दिल्ली : माहौल बिगाड़ने की कोशिश, गायों को ज़हर खिलाते हुए चरमपंथी दीपक रंगे हाथ पकड़ा गया!

दिल्ली : माहौल बिगाड़ने की कोशिश, गायों को ज़हर खिलाते हुए चरमपंथी दीपक रंगे हाथ पकड़ा गया!

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जैसे जैसे 2019 के लोकसभा चुनावों की तरफ देश बढ़ रहा है, साम्प्रदायिक माहौल दिन पर दिन बिगड़ने की कोशिशें भगवा मानसिकता के लोगों की तरफ से तेज़ हो गयी हैं, केंद्र की मौजूदा सरकार अपने हर वादे में नाकाम साबित हुई है, ऐसे में बीजेपी को अगले चुनावों के लिए विकास की बात छोड़ कर अन्य मुद्दों का सहारा चाहिए, कासगंज का दंगा हो या उसके बाद निकाली गयीं उत्तर प्रदेश के कई शहरों में तिरंगा यात्राऐं, यह सब सोची समझी नीति का हिस्सा हैं, इन के ज़रिये जगह जगह हिंसा फैला कर लोगों को असल मुद्दों पर नहीं आने देने की कवायद हो रही है|

उत्तर प्रदेश के कासगंज में साम्प्रदायिक हिंसा में अभी दूध का दूध पानी का पानी हुआ भी नहीं है, दिल्ली में गायों को ज़हर खिलाकर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की घटना सामने आई है।

दिल्ली के तीमारपुर इलाक़े में दीपक नामक एक चरमपंथी हिंदू युवक को लोगों ने गायों को ज़हर खिलाते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।

लोगों ने दीपक को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। दीपक ने पुलिस के सामने पहले भी गायों को ज़हर खिलाकर मारने की बात स्वीकार की है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

आश्चर्य की बात यह है कि इस कांड में दीपक अकेला नहीं है, बल्कि उसके गैंग में 3 लोग और शामिल हैं।

देश में अब आम लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि वह कौन सी शक्तियां हैं, जो देश में साम्प्रदायिक हिंसा को हवा देकर अपने हित साधना चाहती हैं?

इस शंका को उस वक़्त और बल मिलता है, जब कासगंज में तिरंगा यात्रा के नाम पर भगवा झंडे लहराए गए और ख़ून ख़राबा किया गया।

कासगंज में मरने वाले युवक चंदन गुप्ता की मौत को लेकर भी एक बड़ा रहस्योद्घाटन हुआ है। समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल वर्मा ने कहा है कि कासगंज में जिस हिंदू लड़के की मौत हुई है, वह किसी मुसलमान की गोली से नहीं बल्कि उसे उसके साथी हिंदुओं ने ही मारा है।

संसद भवन में मीडिया से बात करते हुए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा, कासगंज में पुलिस वाले भगवा चरमपंथियों के साथ मिलकर मुसलमानों की संपत्तियों को नष्ट कर रहे हैं और उनके घरों और दुकानों में आग लगा रहे हैं, और सब तमाशा देख रहे हैं।

राम गोपान ने कहा कि हिंसा के जो वीडियो सामने आए हैं, उनसे पूरी बात स्पष्ट हो चुकी है कि किसने गोली चलाई और और कौन हत्यारा है।

इसके अलावा, सहारनपुर में डिप्टी डायरेक्टर सांख्यिकी के पद पर तैनात रश्मि वरुण ने फ़ेसबुक पोस्ट में कासगंज हिंसा की तुलना सहारनपुर के मामले से की है।

उन्होंने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है, ‘तो ये थी कासगंज की तिरंगा रैली। यह कोई नई बात नहीं है। अंबेडकर जयंती पर सहारनपुर के सड़क दूधली में भी ऐसी ही रैली निकाली गई थी। उसमें से अंबेडकर गायब थे या कहिए कि भगवा रंग में विलीन हो गए थे। कासगंज में भी यही सब हुआ। तिरंगा रैली में तिरंगा ग़ायब था और भगवा शीर्ष पर था, जो लड़का मारा गया, उसे किसी दूसरे, तीसरे समुदाय ने नहीं मारा, बल्कि उसे तिंरगे की आड़ लेकर भगवा चरमपंथियों ने ख़ुद मारा है।

इससे पहले बरेली डीएम राघवेंद्र ने भी कासगंज हिंसा पर अपने फ़ेसबुक पोस्ट में इसी तरह की शंका जताई थी।

राघवेंद्र ने लिखा था कि “अजब रिवाज बन गया है। मुस्लिम मोहल्लों में ज़बरदस्ती जुलूस ले जाओ और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ। क्यों भाई वे पाकिस्तानी हैं क्या? यही यहां बरेली के खैलम में हुआ था। फिर पथराव हुआ, मुकदमे लिखे गए।”