इराक़ इराक़ को ध्वस्त करने वाला अमरीका, पुनरनिर्माण में एक डालर भी ख़र्च नहीं करेगा : रिपोर्ट

इराक़ इराक़ को ध्वस्त करने वाला अमरीका, पुनरनिर्माण में एक डालर भी ख़र्च नहीं करेगा : रिपोर्ट

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कुवैत में सोमवार को इराक़ी अर्थ व्यवस्था और मूल ढांचे के पुनरनिर्माण के विषय पर दाता देशों का सम्मेलन हुआ और तीन साल तक दाइश के ख़िलाफ़ लड़ाई में देश को पहुंचने वाले लगभग 100 अरब डालर के नुक़सान पर चर्चा हुई।

इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी का कहना है कि दाइश के संकट से इराक़ को लगभग 100 अरब डालर का नुक़सान पहुंचा है।

चौंकाने वाली बात यह थी कि सम्मेलन में अमरीका ने जिसकी अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन कुवैत गए थे कहा कि वह इराक़ के पुनरनिर्माण में एक डालर भी ख़र्च नहीं करेगा। हालांकि इराक़ को ध्वस्त करने में अमरीका की बहुत बड़ी भूमिका रही है और उसने इस देश को तबाह करके रख दिया है। अमरीका ने प्रत्यक्ष रूप से भी और परोक्ष रूप से भी इराक़ को भारी नुक़सान पहुंचाया है। इराक़ को नुक़सान पहुंचाने की प्रक्रिया उस समय से शुरू हुई जब से अमरीका ने इस देश की नाकाबंदी कर दी और यह प्रक्रिया वर्ष 2003 में अपने चरम स्तर पर पहुंची जब अमरीका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इराक़ पर क़ब्ज़ा कर लिया। इस कार्यवाही में इराक़ के पुल, सड़कें, अस्पताल, स्टेशन, बिजलीघर, स्कूल सब कुछ ध्वस्त हो गया।

यहां तक कि दाइश का अस्तित्व भी अमरीकी नीतियों और कार्यवाहियों का नतीजा रहा।

हमें यह नहीं मालूम कि इराक़ की सरकार और वहां के प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी तथा अन्य अधिकारी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में जाकर अमरीका पर दबाव डालेंगे या नहीं।

इराक़ के अधिकतर शहरों को ध्वस्त करने में अमरीकी विमानों की प्रमुख भूमिका रही। विशेष रूप से दाइश के खिलाफ़ लड़ाई के दौरान मूसिल, रमादी, फ़ल्लूजा को अमरीकियों ने इराक़ पर अपने क़ब्ज़े के दौरान भी भारी नुक़सान पहुंचाया और दाइश के विरुद्ध युद्ध के दौरान भी इन शहरों को ध्वस्त कर दिया।

अब इराक़ के पुनरनिर्माण का समय आया है तो अमरीका के लिए ज़रूरी है कि वह अपनी ज़िम्मेदारी उठाए। इराक़ को हर्जाना अदा करे। अमरीकी नाकाबंदी की वजह से इराक़ के 10 लाख से अधिक नागरिक मारे गए जबकि वर्ष 2003 में इराक़ पर अमरीकी हमले में लाखों लोगों की जान गई।

अमरीका की इस बर्बरता और पाश्विकता पर जो इराक़ी राजनेता भी ख़मोश रहेगा वह वास्तव में इराक़ से विश्वासघात का दोषी माना जाएगा।

साभार रायुल यौम