मध्य प्रदेश : भैंसों के तबेले में चल रहे हैं स्कूल, नाली के गंदे पीने को पी रहे हैं छात्र!

मध्य प्रदेश : भैंसों के तबेले में चल रहे हैं स्कूल, नाली के गंदे पीने को पी रहे हैं छात्र!

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छतरपुर (मध्य प्रदेश) | मध्यप्रदेश में विकास की गंगा बह रही है, हर ओर खुशहाली है, यहाँ की सड़कें अमेरिका की सड़कों से भी अच्छी हैं, यहाँ की जनता कम से कम भारत में गुजरात के बाद सब से धनि और खुशहाल है, मध्यप्रदेश विकास का नया मॉडल है, जिस किसी को भी ‘विकास’ देखना या समझना हो वह मध्यप्रदेश ज़रूर देख ले|


सरकारी दावे और वादे अपनी जगह और हकीकत अपनी जगह, मुख्यमंत्री अमेरिका पहुँच कर अपने राज्य की सड़कों को अमेरिका से अच्छी बताते हैं वह उनकी राजनैतिक मज़बूरी, लाचारी, या बेशर्मी भी कही जा सकती है पर हकीकत तो यह है कि यहाँ कुर्सी में रहने की हैट्रिक बना चुके शिवराज सिंह चौहान के राज में चौतरफा प्रगति का ढोल पीटा जा रहा है लेकिन राज्य में सामाजिक विकास की ज़मीनी हकीकत बेहद दयनीय और शर्मनाक है. सर्व शिक्षा अभियान में भैंस के तबेले में पढ़ाई हो रही है और पीने के साफ़ पानी के अभाव में गांव के बच्चे नाले का पानी पीने के लिए मजबूर हैं . ये कहानी है राज्य के छतरपुर ज़िले की है|

छतरपुर ज़िले के राजनगर ब्लॉक में जिला शिक्षा विभाग की पोल खोलती तस्वीरे सामने आ रही है जो बता रही हैं कि बच्चो का भविष्य किस तरह वरवाद किया जा रहा है. मामला राजनगर तहसील के सुरजपुरा ग्राम पंचायत के बिगुलिया पुरा गांव का है जहॉ न तो बच्चो के लिये प्राथमिक शाला की बिल्डिंग है और न ही पीने को पानी, पिछले कई सालो से मासूम बच्चे ठंड में पेड़ के नीचे बैठकर शिक्षा लेने को मजबूर है और हैं| डपंप न होने से खेत से निकले नाली के गंदे पानी को पीकर अपनी प्यास बुझा रहे है.

शिक्षक की माने तो गांव में कई सालो से इसी तरह खुले आसमान में बच्चो को शिक्षा प्रदान की जा रही है, वहा पेयजल स्रोत की कोई व्यवस्था नहीं है.

जब इस पूरे मामले में जिले का आला अधिकारी से बात की तो वह मामले से अनभिज्ञ बताकर जांच के बाद कार्रवाई की बात कह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आए

शिवराज सिंह चौहान लाख दावे करे कि उनकी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में करोडो रूपए खर्च कर रही है लेकिन आज भी सरकारी स्कूल बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे है.