मलिक मुहम्मद और लंगड़े दैत्य की कहानी : पार्ट 4

मलिक मुहम्मद और लंगड़े दैत्य की कहानी : पार्ट 4

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हमने आप लोगों को कहानी सुनाते हुए कहा था कि एक राजा था कि जिसके सात लड़के थे।

छः बेटे एक पत्नी और दूसरा सौतेला था कि जिसका नाम मलिक मोहम्मद था। बेटे अपने बाप के सिंहासन पर बैठने के लिए सोने के पिंजरे में बंद तोते को लेने जाते हैं। पहले छः बेटे न केवल तोते और पिंजरे को नहीं खोज पाते बल्कि जुए में सब कुछ हार जाते हैं और भीख मांगने लगते हैं। लेकिन मलिक मोहम्मद राजा की लड़की को मुक्ति दिलाता है और देव के एक पैर को काट देता है।

राजा अपनी बेटी की उससे शादी कर देता है। यह राजा अपने वज़ीर की ज़बान काटने का आदेश देता है, क्योंकि वज़ीर चाहता था कि मलिक मोहम्मद पर झूठा आरोप लगाकर उसकी हत्या करादे और राजा की बेटी की अपने बेटे से शादी करादे। मलिक मोहम्मद ने निर्णय किया कि वज़ीर के शहर का एक चक्कर लगाकर आए कि जो निकट ही था। राजा ने आदेश दिया कि वज़ीर के शहर को सजाया जाए। मलिक मोहम्मद और कुछ वरिष्ठ दरबारी वज़ीर के शहर की ओर चल दिए।

मलिक मोहम्मद के छः भाई कि जो इसी शहर में भीख मांगते थे। जब उन्होंने सुना कि राजा का दामाद वज़ीर के शहर आ रहा है तो वे भी उसे देखने के लिए वज़ीर के शहर चले गए। तीन भाई कि जो भीख मांगते थे उन्होंने कहा कि वज़ीर के शहर के तीन दरवाज़े हैं। हम में से हर कोई एक दरवाज़े के सामने खड़ा हो जाएगा और हुक़्क़ा तैयार करके दामाद को देगा। हो सकता है उसकी नज़र पड़ जाए और वह हमें कुछ दान कर दे। उन्होंने हुक़्कों को तैयार किया। मलिक मोहम्मद जैसे ही पहले दरवाज़े के निकट पहुंचा, उसने देखा कि एक युवक हाथ में हुक़्क़ा लिए खड़ा है। युवक आगे बढ़ा। मलिक मोहम्मद ने उसे पहचान लिया, लेकिन भाई ने मलिक मोहम्मद को नहीं पहचाना और हुक़्क़े को उसके हाथ में थमा दिया। मलिक मोहम्मद ने एक दो कश लिए और हुक़्क़ा वापस कर दिया और आगे बढ़ गया। उसने दूसरे और तीसते द्वार पर भी अपने दो और भाईयों को पहचाना और हुक़्क़ों के कुछ कश लिए। बाद में उन्हें वापस कर दिए और अपने रास्ते पर आगे बढ़ गया।

इन दो भाईयों ने भी मलिक मोहम्मद को नहीं पहचाना। मलिक मोहम्मद समारोह स्थल पर पहुंचा और घोड़े से उतर गया और सोने से सजे हुए सिंहासन पर बैठ गया। अचानक उसने देखा कि स्नानग्रह के मालिक ने अपने चेले को एक थप्पड़ रसीद किया और कहा, पागल लड़के राजा का दामाद स्नानग्रह जाना चाहता है और तू अभी भी यहीं खड़ा है और कुछ नहीं कर रहा है। जाकर स्नानग्रह की आग को तेज़ कर दे। मलिक मोहम्मद ने देखा कि उसका यह चेला उसका भाई ही है। उसकी नज़र जब दूसरी ओर गई तो देखा कि बावरची ने भी अपने चेले को एक झापड़ रसीद कर दिया और कहा, अब दोपह हो गई है और राजा के दामाद को खाना परोसने का समय हो गया है और तू यहीं हाथ पर हाथ धरे खड़ा है। मलिक मोहम्मद ने ध्यान से देखा तो उसे ज्ञात हुआ कि बावरची का चेला भी उसका दूसरा भाई है। उसने जैसे ही दूसरी ओर ध्यान दिया तो देखा कि उसी क्षण सब्ज़ी पूरी बनाने वाले ने अपने चेले को थप्पड़ मारा और कहा कि कल सुबाह राजा के दामाद को नाश्ता कराना होगा, लेकिन तू यहां खड़ा हुआ कया कर रहा है। इस बार भी जब मलिक मोहम्मद ने देखा कि वह चेला भी उसका भाई है। वह क्रोधित हो उठा और उसने सेना को आदेश दिया कि वज़ीर के शहर पर हमला कर दे। लेकिन ज़बान कटा हुआ वज़ीर मलिक मोहम्मद के क़दमों पर गिर गया और इशारों से उससे आग्रह किया कि वह अपना फ़ैसला वापस लेले। मलिक मोहम्मद ने कहा, इस शर्त पर अपना आदेश वापस लूंगा कि उन तीनों स्नानग्रह के मालिक, बावरची और नाश्ता तैयार करने वाले को उपस्थित करे। वज़ीर ने तीनों लोगों को हाज़िर किया और मलिक मोहम्मद के आदेशानुसार उनकी जमकर पिटाई की ताकि वह फिर अपने निर्दोष चेलों की पिटाई न करें।

मलिक मोहम्मद कि जो अपने भाईयों को पहचानता था उसने अपने दिल में कहा कि यह जुआरी हैं। हो सकता है कि जुआरियों ने मेरे भाईयों के पैसे ले लियो हों और इसीलिए उनकी यह हालत हुई हो। उसने आदेश दिया कि समस्त जुएबाज़ों को हाज़िर किया जाए। उसके बाद उसने उनकी भी जमकर धुलाई की और कहा, इन तीनों का जितना पैसा लिया है वह इन्हें वापस करो। जुआरी ने कि जो भय से थर थर कांप रहे थे जो कुछ धन इन अजनबियों से लिया था वापस लौटा दिया। उसके बाद मलिक मोहम्मद ने आदेश दिया कि उन तीन भिखारियों को कि जिन्होंने द्वार के सामने उसे हुक़्क़ा दिया था उसकी सेवा में हाज़िर किया जाए। जब वे भी आ गए तो मलिक मोहम्मद अपने छः भाईयों को एकांत में ले गया और कहा, अच्छी तरह देखो, मैं तुम्हारा भाई हूं। भाईयों ने देखा तो मलिक मोहम्मद को पहचान गए लेकिन उन्होंने शर्म से सिर झुका लिए। मलिक मोहम्मद ने उन्हें और अधिक शर्मिंदा नहीं किया,वह मुस्कराया और उसने कहा, जो काम नहीं होना चाहिए था वह हो गया, अब मेरे साथ राजा के शहर चलो। उसके आदेश से उन्हें राजकुमारों वाले वस्त्र पहनाए गए और मलिक मोहम्मद के साथ राजा के महल में गए। मलिक मोहम्मद ने कहा, हे राजा, यह मेरे भाई मेरे देस से आए हैं और मुझे उनके साथ जाना होगा ताकि सोने के पिंजरे और तोते को लेकर आऊं।

राजा ने यात्रा की अनुमति दे दी, मलिक मोहम्मद ने यात्रा की तैयारी की और चल पड़ा। वे चलते रहे चलते एक शहर के निकट पहुंचे। इत्तेफ़ाक़ से शहर का राजा कि जो महल की छत पर खड़ा हुआ था, उसने दूर से देखा कि सात घुड़सवार युवक शहर की ओर चले आ रहे हैं। उसने स्वयं से कहा, इन युवकों के भेस से लगता है कि इनका संबंध किसी बड़े परिवार से है। मेरे भी सात लड़कियां हैं, उनकी शादी इन लड़कों से करा दूंगा। राजा ने कुछ लोगों को मलिक मोहम्मद और उसके भाईयों के स्वागत के लिए भेजा। जब वे शहर पहुंचे तो सेवक उन्हें महल तक ले गए। राजा को जब यह पता चला कि सातों भाई युवराज हैं तो वह बहुत प्रसन्न हुआ और उनके स्वागत के बाद कहा, हे शहज़ादों, मेरी सात लड़कियां हैं, मैं उनकी शादी तुमसे करना चाहता हूं। मलिक मोहम्मद और उसके भाईयों ने स्वीकार कर लिया। राजा के आदेशानुसार, शहर को सजाया गया और सात दिन तक जश्न का एलान कर दिया गया। बाद में राजा की सात लड़कियों की सात भाईयों से शादी हो गई।(