षड़यन्त्रों को समझो

षड़यन्त्रों को समझो

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‎Suryansh Mulnivashi‎
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मनुवादी षड़यन्त्रों को समझो !

उत्तर प्रदेश के नगर इलाहाबाद में एक मनुवादी संगठन विश्व वेदान्त संस्थान का एक बड़ा विज्ञापन लगा हुआ है। विज्ञापन से ज्ञात होता है कि इस संगठन ने दिनांक 21 जनवरी 2018 को एक विचार गोष्ठी का आयेजन किया।

मुख्य बात इस गोष्ठी का विषय है जो है:- “वर्ण संस्कृति विरोधियों का उन्मूलन।”

विज्ञापन को देखकर यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि ये “वर्ण संस्कृति” क्या है ?

इसका उत्तर है कि वर्ण संस्कृति का अर्थ चार वर्णों अर्थात ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वाली असमानतामूलक और शोषक संस्कृति है। वास्तव में मनुवादियों ने चतुराई दिखाते हुए वर्ण व्यवस्था के स्थान पर वर्ण संस्कृति शब्द का प्रयोग किया है। अब स्पष्ट है कि वर्ण संस्कृति विरोधी वो लोग हैं जो वर्ण व्यवस्था, जाति व्यवस्था अर्थात असमानतामूलक और शोषक व्यवस्था का विरोध करके समतामूलक और शोषणमुक्त समाजव्यवस्था का निर्माण करने हेतु संघर्षशील हैं।

इससे यह भी स्पष्ट हो जाता है कि ऐसे मनुवादी आयोजन मनुवादी सरकार की सहमति से हो रहे हैं जिससे अशिक्षित, अज्ञानी और तथाकथित शिक्षित लोगों को मानसिक रूप से घोर वर्णवादी और जातिवादी बनाकर शोषित जातियों को संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित करके उनको उसी अंधकार युग में पहुंचा दिया जाए जब उनके गले में हांड़ी और कमर में झाड़ू बांधने पर बलपूर्वक विवश किया जाता था। इस प्रकार ये मनुवादी लोग अपने उसी तथाकथित स्वर्ण युग को पुनः प्राप्त करने के लिये तथाकथित घोर जातिवादी मानसिकता से कार्य कर रहे हैं। तथाकथित हिन्दू धर्म का सार वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था ही है। इसलिए इस प्रकार के कार्य करके ये मनुवादी अपने धर्म की ही स्थापना कर रहे हैं। लेकिन शोषित जातियों के लिये यह तथाकथित हिन्दू धर्म केवल दासता और शोषण की व्यवस्था का ही दूसरा नाम है।

परन्तु दुख का विषय है कि शोषित जातियां मनुवादियों के इस षड़यंत्र को जानबूझकर नहीं समझ रही हैं और शोषित जातियों के अधिकांश अशिक्षित और तथाकथित शिक्षित लोग हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं की पूजा करने में ही अपना कल्याण समझ रहे हैं।