!!ये कैसा दिन आ गया!!एक तरफ़ जज न्याय मांग रहे हैं, दूसरी तरफ़ शिक्षिकायें सिर मुड़वा रही है!

!!ये कैसा दिन आ गया!!एक तरफ़ जज न्याय मांग रहे हैं, दूसरी तरफ़ शिक्षिकायें सिर मुड़वा रही है!

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देश के अंदर बढ़ रही समस्याओं के कारण लोग परेशान हैं, अपनी परेशानी वह कहें किस से कोई सुनने को तैयार है, सरकारें अपने दम्भ में जो कुछ भी कर रही हैं समझती हैं सब सही हो रहा है, आम आदमी की तो इस समय कोई हैसियत ही नहीं है, ग़रीब का जीना मुशिकल हो गया है, अपराध बढ़ रहे हैं, आम आदमी ही किया सरकारी मुलाज़िम भी जब कोई कहना चाहते हैं सरकारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है, मजबूरन हालत ऐसे हो गए हैं कि जजों को मीडिया सामने आ कर अपनी परेशानी बयान करना पड़ती है तो वहीँ मध्यप्रदेश में अध्यापकों, अध्यापिकाओं को अपना सिर मुंडवाना पड़ता है|

Nizamuddin Khan
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ये कैसा दिन आ गया !!! एक तरफ जज सड़क पर आकर न्याय मांग रहे हैं दूसरी ओर शिवराज के मध्यप्रदेश में शिक्षक अपने मांगों को लेकर भी सड़क पर हैं। महिला शिक्षिकायें तो सिर तक मुड़वा रही है। यह राष्ट्रीय शर्म का विषय है और देश के अवाम के लिए डूब मरने वाली बात है। ऐसे सरकारों की इस देश को क्या जरूरत जो महिला अस्मिता और स्वाभिमान का ख्याल तक नहीं रख पा रही है।

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अनुराग मिश्रा
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जब लोक तंत्र का चौथा स्तंभ ही भ्रस्ट हो गया तो देश भ्रस्टाचारियो की पोल कौन खोलेगा
#यह लेख शहीदों की नगरी के मठाधीशों के नाम
#अपनी बीनो खाओ ,और बाल बच्चे पालो
#आप भ्रस्ट है आप चोर है ,
#आपको चोर कहने बाला नही मिला होगा
#हम क्रांतिकारियों के शहर के रहने बाले है और क्रांति करके मानेंगे
#यदि हमने क्रांति कर दी तो जिले के दर्जनों पत्रकार भाइयों के घरों में रोटी के लाले पड़ जाएंगे
#आप चोर है बने रहें लेकिन फालतू में खुद को बचाने के लिए दूसरों पर आरोप न लगाएं।
#लखनऊ से प्रकाशित एक झांटू और जिले का सबसे बड़ा ब्लैकमेलर समाचार पत्र के ब्यूरोचीफ और उनके चमचों के लिए खुली चेतावनी
#सभी पत्रकार जानते है कि जिले का कौन सा समाचार पत्र सबसे बड़ा ब्लैकमेलर और चोर है
शाहजहाँपुर के सभी पत्रकार भाइयों व सभी पत्रकार यूनियनों से विनम्र निवेदन हैं कि जब हम पत्रकारों की ब्लैकमेलिंग तथा भृस्टाचार लके खिलाफ कुछ लिखते है तो हमारे कुछ पत्रकार भाइयों को लगता है कि हम पत्रकारिता के सिस्टम के खिलाफ बोल रहे है आपका कहना है कि हमाम में सब नंगे है लेकिन हम नही मानते है कि सभी हमाम में नंगे है हो सकता है कुछ हमाम में नहाए ही नही हो ।
इसी तरह से पत्रकारो में भी कुछ बड़े ब्लैकमेलर और करप्ट है जो कि खुद के साम्राज्य में हस्तक्षेप नही चाहते है और यदि किसी पत्रकार ने उनके अलावा विज्ञापन ले लिया तो वह उसको फर्जी बताने से भी नही चूकते है।
जबकि पिछले कई दशक से पब्लिक व विज्ञापन दाताओं को बरगला कर 26 जनवरी या 15 अगस्त पर विज्ञापन छापते है और प्रधानों व अन्य विज्ञापन दाताओं से 400 की जगह 1500 की वसूली करते है ।उन पत्रकारो का विरोध करना यदि गलत है।
तो बाबा जी गलत है
जिसको विरोध में आना हो वह खुल कर विरोध में आ जाये।
बाबा ने ठाना है पत्रकरो के बीच का भृस्टाचार मिटाना है।