18 December 2017.  Rohingya children walk barefoot through the muck in Nget Chaung IDP camp in central Rakhine, Myanmar. Home to about 4,000 Rohingya since 2012, the camp is below sea level, with almost no tree cover. Makeshift shelters teeter on stilts above garbage and excrement. Around 60,000 Rohingya children remain trapped in 23 camps.

Background: https://www.unicef.org/media/media_102378.html

18 December 2017. Rohingya children walk barefoot through the muck in Nget Chaung IDP camp in central Rakhine, Myanmar. Home to about 4,000 Rohingya since 2012, the camp is below sea level, with almost no tree cover. Makeshift shelters teeter on stilts above garbage and excrement. Around 60,000 Rohingya children remain trapped in 23 camps. Background: https://www.unicef.org/media/media_102378.html

रोहिंज्या मुसलमानों की सुध लेने के लिए इजाज़त नहीं!

Posted by

म्याँमार के उत्तरी प्रान्त रख़ाइन में रोहिंज्या मुसलमानों के लिए हालात अब भी बेहतर होते नज़र नहीं आ रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मंगलवार को कहा है कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों को अब भी म्याँमार सरकार से रख़ाइन प्रान्त में जाने की इजाज़त नहीं मिली है.

ख़ासतौर से रोहिंज्या समुदाय के बच्चों तक मदद पहुँचाने की इजाज़त नहीं मिलने से संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियाँ बहुत परेशान हैं.

यूनीसेफ़ की प्रवक्ता मैरीक्सी मरकाडो ने हाल ही में रख़ाइन प्रान्त की यात्रा की है.

इस यात्रा के बाद उन्होंने कहा कि रख़ाइन प्रान्त में अब भी क़रीब साठ हज़ार रोहिंज्या बच्चे बेसहारा ज़िन्दगी जीने को मजबूर हैं.

“यूनीसेफ़ और हमारे साझीदार संगठनों और एजेंसियों को उत्तरी रख़ाइन में रहने वाले बच्चों के बारे में और ज़्यादा जानकारी हासिल नहीं है. क्योंकि म्याँमार सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और उसके साझीदार संगठनों को अब भी उत्तरी रख़ाइन में जाने की इजाज़त नहीं दी है.”

ऐसा लगता है कि उनके वजूद को बिल्कुल भुला दिया गया है. ये बच्चे केन्द्रीय रख़ाइन इलाक़े में ख़स्ता हाल शिविरों में फँस गए हैं जहाँ उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है.

ग़ौरतलब है कि रख़ाइन प्रान्त में म्याँमार के सुरक्षा बलों की हिंसा से बचने के लिए क़रीब साढ़े छह लाख रोहिंज्या मुसलमान भागकर बांग्लादेश पहुँचे हैं.

यूनीसेफ़ प्रवक्ता मैरीक्सा मरकाडो का कहना था, “यूनीसेफ़ और हमारे साझीदार संगठनों और एजेंसियों को उत्तरी रख़ाइन में रहने वाले बच्चों के बारे में और ज़्यादा जानकारी हासिल नहीं है. क्योंकि म्याँमार सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और उसके साझीदार संगठनों को अब भी उत्तरी रख़ाइन में जाने की इजाज़त नहीं दी है.”

“वहाँ की जो भी जानकारी मिली है, वो बहुत परेशान करने वाली है. 25 अगस्त 2017 से पहले उत्तरी रख़ाइन प्रान्त में यूनीसेफ़ के ज़रिए 4800 ऐसे बच्चों का इलाज किया जा रहा था जो गम्भीर कुपोषण का शिकार थे.

कुपोषण के शिकार बच्चों को अब ऐसी कोई मदद नहीं मिल पा रही है जिससे उनके जीवन को बचाया जा सके.”

उन्होंने पॉक्ताव इलाक़े जिन शिविरों का दौरा किया, उनमें दो की हालत बहुत ख़राब थी.

इन शिविरों तक सिर्फ़ नाव के ज़रिए ही पहुँचा जा सकता है.

उनमें से एक शिविर में स्वास्थ्य और साफ़-सफ़ाई के हालात बयान करते हुए मैरीक्सा का कहना था कि वहाँ इंसानों के मल-मूत्र के नालों और पीने के पानी के स्रोतों में कोई ज़्यादा अन्तर नहीं है.

शिविर में जगह-जगह गन्दगी के ढेर हैं जिनसे गम्भीर बीमारियाँ होने का ख़तरा है.

प्रवक्ता का कहना था कि यूनीसेफ़ रख़ाइन प्रान्त में बच्चों को मानवीय सहायता मुहैया कराने के लिए म्याँमार सरकार और रख़ाइन प्रान्त के अधिकारियों के साथ काम करने के लिए तैयार है.

इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि ये बच्चे किस धर्म या नस्लीय समुदाय के हैं, इन्हें मदद की सख़्त ज़रूरत है.

रिपोर्ट प्रस्तुति: महबूब ख़ान