सीमुर्ग़ की कहानी – पार्ट 2

सीमुर्ग़ की कहानी – पार्ट 2

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हमने कहा था कि एक निर्धन व्यक्ति था जो अपने परिवार के साथ रहता था।

काफ़ी प्रयास के बाद भी उसे कोई काम नहीं मिलता था। एक दिन जब वह निराश था और ख़ाली हाथ घर लौटना नहीं चाहता था, उसने समुद्र में कूदकर आत्महत्या का फ़ैसला किया। सीमूर्ग़ एक काल्पनिक परिंदे ने कि जिसका नाम फ़ार्सी साहित्य में सीमूर्ग़ है, जब यह देखा तो उसे बचा लिया और उसे एक मछली दी। एक धोखेबाज़ व्यक्ति ने रास्ते में उसे कुछ आटा देकर उससे मछली लेली।

उसके साथ यह घटना दो बार और घटी लेकिन हर बार सीमूर्ग़ ने उसे बचा लिया और हर बार उसे एक मछली दी। तीसरी बार सीमूर्ग़ ने उसे बताया कि मछली के पेट में हीरे जवाहरात भरे हैं, इसलिए इस बार उस व्यक्ति ने उस धोखेबाज़ व्यक्ति को मछली देने से इनकार कर दिया। दोनों के बीच झगड़ा होने लगा, सिपाही उन्हें राजा के पास ले गए। राजा ने जब पूरी बात सुनी तो उससे कहा कि वह सीमूर्ग़ को उसके पास लाए। वह व्यक्ति ख़ाली हाथ घर लौट आया। उसकी पत्नी ने पूछा क्या हुआ जो इस प्रकार परेशान होकर वापस लौटे हो? आटा कहां है? पति ने पत्नी को सारी कहानी बताई और कहा कि अब राजा ने उससे कहा है कि सीमूर्ग़ को उसके पास लेकर जाऊं। मैं उसे कैसे राजा के सामने ले जा सकता हूं? पत्नी नहीं समझ पायी कि उसके पति को कितनी बड़ी त्रासदी का सामना है।

उसकी आँखों के सामने हीरे मोती चमक रहे थे और सोचने लगी कि अब उसका जीवन सुख से गुज़रेगा। उस व्यक्ति ने बहुत ही बेचैनी में रात गुज़ारी, सुबह होने के बाद वह घर से चल पड़ा। सोचने लगा कि उसे क्या करना चाहिए। कभी उसके मन में आता था कि वह इस राज्य से भाग जाए और इन लोगों से अपनी जान बचाले लेकिन अंत में उसने समुद्र में कूदने का फ़ैसला किया ताकि संभव है इसी तरह से कोई रास्ता निकले। वह गया और समुद्र में कूद पड़ा। सीमूर्ग़ जो ऊपर ही उड़ रहा था उसने देखा तो सोचा कि यह व्यक्ति लालच में पड़ गया है और इसकी उसे आदत हो गई है, इसलिए उसे मरने दिया जाए। लेकिन जब लहरों ने उसे कई बार पटख़ा तो सीमूर्ग़ से रहा नहीं गया और उसने उसे बचा लिया और पूछ कि अब क्या हुआ है? अगर तुझे मरना ही है तो जा ऐसी जगह मर जहां मैं तुझे नहीं देख सकूं। उस व्यक्ति ने कहा कि मैं मछली के लिए नहीं आया हूं। फिर उसने पूरी कहानी सीमूर्ग़ को बताई। जब सीमूर्ग़ ने उस व्यक्ति की बात सुनी तो वह सोच में पड़ गया कि अब क्या करे। उसने अपने मन में कहा कि अगर मैं नहीं जाऊंगा तो इस बेचारे की गर्दन मार दी जाएगी। अगर जाऊंगा तो मेरे दो बच्चे भूख से मर जायेंगे। उसने काफ़ी सोच विचार के बाद, उस व्यक्ति के साथ जाने का फ़ैसला किया। वे दोनों राजा के महल की ओर चल दिए। रास्ते में उन्हें राजकुमार मिला जो शिकार के लिए जा रहा था। राजकुमार ने उस व्यक्ति से पूछा कि वह कहां जा रहा है? ग़रीब आदमी ने पूरी कहानी सुनाई और कहा कि उससे सीमूर्ग़ को महल में जाने के लिए बाध्य किया है लेकिन यह बेचारा अपने दो बच्चों के लिए चिंतित है और रो रहा है। राजकुमार ने जब सीमूर्ग़ को रोता हुआ देखा तो उस व्यक्ति से कहा कि वह सीमूर्ग़ को जाने दे और राजा से कहे कि वह उसे ला रहा था लेकिन मैंने उसे आज़ाद कर दिया ताकि वह जाकर अपने बच्चों की देखभाल कर सके।

सीमूर्ग़ ने जब राजा के बेटे का यह स्नेह देखा तो बदले में उसे अपने दो पंख दिए और कहा कि जब भी वह किसी कठिनाई में पड़ जाए और कोई रास्ता सुझाई न दे तो इन्हें आग में डाल देना, मैं तुरंत उपस्थित हो जाऊंगा। सीमूर्ग़ उड़ गया और राजकुमार ने भी अपने घोड़े को एड़ लगाई और शिकार करने चल दिया और वह व्यक्ति भी राजा के महल की ओर चल पड़ा। जब वह वहां पहुंचा और उसने पूरी घटना बताई तो राजा ग़ुस्से से लाल पीला हो गया और कहा, यह लड़का नहीं देख सकता कि मेरे पास सीमूर्ग़ हो।

कल राज्य का क्या करेगा? आने दो मैं जल्लाद से कहूंगा कि वह उसका सिर क़लम कर दे। राजकुमार दो दिन बाद जब शिकार से लौटकर राजा के पास गया तो राजा ने कहा, क्यों तूने सीमूर्ग़ को आज़ाद कर दिया? अब मैं परिंदे के स्थान पर तेरी गर्दन मारूंगा। लड़के ने कहा, आप मेरे पिता हैं जैसी आपकी इच्छा, लेकिन मरने से पहले मुझे नमाज़ पढ़ने की अनुमति दे दीजिए। राजा ने अनुमति देदी राजकुमार छत पर गया और जैसे ही उसकी नमाज़ समाप्त हुई उसने सीमूर्ग़ के एक पंख को आग में डाल दिया, सीमूर्ग़ तुरंत उपस्थित हो गया। राजकुमार ने कहा कि मेरे पिता मेरी हत्या करना चाहते हैं, इसलिए कि मैंने तुझे आज़ाद कर दिया था। सीमूर्ग़ ने उसे अपनी पीठ पर सवार किया और पड़ोसी राज्य के शहर के द्वार पर उतार दिया। लड़के ने देखा कि एक बूढ़ी महिला बैठी हुई है उसने उससे कहा, मैं यहां अजनबी हूं और किसी को नहीं पहचानता हूं, आज रात सिर छिपाने के लिए मुझे शरण दे दो। बूढ़ी महिला ने कहा कि मेरे पास कोई जगह नहीं है, मेरा घर किसी परिंदे के घोसले के बराबर है और मेरे पास गधे और भेड़ का एक एक बच्चा है और कुछ दूसरे बच्चे भी मेरे पास हैं। राजा के लड़के ने बूढ़ी के हाथ पर कुछ सोने के सिक्के रखे तो बूढ़ी की आंखे खुली रह गईं और उसने कहा कि उसका घर इतना बड़ा है कि उसमें राजा की पूरी सेना आ सकती है और उसमें एक व्यक्ति के अलावा कोई नहीं है। राजा का बेटा बूढ़ी के घर में कुछ दिन ठहरा।

जब वह शहर में घूम फिर चुका तो उसने बूढ़ी से पूछा कि क्या तुम्हारे शहर में दो राजा हैं? बूढ़ी ने कहा कि हां, राजा और उसकी लड़की इस शहर पर शासन करते हैं। राजा अलग से राजस्व वसूल करता है और राजकुमारी अलग से। राजकुमार ने जब यह सुना तो कहा, मां मेरे साथ एक भलाई और कर दो मुझे राजकुमारी के पास ले चलो। बूढ़ी ने कहा, मैं ले जाऊंगी लेकिन तू ख़ुद ज़िम्मेदार रहेगा, अगर राजकुमारी ने तुझे पसंद कर लिया तो कोई बात नहीं, लेकिन अगर उसका बाप आ गया तो वह तेरी गर्दन मार देगा। राजकुमार ने कहा, कोई बात नहीं। जो भी मेरे भाग्य में लिखा होगा वह मेरे सामने आएगा। मैं तुझे राजकुमारी के सिंहासन के पास ले जाऊंगी, लेकिन तुझे अपने हाथ रूमाल से बांधने होंगे। अगर लड़की ने तुझे पसंद कर लिया तो वह चुप रहेगी। लेकिन अगर पसंद नहीं किया तो वह अपनी अंगरक्षक 40 लड़कियों को आदेश देगी कि तेरे टुकड़े टुकड़े कर दें। वे चालीस लड़कियां हर दिन सुबह में फूलों से उस लड़की को सजाती हैं, और वह इसलिए ऐसा करती हैं कि जब राजा की बेटी छोटी थी तो प्रदिदिन एक फूल की बराबर बड़ी होती थी। बूढ़ी महिला ने अपने घर से राजा की लड़की के महल तक एक सुरंग बना ली थी कि जो लड़की के कमरे के सामने जाकर निकलती थी। वह जब भी चाहती थी इस रास्ते से महल जाती थी और वापस लौट आती थी।

एक दिन उसने लड़के को अपने साथ लिया और उसी रास्ते से उसे राजकुमारी के कमरे तक पहुंचा दिया। वहां उसने उसके हाथ एक रूमाल से बांधे और ख़ुद वापस लौट आई। लड़की जब सिंहासन पर बैठी तो उसने एक युवक की उपस्थिति का आभास किया। उसने समस्त लड़कियों को वहां से भेज दिया और केवल वज़ीर की लड़की और वकील की लड़की, जो उसकी ख़ास सेवक थी उसके पास रुकी रहीं। उसने बहाना बनाया और कहा कि आज उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है और इन दोनों को भी उसने उनके कमरों में भेज दिया। राजकुमारी ने राजा के लड़के को जिसके दोनों हाथ बंधे हुए थे बाहर निकाला और देखा कि कोई राजकुमार इस लड़के की भांति सुंदर नहीं है। वह इस लड़के पर फ़िदा हो गई, लेकिन वह नहीं चाहती थी कि किसी को इस की भनक लगे। वह ख़ुद गई और एक महिलाओं के वस्त्र लाकर उसने उस लड़के को पहनने के लिए दिए। उसने उस लड़के से कहा कि वह उससे शादी कर ले। लड़के ने उससे शादी कर ली लेकिन क्योंकि राजा और राजकुमारी में प्रतिस्पर्धा थी, वह जानती थी कि उसका पिता उसके विवाह को स्वीकार नहीं करेगा। लड़के से कहा कि इस विवाह के कारण उन्हें मरने के लिए तैयार रहना चाहिए, इसलिए कि मेरा पिता इसे स्वीकार नहीं करेगा।