ऐसी थी सुरैया और देवानन्द की प्रेम कहानी

ऐसी थी सुरैया और देवानन्द की प्रेम कहानी

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Izhar Sayyed Arif
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सुरैया और देवानन्द की प्रेम केमिस्ट्री सिर्फ ऑन स्क्रीन ही नहीं बल्कि ऑफ स्क्रीन भी, एक ऐसी प्रेमकहानी थी जो समाज की धर्मान्धता की भेंट चढ़ गयी वरना कट्टर हिंदुत्व के इतिहास में एक और लव – जिहाद शामिल हो जाता । बेटी के प्रेम की ज्वाला से माँ तो इस रिश्ते को सहमति दे चुकी थीं मगर ” नानी ” जिससे सुरैया बेहद डरती और इज़्ज़त भी करती थीं उन्हें देव फूटी आंख भी नहीं सुहाते थे । देव को दिल से न निकाल पाने के कारण वो आजीवन कुंवारी रही । उनकी सुंदरता का ये आ लम था के उनके घर के सामने एक व्यक्ति दिन-रात वही बैठा सुरैया के घर को निहारता रहता था और उनकी एक झलक पाते ही बेताबी से उठकर खड़ा हो जाता ।

माँ तो पहले ही चल बसी थीं लेकिन नानी लम्बे आरसे तक उनके साथ रही । जब नानी की मृत्यु हुई तो संवेदना प्रकट करने वालों में देव साहब भी थे जिन्होंने बाद में उनसे कहा ” सुरैया अब नानी तो रही नहीं , चलो अब हम और तुम शादी कर लेते है ” मगर सुरैया ने मुस्कराकर बात को टाल दिया ।
रेहान फज़ल ( संवाददाता बीबीसी ) ने उनकी प्रेम केमिस्ट्री को यूँ प्रस्तुत किया है :

” देवानंद की सुरैया से पहली मुलाकात फ़िल्म ‘विद्या’ के सेट पर हुई थी.

देवानंद ने अपना परिचय देते हुए कहा था, ”सब लोग मुझे देव कहते हैं. आप मुझे किस नाम से पुकारना पसंद करेंगी?”

सुरैया ने हँसते हुए जवाब दिया था – ”देव.”

इसके बाद उन्होंने सुरैया की आँखों में देखते हुए अपनी चार्मिंग मुस्कान बिखेरी थी.

सुरैया ने सवाल किया था, ”आप देख क्या रहे हैं ?”

”आप के अंदर कुछ.’ देव ने जवाब दिया था.

सुरैया की जिज्ञासा बढ़ निकली थी, ”मेरे अंदर क्या ?”

”यह मैं आपको बाद में बताउँगा.”, देवानंद ने दिया था दबाव.
इस बीच, निर्देशक ने कहा था,”सुरैया जी शॉट रेडी है. आपको गाते हुए देवानंद की कमर में अपनी बाहें डालनी हैं और उनके बालों में उँगलियाँ फेरनी हैं.”

देव ने सुरैया से कहा था, ”उँगलियाँ फेरते हुए मेरे बाल मत बिगाड़िएगा.”

”हाँ मुझे पता है. मैं आपकी ज़ुल्फ़ों को बिल्कुल नहीं छेड़ूँगी. ” सुरैया ने कहा.

देवानंद अपनी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ़ में लिखते हैं,”गाना चला, कैमरा रोल हुआ. सुरैया ने मुझको पीछे से आलिंगन में लिया. मैंने उनकी साँसों की गर्माहट महसूस की. मैंने उनके हाथों का चुंबन लेकर छोड़ दिया और फिर उनकी तरफ़ एक फ़्लाइंग किस उछाला.”

सुरैया ने उनके हाथ के पीछे का हिस्सा चूम कर उसका जवाब दिया. निर्देशक ने चिल्ला कर कहा, ”ग्रेट शॉट”.

वहाँ पर मौजूद फ़ोटोग्राफ़र चिल्लाए, ”एक बार फिर उन्हें चूमिए.” ।
देवानंद ने सुरैया से पूछा. उन्होंने मुँह हिलाया. इस बार देवानंद ने उन्हें गालों पर चूमा. फ़ोटोग्राफ़र पागल हो गए. जब सुरैया को एकांत मिला जो उन्होंने कहा, ”तो आप कुछ कह रहे थे…. मेरे बारे में !”

देवानंद ने फ़्लर्ट किया, ”मैं आपके भाव नहीं बढ़ाना चाहता.”

”लेकिन मैं अपने भाव बढ़ाना चाह रही हूँ.” सुरैया को इस छेड़छाड़ में मज़ा आने लगा था.

”अगर मैं आपको बताऊँ कि मैं आपके बारे में क्या सोच रहा था तो क्या आप उस पर यकीन करेंगी ?”

सुरैया ने कहा, ”बिल्कुल.”

”आपकी आँखें एक रानी के चेहरे पर चमकते हुए हीरे की तरह हैं. लेकिन….”…. ”लेकिन क्या ?”सुरैया ने ज़ोर दिया.

देवानंद ने कहा, ”आपकी नाक सुंदर तो है लेकिन थोड़ी लंबी है.”।।

देवानंद ने सुरैया से पूछा. उन्होंने मुँह हिलाया. इस बार देवानंद ने उन्हें गालों पर चूमा. फ़ोटोग्राफ़र पागल हो गए. जब सुरैया को एकांत मिला जो उन्होंने कहा, ”तो आप कुछ कह रहे थे…. मेरे बारे में !”

देवानंद ने फ़्लर्ट किया, ”मैं आपके भाव नहीं बढ़ाना चाहता.”

”लेकिन मैं अपने भाव बढ़ाना चाह रही हूँ.” सुरैया को इस छेड़छाड़ में मज़ा आने लगा था.

”अगर मैं आपको बताऊँ कि मैं आपके बारे में क्या सोच रहा था तो क्या आप उस पर यकीन करेंगी ?”

सुरैया ने कहा, ”बिल्कुल.”

”आपकी आँखें एक रानी के चेहरे पर चमकते हुए हीरे की तरह हैं. लेकिन….”…. ”लेकिन क्या ?”सुरैया ने ज़ोर दिया.

देवानंद ने कहा, ”आपकी नाक सुंदर तो है लेकिन थोड़ी लंबी है.”।।
लेकिन ये प्रेम कहानी एक अजीबो-गरीब ढंग से शुरू हुई ।फिल्म ” विद्या ” के सेट पर सुरैया ने महसूस किया के एक नौजवान उन्हें अजीब नज़रों से घूरे जा रहा था ।उन्होंने निर्देशक गिरीश त्रिवेदी से कहा कि इस युवक को फ़ौरन सेट से बाहर निकालिये । त्रिवेदी ने उस युवक को बुलाया और सुरैया से कहा,‘यह हैं इस फिल्म और आपके नए हीरो देव आनंद।’ सुरैया ने कहा, ‘ठीक है… आज तो इनका काम है नहीं। इसलिए आप इन्हें सेट से बाहर निकालिए।’ देव ने मुस्कराते हुए कहा,‘अभी से मोहतरमा का यह हाल है, तो आगे क्या होगा।’ देव के यह कहते ही सुरैया मुस्करा दीं। यह दोनों की पहली मुलाकात थी।
उनका पूरा नाम था सुरैया जमाल शेख़, हिन्दी फ़िल्मों की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायिका थीं। 40वें और 50वें दशक में इन्होंने हिन्दी सिनेमा में अपना योगदान दिया। अदाओं में नज़ाकत, गायकी में नफ़ासत की मलिका सुरैया ने अपने हुस्न और हुनर से हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक नई इबारत लिखी ।
मिर्ज़ा ग़ालिब, अनमोल घड़ी , जीत, विद्या , सनम आदि फ़िल्में उनके कॅरिअर में उनकी मील का पत्थर मानी जाती है और, तू मेरा चाँद मैं तेरी चांदनी , ओ दूर जाने वाले , सोचा था क्या क्या हो गया , पास रहे या दूर रहे नज़ारोंमे समाये रहते है आदि उनके प्रसिद्ध गीत है ।
उनका देहांत 31 जनवरी 2004 में हुआ ।।