शरीअती कानून के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं – फ़ातिमा अमजदी

शरीअती कानून के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं – फ़ातिमा अमजदी

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मुस्लिम महिला के उत्थान के लिये 5 प्रतिशत आरक्षण दे केन्द्र सरकार – शाकीरा फातिमा
शरीअत बचाओ कांफ्रेंस मे हजारों मुस्लिम महिलाओं ने किया तीन तलाक बिल का विरोध


जोधपुर। तन्जीम तहफ्फुजे हुकुके ख्वातीने इस्लाम के बैनर तले पब्लिक पार्क स्टेडियम के पास स्थित चैक में शरीअत बचाओ कान्फ्रेस की मुख्य वक्ता कनीज फातिमा अमजदी ने अपनी तकरीर में कहा की मुल्क में छिड़ी तलाक को लेकर सियासी बहस पर मुस्लिम औरतों ने अपना स्पष्टीकरण कर दिया है कि वह शरीयती कानून के साथ छेड़-छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी।

केन्द्र सरकार की ओर से जल्द बाजी में लिये गये फैसले की हम कड़ी निन्दा करते है कुरआन शरीफ में तलाक को बूरा माना गया है लेकिन औरत मर्द के साथ नहीं रह पाने या घुटन भरी जिदंगी से निजात पाने के लिये आखरी समाधान में तलाक की मंजूरी दी गई है। वह भी औरत के हकों की हिफाजत करते हुए। अब एक तरफ पति-पत्नी के साथ नहीं रहने के हालात में इस्लाम में तीन माह में नई जिदंगी का रास्ता दिखाया है, हम इस सभा के माध्यम से केन्द्र सरकार से गुजारिश करते है कि धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करना बन्द करें।

आलिमा सायमा फातिमा एवं हसीना फातिमा नूरी ने बताया कि हुकूमते हिन्द की तरफ से तलाक को लेकर जो कानुन बनाया गया है मुस्लिम औरते उसे कभी भी कबुल नहीं करेगी क्योकि शरई (इस्लामी कानूनी) तौर पर तीन तलाक पर बनने वाला कानून ही गलत है। तलाक के कानून की सबसे बड़ी कमी यह है कि मुजरिम को उस गुनाह की सजा दिलाना, जो गुनाह कानून में माना ही नहीं जा रहा है, जैसे कि बिल में यह है कि कानूनी तीन तलाक मान्य नहीं है ऐसा करने वालो को तीन साल की सजा और जुर्माना भूगतना पडे़गा और यह बहुत बड़ी खामी है जब तीन तलाक को माना ही नहीं जाएगा तो सजा किस बात कि ? इससे दो परिवारों के बीच में रंजिशे बढ़ेगी।

शरई कानून ने महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित रखा है और हमें शरीयत (इस्लामी कानून) से बेहद मोहब्बत है। प्रधानमंत्रीजी से हमारा एक सवाल है कि आज तीन तलाक पर नहीं बल्कि आपके राज में ना जाने कितनी माताओं, पत्नियों, बहनों और बेटियों ने देश में जातीय व धार्मिक नफरत के कारण न जाने कितने बेटो, पतियों, भाईयों और पिताओं को खो दिया है इस पर सख्त कानून की आज आवश्यकता है क्योंकि हमारे देश में प्ैप्ै जैसे नरभक्षी संगठनों की तरह मार काट आम होती जा रही है। इस पर सख्त कानून बनाये जायें।

शाकीरा फातिमा नूरी ने अपनी तकरीर में कहा की महिलाओं के सम्मान में पूरे देश में शराब पर प्रतिबन्ध लगाने के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं को 5 प्रतिशत् आरक्षण दे, केन्द्र सरकार बढती समाज की कुरीतियों के कारण मुस्लिम महिलाऐं ही नहीं बल्कि हिन्दुस्तान में रहने वाली 36 कौमों की महिलाऐं नशाखोरी और बेरोजगारी के कारण असुरक्षित है। इसलिए हमारी पूर जोर अपील है कि केन्द्र सरकार को धार्मिक मामलों पर हस्तक्षेप नहीं करे तो अच्छा है कानून पर पुनः विचार कर करोड़ों महिलाओं का सम्मान करें और जिन महिलाओं को शरई कानून बोझ लगता है उनके लिये और रास्ते खुले है।
प्रोग्राम की शुरूआत तिलावते कुरआन से हुई प्रोग्राम के अन्त में सलातो सलाम पढ़ कर दुआ हुई अन्त में प्रोग्राम में आई महिलाओं का शुक्रिया अदा किया गया। शरीयत बचाओं कान्फ्रेस के मौके पर रूखसार शेख, शाजिया परवीन, नसरीन, रूखसार बानों, सोफिया, अमरीन बानो, रूखसार काजी, सुल्ताना, जाहिदा बानो, नगमा खान, आबिदा उसमानी, हिना कौसर, हसीना फातिमा, जैबुनिषा, अफ्शा खान, मौनिका खान, शाहना खानम, शाहिना बानो सहित हजारांे महिलाएं मौजूद थी।

भवदीया
सीमा खान (सचिव)