*सुंदर पंक्तियां *- तो फिर .. उदासियों का .. हिसाब क्या रखें .. !!

*सुंदर पंक्तियां *- तो फिर .. उदासियों का .. हिसाब क्या रखें .. !!

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Chaitali Khattar – Kanpur
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*सुंदर पंक्तियां -*

*समय की .. इस अनवरत बहती धारा में ..*
*अपने चंद सालों का .. हिसाब क्या रखें .. !!*

*जिंदगी ने .. दिया है जब इतना .. बेशुमार यहाँ ..*
*तो फिर .. जो नहीं मिला उसका हिसाब क्या रखें .. !!*

*दोस्तों ने .. दिया है .. इतना प्यार यहाँ ..*
*तो दुश्मनी .. की बातों का .. हिसाब क्या रखें .. !!*

*दिन हैं .. उजालों से .. इतने भरपूर यहाँ ..*
*तो रात के अँधेरों का .. हिसाब क्या रखे .. !!*

*खुशी के दो पल .. काफी हैं .. खिलने के लिये ..*
*तो फिर .. उदासियों का .. हिसाब क्या रखें .. !!*

*हसीन यादों के मंजर .. इतने हैं जिंदगानी में ..*
*तो चंद दुख की बातों का .. हिसाब क्या रखें .. !!*

*मिले हैं फूल यहाँ .. इतने किन्हीं अपनों से ..*
*फिर काँटों की .. चुभन का हिसाब क्या रखें .. !!*

*चाँद की चाँदनी .. जब इतनी दिलकश है ..*
*तो उसमें भी दाग है .. ये हिसाब क्या रखें .. !!*

*जब खयालों से .. ही पुलक ..* *भर जाती हो दिल में ..*
*तो फिर मिलने .. ना मिलने का .. हिसाब क्या रखें .. !!*

*कुछ तो जरूर .. बहुत* *अच्छा है .. सभी में यारों ..*
*फिर जरा सी .. बुराइयों का .. हिसाब क्या रखें .. !!!*