13 जनवरी का इतिहास : 13 जनवरी 1818, को उदयपुर के प्रतापी राणा ने मेवाड़ के संरक्षण के लिए अंग्रेज़ों के साथ संधि की थी!

13 जनवरी का इतिहास : 13 जनवरी 1818, को उदयपुर के प्रतापी राणा ने मेवाड़ के संरक्षण के लिए अंग्रेज़ों के साथ संधि की थी!

Posted by

1709, मुग़ल शासक बहादुर शाह प्रथम ने सत्ता संघर्ष में अपने तीसरे भाई कमबख्श को हैदराबाद में पराजित किया।

1818, उदयपुर के राणा ने मेवाड़ के संरक्षण के लिए अंग्रेज़ों के साथ संधि की।

1842, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी की सेना के अधिकारी डॉ. विलियम ब्राइडन ‘एंग्लो अफ़गान युद्ध’ में ज़िंदा बचने वाले इकलौते ब्रिटिश सदस्य थे।

1849, द्वितीय एंग्लो सिख युद्ध के दौरान चिलियांवाला की प्रसिद्ध लड़ाई शुरू हुई।

1910, अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में दुनिया का पहला सार्वजनिक रेडियो प्रसारण शुरू हुआ।

1948, महात्मा गांधी ने हिन्दू-मुस्लिम एकता बनाये रखने के लिये आमरण अनशन शुरू किया।

1993, अमरीका और उसके घटक देशों ने दक्षिणी इराक़ में नो फ़्लाई ज़ोन बनाने के लिए इराक़ पर हवाई हमले किए।

1995, बेलारूस नाटो का 24वां सदस्य देश बना।

2006, शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य आक्रमण से ब्रिटेन का इन्कार।

2010, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट के कारण जर्मनी की अर्थव्यवस्था में साल 2009 के दौरान 5% की गिरावट दर्ज की गई। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यह सबसे बड़ी गिरावट थी।

=====================

13 जनवरी सन 1450 ईसवी को पुर्तग़ाल के नाविक बारथोलोमियु डेयाज़ का जन्म हुआ। उन्होंने सन 1488 ईसवी में एटलांटिक महासागर की महत्वपूर्ण यात्रा की जिसके दस वर्ष बाद उनके स्वदेशी नाविक वास्को डीगामा ने डेयाज़ के जलमार्ग का प्रयोग करके भारत के जलमार्ग की खोज की। इस मार्ग की खोज पश्चिमी देशों के लिए इस लिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि उसमानी शासन ने 1453 में कुस्तुनतुनिया पर अधिकार करके योरोप से एशिया के मार्ग को बंद कर दिया था।
=====================
13 जनवरी सन 1941 ईसवी को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान योरोप के संयुक्त देशों ने लंदन में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सम्मेलन का आयोजन किया। चर्चिल के सुझाव पर यह सम्मेलन हुआ था। इसका उद्देश्य इटली और जर्मनी के मुक़ाबले में युद्ध के मोर्चों पर योरोपीय देशों के राष्ट्राध्यक्षों की नीतियों को समन्वित करना था । इस सम्मेलन में ब्रिटेन, हॉलैंड, बेल्जियम, फ़्रांस, ग्रीस नार्वे, लग्ज़म्बर्ग और डेनमार्क ने भाग लिया था।

=====================

13 जनवरी सन 1992 ईसवी को अलजीरिया के तत्कालीन राष्ट्रपति शाज़ली बिन जदीद के अपने पद से हटने के बाद सैनिकों ने सरकारी उच्च परिषद का गठन किया। इस परिषद का अध्यक्ष मोहम्मद बूज़ियाफ़ को बनाया गया और वे अलजीरिया के राष्ट्रपति भी बने। उन्होंने वर्ष 1991 के संसदीय चुनावों के परिणामों को निरस्त कर दिया जिनमें इस्लामी मुक्तिमोर्चे को सफलता मिली थी। सेना ने अलजीरिया संकट को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बूज़ियाफ़ को राष्ट्रपति बनाया था किंतु वे इसमें सफल न हो सके। क्योंकि उन्होंने इस देश के इस्लामी संगठनों को आतंकवादी घोषित करके उनका दमन आरंभ कर दिया जिससे राजनैतिक संकट हिंसा में परिवर्तित हो गया।
=====================
13 जनवरी सन 1915 ईसवी को इटली के इवेज़ानो नगर में भीषण भूकम्प आया जिसमें तीस हज़ार लोगों की मौत हो गयी।
=====================
13 जनवरी सन 1963 ईसवी को टोगों के राष्ट्रपति सिलवेनस ओलिम्पियो की एक सैनिक विद्रोह में हत्या कर दी गयी। यह विद्रोह निकोलस ग्रुनिज़्की नामक सेनाधिकारी ने कराया था। इसके तीन वर्ष बाद ठीक उसी दिन ग्रुनिज़्की को एयाडेमा नामक सैनिक अधीकारी ने अपदस्थ कर दिया।

=====================

23 दैय सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान के विभिन्न नगरों में प्रदर्शनों और रैलियों के दौरान आम जनता और शाह के सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई जिसके दौरान लोग मारे गये। इसी प्रकार आज के दिन तेहरान के छात्रों और लोगों ने, जिन्होंने तेहरान विश्वविद्यालय में धरना दिया था, शाह की सरकार के प्रति अपने विरोध की घोषणा और इमाम ख़ुमैनी की स्वदेश वापसी की मांग की। यह प्रदर्शन ऐसी स्थिति में हुआ था कि तेहरान विश्व विद्यालय के परिसर में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किये गये थे। इन प्रदर्शनों के बाद इमाम ख़ुमैनी ने जनता के नाम संदेश भेजकर एकजुट रहने तथा अत्याचारी सरकार के षडयंत्रों की ओर से सावधानी बरतने का आहवान किया था।

=====================

25 रबीउस्सानी सन 288 हिजरी क़मरी को विख्यात गणितज्ञ खगोल शास्त्री व चिकित्सक साबित बिन क़रेह साबी का निधन हुआ। वे सन 221 हिजरी क़मरी में मेसोपोटामिया के हरान नामक क्षेत्र में जन्में थे। चूंकि उनके कबीले के लोग यूनानी भाषा बोलते थे और इस क्षेत्र में सरयानी भाषा बोली जाती थी अत: उन्हें दोनों ही भाषाओं का पूर्ण: ज्ञान था। बाद में उन्होंने अरर्बी भाषा भी सीखी। उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्ति के लिए वे बग़दाद गये। वहॉ वे विख्यात गणितज्ञ मोहम्मद बिन मूसा के निरीक्षण में गणित खगोल शास्त्र आदि क्षेत्रों के ज्ञानी बन गये। उन्होंने गणित से संबंधित कई नये नियम भी बनाए। उन्होंने विख्यात खगोल शास्त्री बतलमयूस की आबज़रवेटरी की मरम्मत भी की। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान खगोल शास्त्र और गणित के क्षेत्र में पुस्तकें लिख और इन विषयों की दूसरी भाषाओं में लिखी गयी कई पुस्तकों का अरबी में अनुवाद किया। इनमें किताबुल मफ़रुज़ात आदि का नाम लिया जा सकता है।

=====================

25 रबीउस्सानी वर्ष 368 हिजरी क़मरी को आंदालुसियाई विद्वान, साहित्यकार, इतिहासकार एवं धर्मशास्त्री अबू उमर यूसुफ़ बिन अब्दुल्लाह का जो इब्ने अब्दुल अज़ीज़ के नाम से प्रसिद्ध थे वर्तमान स्पेन स्थित कोर्डोबा में जन्म हुआ. उन्होंने अपने पिता और तत्कालीन वरिष्ठ गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की. शिक्षा और शोधकार्यों में उन्होंने इतनी तेज़ी से प्रगति की कि थोड़े ही समय में आंदालुसिया के वरिष्ठ गुरुओं में गिने जाने लगे. जिस समय वे कोर्डोबा में जीवन व्यतीत कर रहे थे तो वहां सुरक्षा स्थिति अच्छी नहीं थी। इसी कारण इब्ने अब्दुल अज़ीज़, आंदालुसिया के एक दूसरे शिक्षा केंद्र दायना चले गए और वहां लेखन में व्यस्त हो गए। उनकी सबसे प्रसिद्ध किताब अल-इस्तियाब है कि जो पैग़म्बरे इस्लाम (स) के साथियों के बारे में है।