डॉक्टर ज़ाकिर नाईक के व्याख्यान भगवा आतंकवाद से मुक्ति दिला सकते हैं।

डॉक्टर ज़ाकिर नाईक के व्याख्यान भगवा आतंकवाद से मुक्ति दिला सकते हैं।

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परवेज़ ख़ान
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भारत में जिस तरह हिन्दुत्ववादियों ने धर्म का सहारा लेकर आतंकवादियों का संगठन खड़ा किया हुआ है उसने न केवल देश में हिन्दू मुस्लिम भाईचारे को तोड़ा है बल्कि मानवता को कलंकित करने वाले कार्यों से हिन्दू समाज को भी शर्मिन्दा किया है। ऐसा केवल इसलिये सम्भव हुआ है क्योंकि इनके द्वारा जितने भी आतंकवादी काम अंजाम दिये गए हैं उनमें धर्म का सहारा लिया गया है।

इसके सबूत में अनेक उदाहरण दिये जा सकते हैं जैसे-

देश में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करने की बात कह कर हिन्दू समाज द्वारा किसी भी प्रकार के विरोध के द्वार बन्द कर दिये गए क्योंकि इसको धार्मिक कार्य के रूप में पेश किया जाता है।

हालांकि मुसलमान भी चाहते हैं कि इस्लामी शासन व्यवस्था क़ायम हो लेकिन यह किसी नशेड़ी की कल्पना पर आधारित न होकर पहले से मौजूद मुकम्मल इस्लामी संविधान के अनुसार चाहते हैं जिसमें बिना किसी भेदभाव के इंसाफ़ और ग़ैर मुस्लिमों के अधिकारों और संस्कृति की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है जो पूरी तरह से मानवतावादी है जबकि उपरोक्त हिन्दुत्ववादी हिन्दू राष्ट्र की जो झलक पेश कर रहे हैं वह मुस्लिम मुक्त भारत बनाने की है। बेशर्मी की हद तो यह है कि देश के इतिहास को बदल कर मुसलमानों के लगभग आठ सौ साल के शानदार शासन काल की निशानियों तक को मिटाने की जुस्तजू में लगे हुए हैं जबकि प्राचीन काल के हिन्दू धर्मस्थलों का न केवल वजूद क़ायम रहना बल्कि मस्जिदों के साथ नए मन्दिरों के लिए भूमि की उपलब्धता और उनके रखरखाव हेतु काफ़ी तादाद में अचल सम्पत्ति भी वक़्फ़ करना उस काल के शासकों की निष्पक्षता की झलक पेश करने के लिए काफ़ी है।

इसी तरह मस्जिद गिराने जैसी शैतानी वारदात को धार्मिक कार्य के रूप में पेश करना हिन्दू समाज को धोखा देना है। गाय को माता कह कर अपनी जन्म देने वाली माँ का अपमान करके पता नहीं किस तरह इसको धर्म से जोड़ा जाता है जबकि इसी देश के कई प्रदेशों का हिन्दू समाज गौमांस बड़े चाव से खाता है।
इस प्रकार वास्तविकता यह है कि इन सब बातों के ज़रीये मुसलमानों को प्रताड़ित करके और उनको आतंकित करके धर्म के नाम पर अतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है जिसको भगवा अतंकवाद के रूप में पूरी दुनिया देख रही है। इस भगवा अतंक्वाद जिस तेज़ी से फैल रहा है उसके नतीजे में देश की अखण्डता ख़तरे में पड़ रही है। ऐसे हालात में इस भगवा अतंकवाद पर अंकुश लगाना ज़रूरी हो गया है।

यह भगवा अतंक्वाद चूँकि धर्म के नाम पर फैलाया जा रहा है इसलिये इसको रोकने का केवल एक ही उपाय है और वह यह है कि धर्म की ग़लत व्याख़्या को रोका जाए और सही तरीक़े से धर्म को समझा जाए। डॉक्टर ज़ाकिर नाईक ने जिस तरह हिन्दू धर्म को अपने व्याख्यानों में समझाया है और विभिन्न धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन करने की आम लोगों को प्रेरणा दी है उसको देखते हुए केवल इन व्याख्यानों को जन जन तक पहुंचाने का कार्य यदि सरकारी और ग़ैर सरकारी तौर पर कर दिया जाए तो आम लोग हिन्दू धर्म की सही व्याख्या को समझेंगे और इस तरह वह यह भी जान लेंगे कि भगवा आतंकी जिस धर्म की दुहाई देकर आतंकवाद फैला रहे हैं उस तरह की तो धर्म शिक्षा ही नहीं देता है। इस प्रकार हक़ीक़त को समझ लेने के बाद भगवा अतंकवाद का स्वतः ही खत्म हो जाएगा।

Parvez Ahmad