#मुसलमान_ग़ौर_करे : बहुत समय पहले का एक क़िस्सा है!

#मुसलमान_ग़ौर_करे : बहुत समय पहले का एक क़िस्सा है!

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Sikander Kaymkhani
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दुनिया में बहुत सी बातें ऐसी होती हैं जिन्हें हर कोई जानता तो है लेकिन उस बात पर अमल सिर्फ न के बराबर करते है, मुसलमानों की माली हालत से कौन वाकिफ नहीं है, यहाँ इसमें जो बात लिखी है वो दूरे रस्ते से भी आप किसी भाई की मदद कर सकते हो, जब आप इतने काबिल हों तो आपको यह ज़रूर करना चाहिए.

और दूरे मदद लेने वाले का फ़र्ज़ भी बनता है की जब अपना काम हो गया तो अपनी मिली मदद को किसी और को लौटा दें, आप यकीन नहीं मानेगे अगर ये सिलसिला सहे तरीके से चलता है तो सारी दुनिया के मुसलमानों को अमीर बन्ने में ज्यादा वक़्त नही लगेगा, बशर्ते हर कोई अपना काम बहुत इमानदारी के साथ करता रहे बस !

बहुत समय पहले का एक किस्सा है एक औरत बहुत पहुंचे हुए बुजुर्ग के पास गई, और बोली “हुजूर” मुझे कोई ऐसा ताबीज लिख दें जिससे
कि मेरे बच्चे रात को भूख से रोया ना करें…।

उसकी ये बात सुनकर बुज़ुर्ग ने उसे कुछ लिख दिया…। और उसके अगले ही रोज़ किसी अनजान ने चुपके से पैसों से भरा थैला उसके
घर के आगंन में फेंका, थैले से एक पर्चा निकला, जिस पर लिखा था, कोई कारोबार कर लें…। इस बात पर अमल करते हुए उस औरत के शौहर ने एक दुकान किराए पर ले ली.

कारोबार में बरकत हुई, और दुकानें बढ़ती गईं… पैसों की बारिश सी हो गई… पुराने संदूक़ में एक दिन औरत की नज़र बुजुर्ग के लिखे कागज़ पर पड़ी… “न जाने बुजुर्ग ने ऐसा क्या लिखा था ? असमंजस में उसने कागज़ खोल डाला… लिखा था कि : “जब पैसों की तंगी ख़त्म हो जाये,
तो सारा पैसा तिजोरी में छिपाने की बजाय कुछ पैसे ऐसे घर में डाल देना जहाँ से रात को बच्चों के रोने की आवाज़ें आती हों