मलिक मुहम्मद और लंगड़े दैत्य की कहानी : पार्ट 5

मलिक मुहम्मद और लंगड़े दैत्य की कहानी : पार्ट 5

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कहा जाता है कि पुराने समय में एक राजा था उसके सात पुत्र थे।

6 बेटे एक पत्नी से थे जबकि एक बेटा दूसरी पत्नी से था जिसका नाम मलिक मुहम्मद था। राजा ने अपने बेटों को सोने के पिंजड़े में बंद एक तोता लाने को कहा। छह के छह पुत्र न केवल सोने के पिंजड़े में बंद तोता न ला सके बल्कि उनके पास जो कुछ भी भा वह जुए में हार चुके थे और नौबत भीख मांगने तक पहुंच चुकी थी किन्तु मलिक मुहम्मद ने दूसरे देश के राजा की बेटी को दैत्य से मुक्ति दिलाई थी और उसने दैत्य का एक पैर भी काट लिया था। मलिक मुहम्मद नगर के मंत्री के शहर गया, अपने भाईयों को तलाश किया और उनके साथ सोने के पिंजड़े में बंद तोते को ढूंढने निकल पड़े। वह एक नगर पहुंचे जहां पर एक राजा था और उसकी सात बेटियां थी और उसने अपनी बेटियों का विवाह मलिक मुहम्मद और उसके भाइयों से कर दिया।

राजा की छोटी बेटी मलिक मुहम्मद की पत्नी थी, मलिक मुहम्मद ने उससे कहा कि मुझे काम पर जाना है और मैं ज़िंदगी की ज़ंजीरों में जकड़ा कर नहीं रह सकता। यह बहुत ही ख़तरनाक रास्ता है। यदि सही सलामत वापस आया तो तुम्हारे साथ रहूंगा और यदि वापस न लौटा तो तुम दूसरी शादी कर लेना। यह सारे भाई अपनी पत्नियों के साथ कुछ दिन रहे और उसके बाद राजा से अनुमति लेने गये ताकि उसकी अनुमति के बाद अपने काम के लिए निकल जाएं। राजा ने अनुमति दी और उन्होंने अपनी पत्नियों को भी विदा कहा और घोड़े पर सवार होकर निकल पड़े। दिन रात चलते रहे, अंततः चौथे दिन दोपहर में वह दुर्ग में पहुंचे ।

मलिक मुहम्मद ने या अली कह कर कमंद फेंकी और दीवार के सहारे दुर्ग पर चढ़ गया। दुर्ग में प्रविष्ट हुआ और अपने भाइयों के लिए दुर्ग का द्वार खोल दिया। उन्होंने देखा कि दुर्ग में सात तबेला, सात भूसा रखने की जगह और सात कमरे थे और हर कमरे में एक देग़ में चावल भरा हुआ है किन्तु न किसी व्यक्ति का कोई अता पता नहीं है। मलिक मुहम्मद ने कहा कि सब लोग एक एक कमरे में चले जाएं। ईश्वर जो चाहेगा होगा। सब अपने अपने कमरे में चले गये, बैठे रहे यहां तक कि शाम हो गयी।

मलिक मुहम्मद जो अपने भाइयों को लेकर परेशान था और 6 सोच में बैठा था कि अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला और कमरे में एक सुन्दर लड़की प्रविष्ट हुई। हंसती और खिलखिलाती कमरे में प्रविष्ट होने वाली लड़की, कमरे को एक कोने में बैठ कर रोने लगी। मलिक मुहम्मद हैरान व परेशान उस लड़की को देखता रहा और सोचने लगा कि अभी कुछ देर पहले तक तो यह हंसती हुई आई थी और आने के बाद रोने लगी। वह दिरे से अपनी जगह से उठा और उस लड़की के पास पहुंचा और उससे कहा तुम रो क्यों रही हो। वह कहने लगी हे राजकुमार, हम छह बहनें हैं और उनमें से मैं सबसे छोटी हूं, हम परी हैं और हमें सब चीज़ों के बारे में पता है। हमें और हमारी बहनों को पता है कि तु सोने के पिंजड़े और तोते को तलाश करने आये हो, यह भी जान लो कि मैं और तुम, पति व पत्नी हैं। मेरी बहनें मुझसे ईर्ष्या करती हैं और वह तुम्हें जान से मारने की प्रतीक्षा कर रही हैं।

जल्दी करो ताकि मेरी बहनें न आ जाएं, और तुम्हें अपने साथ ले जाएं, कहीं छिप जाओ। मलिक मुहम्मद ने जैसे ही उस लड़की से यह बातें सुनीं, फ़ौरन जाकर अपने भाइयों को बता दिया और उनसे छिपने को कहा। इसके बाद वह छह परियां भी आ गयीं और उनकी समझ में आ गया कि कमरे में अवश्य कोई आया था। वह जल्दी से अपनी छोटी बहन के पास गयीं और उससे पूछा कि क्या कोई उनके कमरे में आया था? क्यों की तुम जल्दी आई थी, तो बताओ तुमने किसी को यहां देखा, तो नहीं यदि तूम नहीं बताओं की तो तूम्हें जान से मार देंगे। उनकी छोटी बहन ने कहा कि मैं उसके बारे में बता दूंगी किन्तु तुम सौगंध खाओ कि उसको कुछ भी नहीं करोगी। इसके बदले जहां हम लोग हर दिन शिकार के लिए जाते हैं, उन्हें वहीं भेजेंगे, हम आराम से उनका शिकार करेंगे और उन्हें खा जाएंगे। उसके बाद छोटी लड़की मलिक मुहम्मद और उसके भाइयों के पास आई और उसने कहने लगी कि मैंने तुम लोगो की जान का सौदा किया है तुम लोगों को अभी शिकार पर जाना होगा।

मलिक मुहम्मद और उसके भाईयों ने स्वीकार कर लिया। वह घोड़े पर सवार हुए और निकल पड़े। छोटी वाली लड़की उनको रास्ता बता रही थी। उसने धीरे से मलिक मुहम्मद के कान में फुसफुसा कर कहा कि जल्दी करो अपने भाइयों को ले जाओ और अपनी जान बचाओ। यहां से जाओगे तो रास्ते में तुम्हें एक नदी मिलेगी, यदि नदी तक पहुंच गये तो मेरी बहनें तुम्हारा कुछ भी बिगाड़ नहीं सकेंगी। छोटी लड़की ने यह बात कही और उसने अपना एक बाल उखाड़कर मलिक मुहम्मद को दिया और कहा यदि किसी दिन तुम्हें हमारी याद आये या किसी समस्या में ग्रस्त हो जाना तो इस बाल पर हाथ फेरना तो मैं तुरंत तुम्हारे पास उपस्थित हो जाऊंगी। उसके भाइ शिकार के बहाने निकल गये। जैसे ही वह दुर्ग से बाहर निकले सरपट नदी की ओर चल दिए। वह लड़कियां भी आपस में बैठकर बातें कर रही थीं ताकि वे आएं और उनका शिकार करें। काफ़ी समय बीत जाने के बाद बड़ी लड़की ने कहा कि वे नहीं आये, चलो छत पर चढ़कर देखते हैं कि क्या हो रहा है। छोटी वाली लड़की तुरंत उठी और उसने एक जादूई उपकरण उठाया और छत पर चढ़कर देखने लगी। उसने देखा कि मलिक मुहम्मद और उसक भाई अभी नदी तक नहीं पहुंचे। वापस आकर उसने कहा कि अभी वे शिकार कर रहे हैं। लड़कियां दोबारा बैठ कर बातें करने लगीं। कुछ समय बीता उनकी परेशानी बढ़ने लगी, बड़ी बहन उठकर देखना चाहती थी किन्तु उससे पहले छोटी वाली बहन उठी और दौड़कर छत पर चढ़ गयी, उसने देखा कि वे अभी तक नहीं पहुंचे।

लौटकर उसने बताया कि अभी रास्ते में हैं। लड़किया फिर बात करने में व्यस्त हो गयीं, यहां तक कि सूर्यास्त हो गया, बड़ी बहन की बेचैनी बढी, उसने जल्दी जादूई उपकरण उठाया और छत पर पहुंच गयी। उसने देखा कि अरे मलिक मुहम्मद और उसके भाई नदी के पास पहुंच चुके हैं। वह जल्दी से छत से नीचे उतरी अब उसकी समझ में आ गया कि यह काम उसकी छोटी बहन का है। ज़ोर से चिल्लाई और छह बहनें घोड़े पर सवार हुईं और घोड़े को नदी की ओर सरपट दौड़ा दिया। मलिक मुहम्मद भी अपने घोड़े को सरपट दौड़ा रहा था कि अचानक उसके मन में छोटी बहन की बात आयी, उसने पीछे मुड़कर देखा, उसने देखा कि वह छह परिया उसके निकट पहुंचने ही वाली हैं, उसने अपने छह भाइयों को आगे किया और स्वयं पीछे घोड़ा दौड़ाने लगा।

उसके भाइयों ने कहा कि पीछे क्यों रह गये, वह हम तक पहुंचने वाली हैं, उसने कहा कि तुम लोग जाओ, अगर मैं मारा भी गया तो कोई बात नहीं, क्योंकि मेरा कोई महत्त्व नहीं है किन्तु यदि तुम में से किसी को कुछ हो गया तो तुम्हारी कमर टूट जाएगी। इसी उठा पटक में वह नदी के पास पहुंच गये। वह छह भाइ पानी में उतर गये किन्तु जैसे ही मलिक मुहम्मद पानी में उतरना चाहा, तभी बड़ी बहन पहुंच गयी और उसने उसके घोड़े की दुम पकड़ ली। तभी छोटी बहन भी पहुंच गयी और उसने जल्दी से तलवार निकालकर घोड़े की दुम काट दी और मलिक मुहम्मद जल्दी से पानी में उतर गया। बड़ी बहन ने छोटी बहन को देखा और कहा देखा तुमने क्या किया? छोटी बहन ने कहा, हे बहन ईश्वर की इच्छा थी कि वह हमारे हाथ से भाग जाएं। मैं तलवार से उसकी गर्दन काटने वाली थी किन्तु निशाना चूक गया और तलवार दुम पर लग गयी, अब पछताने से कोई फ़ायदा नहीं। उन परियों को नदी पार करने की अनुमति नहीं थी इसलिए वह हाथ मलते हुए वापस दुर्ग लौट आईं। नदी पार करने के पश्चात मलिक मुहम्मद ने अपने भाइयों से कहा कि भाइयो इस घटना से हमारी जान बच गयी,अब आप वापस अपनी पत्नियों के पास चले जाएं और मैं अकेले सोने के पिंजड़े और तोते की तलाश में चला जाऊं, यदि मैं अपने अभियान में सफल हो गया तो हम साथ वापस जाएंगे, उसके भाइयों ने स्वीकार कर लिया और वह नगर लौट गये और मुहम्मद मलिक जंगल की ओर चल पड़ा।