मैंने रखा है मुहब्बत अपने अफ़साने का नाम_महिला संगीतकार “उषा खन्ना”

मैंने रखा है मुहब्बत अपने अफ़साने का नाम_महिला संगीतकार “उषा खन्ना”

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Izhar Sayyed Arif
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मैंने रखा है मुहब्बत अपने अफ़साने का नाम ,
तुम भी कुछ अच्छा सा रख दो,अपने दीवाने का नाम ।
( 2 ) आज तुमसे दूर होकर ऐसे रोया मेरा प्यार ,
चाँद रोया साथ मेरे, रात रोई बार बार ।
( 3 ) हम तुमसे जुदा होके मर जायेंगे रो रो के ,
मर जाएगंगे रो रो के , मर जायेंगे रो रो । ………….. जैसे गीतों के साथ अगर आप कुछ इस तरह के शोख गाने सुनते है तो कितना सुखद अनुभव होता है ( a ) शायद मेरी शादी का ख्याल दिल में आया है इसीलिए मम्मी ने मेरी,तुम्हें चाय पे बुलाया है (बी ) पानी में, पानी में जले , पानी में जले मेरा गोरा बदन ? मेरे बदन की ज्वाला से, लहरों में देखो कैसिलगी अगन ।

ये है साठ के दशक में नौशाद , एस 0 डी 0 बर्मन, मदन मोहन, शकर जयकिशन, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, रवि, मदन मोहन, रोशन, हेमंत कुमार और ओ ० पी० नय्यर जैसे दिग्गज पुरुष संगीकारो के बीच अपना स्थान बनाने वाली महिला संगीतकार ” उषा खन्ना ” । जब मशहूर .निर्माता निर्देशक नासिर हुसैन अपनी दूसरी फिल्म ” दिल दे के देखो ” ( शम्मी कपूर ) बना रहे थे तब उन्होंने न सिर्फ आशा पारेख को चांस दिया बल्कि उषा खन्ना को पहली बार पुरुष प्रधान संगीत संसार में आज़माने को मौक़ा दिया । इस फिल्म के गाने ” दिल दे के देखो, दिल दे के देखो ” आदि बहुत पॉपुलर हुए और इसके बाद आयी फिल्म हम हिंदुस्तानी में भी उनके गाने काफी पसंद किये गए जिसमे ” छोडो कल की बातें, कल की बात पुरानी ” भी था ।आगे बढ़ते हुवे उन्हें मिली फिल्म “आओ प्यार करें ( जॉय मुखर्जी- सायरा बानो ) जिसके कुछ गाने तो एवर-ग्रीन की श्रेणी में शामिल किये गए, गाने थे ” जहाँ तू है वहां फिर चांदनी को कौन पूछेगा, तेरा घर हो तो जन्नत की गली को कौन पूछेगा ” ” दिल के आइने में तस्वीर तेरी रहती है ” ” तुम अकेले तो कभी बाग़ में जाया न करो ” ” जबसे बनी है ये दुनिया, प्यार सनम है प्यार जवान, आओ प्यार करें ” आदि आदि । यहाँ से होते हुए सत्तर के दशक के अंत तक उन्होंने हर साल एक दो फिल्मो में संगीत दिया ये और बात है के उनमे से अधिकतर फिल्मे ” B ” ग्रेड की थी जिन्हें उषा खन्ना ने अपने संगीत से बेहतर बनाने की पूरी कोशिश की जैसे फिल्म हनीमून का रफ़ी द्वारा गया गाना ” दिन है ये भर के, फूल चुन लें प्यार के, ओ साथी, ओ साथी, ओ साथी ओ ओ , फिल्म हवस का गाना ” तेरी गलियों में न रखेंगे क़दम, आज के बाद,” फिल्म स्वीकार किया मैंने का गाना ” अजनबी कौन हो तुम, जबसे तुम्हें देखा है” और चाँद की पास जो सितारा है । फिल्म दादा का गाना ” दिल के टुकड़े टुकड़े करके, मुस्कुरा के चल दिए, जाते जाते ये तो बताजा हम जियेंगे किसके लिए ” फिल्म आप ऐसे तो न थे का गाना ” तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शमिल है, जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है “

उषा खन्ना ने 150 से अधिक हिंदी फिल्मो में संगीत दिया और कई नए गायक व गायिकाओं को चांस दिया जिसमे से कुछ काफी मशहूर हुवे जो
हेमलता , मोहम्मद अज़ीज़ , शब्बीर कुमार , पंकज उदास , सोनू निगम ,रूप कुमार राठौर और अनुपमा देशपांडे आदि है ।

उषा खन्ना ने खुद भी अनेक गीत गए है अगर उनमे से कुछ गीत चुने जाएँ तो ” मधुबन खुशबु देता है, सागर सावन देता है ” ( साजन बिना सुहागन ) तेरे जैसा प्यारा कोई नहीं ( होटल ) देखो रे लोगो कितना ज़ालिम ( दिल ने फिर याद किया ) तेरी ज़ात पाक है ए खुदा, तेरी शान जल्लेजलालहु ( मैं हूँ अल्लादीन ) फिर आने लगा वही प्यार का आलम ( रफ़ी के साथ ) ।

उषा खन्ना के पिता मनोहर खन्ना जो जलदाय विभाग, ग्वालियर में सुपरिंडेंडेंट थे ( वो सुपरिन्टेन्डेन्ट के रूप में इतने बेवक़ूफ़ नहीं थे जितना के वो गधा कडेला है ) एक बार ऑफिस के किसी काम से वो बंबई ( मुंबई ) गए । वहां वो नरगिस की माँ जद्दन बाई से मिले । जद्दन बाई को जब पता चला के शायर भी है तो उन्होंने मनोहर खन्ना को हिंदी फिल्मो के लिए ग़ज़लें लिखने के लिए अनुबंधित कर लिया । यहाँ से उन्होंने जावेद अनवर के नाम से लिखा शुरू कर दिया । वही पिता की सहायता करते हुए उषा की पहचान नय्यर साहब से हुई और नय्यर ने ही उन्हें शशधर मुखर्जी से मिलवाया और नासिर हुसैन शशधर मुखर्जी के स्टोरी राइटर थे जिन्हें शशधर ने बाद में अपनी फिल्म स्वतंत्र रूप से डायरेक्शन के लिए दी थी ।

उषा खन्ना का विवाह प्रोडूसर, डायरेक्टर और मशहूर गीतकार सावन कुमार टाक से हुआ था लेकिन बाद में वो अलग हो गए हालाँकि दोनों अनेक फिल्मो में साथ काम किया । उषा खन्ना अपने लम्बे कॅरिअर के दौरान भी खुद को कुछ अलग थलग ही रखती थी इसलिए उनके निजी मामले कभी सामने नहीं आये ।

आँच ना आये नाम पे तेरे
खाक भले ये जीवन हो
अपने जहान में आग लगा दें
तेरा जहान जो रौशन हो

तेरे लिये दिल तोड़ लें हम
दिल तो क्या जग छोड़ दें हम
बिन फेरे हम तेरे,बिन फेरे हम तेरे ।।