मध्यप्रदेश : महिला व पुरुष टीचर्स ने अपना सर मुंडवा कर किया प्रदर्शन_देश ख़तरे में है!

मध्यप्रदेश : महिला व पुरुष टीचर्स ने अपना सर मुंडवा कर किया प्रदर्शन_देश ख़तरे में है!

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फिल्म रोटी, कपडा और माकन,,,में एक गाना आप ने ज़रूर सुना होगा,,,”सच्चाई का मोल नहीं, चुप हो जा कुछ बोल नहीं, बीमार हो गयी दुनियां, बर्बाद हो गयी दुनियां,,,कल सर्वोच्च न्यायलय के चार जजों ने मजबूर हो कर अपनी बात देश के सामने राखी थी, जजों की प्रेस वार्ता के बाद देश की अंदरूनी सही स्थिति कुछ हद तक जनता के सामने आ सकी है, अभी बहुत कुछ ऐसा है जिसके बारे में जनता से छुपा कर रखा जाता है/रखा जाता रहा है| ख़ास कर आतंकवाद के मसले पर जनता हक़ीक़त से परचित ही नहीं हो पाती है, आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देते हैं ‘मूंछों’ वाले और पकडे जाते हैं ‘दाढ़ी/टोपी’ वाले|

सरकार/राज्य के पास बहुत शक्ति होती है, कोई भी स्टेट अपने नागरिकों को पूर्ण आज़ादी नहीं देना चाहता है| कुछ वर्षों पहले तो केंद्र सरकार के महाधिवक्ता ने अदालत में कहा था कि नागरिकों का शरीर उनका अपना नहीं होता है, उस पर राज्य यानी सरकार का भी अधिकार होता है, मतलब की आदमी आँख तो है पर वह आदमी की अपनी नहीं सरकार की है, जिसे सरकार जब चाहे ‘बंद’ रखने का हुकुम दे सकती है, आदमी की ज़बान तो है पर उस पर सरकार का अधिकार बनता है सरकार जब चाहे ‘ज़बान बंद’ रखने का हुकुम सुना सकती है,,,,अच्छा हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की कोई एक भी दलील नहीं मानी और नागरिकों के अधिकारों को बरक़रार रखा है|

मध्य प्रदेश में टीचर्स, महिला टीचर्स चार जजों से भी ज़यादा परेशान हो चुकी होंगी तभी तो वह मजबूरन अपने सर के बालों का मुंडन करवा रही है, यह सरकारें और सरकारी बाबू खुद को जनता का हाकिम समझते हैं और जनता इनको अपना ‘माई बाप’,,,देश खतरे में हैं सरकारें, बाबू लोग जनता के सेवकार होते हैं माई बाप नहीं|

ANI

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2h2 hours ago
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