर वे लोग उन्हें लम्बे समय तक के लिए शान्त करा गए। लेकिन उन्होंने बड़ा पाप किया। मानव के भीतर की मानवीयता को समाप्त कर दिया। आत्मविश्वास एवं स्वावलम्बन की भावनाओं को समाप्त कर दिया। बहुत दमन और अन्याय किया गया। आज उस सबके प्रायश्चित का वक्त है।”——–भगतसिंह (1923)-अछूत समस्या

दूसरी और मोदी कहते हैं, “गंदगी उठाना वाल्मीकि जाति के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव रहा होगा”। (Modi says, “Scavenging must have been a spiritual experience for the Valmiki caste”.)

लेकिन मुझ चूहड़े यानि भंगी को अभी भी अमानवीय जीवन जीने को बाध्य किया जा रहा है-देश के प्रधानमंत्री के मेरे बारे में यह विचार है तो क्या मुक्ति की उम्मीद रखूं.—–अभय—-

भगतसिंह (१९२३ —अछूत समस्या (से )
” संगठनबद्ध हो जाओ। तुम्हारी कुछ भी हानि न होगी। बस गुलामी की जंजीरें कट जाएंगी। उठो, और वर्तमान व्यवस्था के विरुद्ध बगावत खड़ी कर दो। धीरे-धीरे होनेवाले सुधारों से कुछ नहीं बन सकेगा। सामाजिक आन्दोलन से क्रांति पैदा कर दो तथा राजनीतिक और आर्थिक क्रांति के लिए कमर कस लो। तुम ही तो देश का मुख्य आधार हो, वास्तविक शक्ति हो। सोए हुए शेरो! उठो और बगावत खड़ी कर दो।” —भगतसिंह (१९२३—अछूत समस्या
क्या मोदी , कांग्रेस , बीजेपी, आरएसएस शहीद भगत सिंह को सही में श्रदांजलि दे रहे हैं —कितने धोखेबाज़ हैं ये. !!! ———अभय——-

=================अभय===============
—समझें और सामझाएं ——
पहल करें ——पहिये का रुख बदलने का
मुश्किल है ————-नामुमकिन तो नही

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PS : असली सफाई कर्मचारियों और मोदी की तस्वीरों से अंदाज़ा लगा सकते हो –की कितना धोका दे रहे हैं ये हमें