प्रेम दिवस पर विशेष : बीजेपी के दिग्गज नेता शाहनवाज़ हुसैन और रेनू की प्रेम कहानी

प्रेम दिवस पर विशेष : बीजेपी के दिग्गज नेता शाहनवाज़ हुसैन और रेनू की प्रेम कहानी

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कहते हैं इश्क़ और मुश्क़ छिपाये नहीं छिपते, मुहब्बत ऐसी धड़कन है जो समझायी नहीं जाती, इश्क़ का जलवा इश्क़ ही जाने, मगर ये इश्क़ का दरिया आज के समय में डूब के जाना भी कुछ कट्टरपंथी लोगों की वजह से मुश्किल हो गया है, जिधर देखो उधर मुहब्बत के दुश्मन हाथों में तलवार, होंठों पर ज़हरीले बोल, आँखों में अंगारे लिए खड़े रहते हैं, यह बाज़ारू गुंडे मुहब्बत पर पहरा लगाना चाहते हैं, इन मवालियों की वजह से मुहब्बत करने वाले दिल तड़प तड़प कर रह जाते हैं, सरकारों ने भी मुहब्बत के दुश्मनों को खुली छूट दे रखी है, सभय्ता, संस्कृति की दुहाई देने वाले गलियों के उचक्के 14 फरवरी के दिन कुछ ज़ियादा ही सक्रिय हो जाते हैं, 14 फरवरी का दिन ‘प्रेमियों’ माना जाता है, इस दिन दो प्यार करने वाले अपने प्यार इज़हार करते हैं, फूल देते हैं, गले मिलते हैं, और हंसी ख़ुशी जिंदिगी जीने के खाब सजाते हैं,,,,

पेश है मुहब्बत के दुश्मनों के लिए दो दिलों की क़ामयाब दास्ताँ
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भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता शाहनवाज हुसैन ने दिल्ली की एक हिंदू लड़की से प्रेम विवाह किया है। लेकिन इसके लिए उन्हें नौ सालों तक पापड़ बेलने पड़े थे। साल 1986 में शाहनवाज ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान डीटीसी की बसों से सफर किया करते थे।

इसी बीच बस उन्हें एक लड़की दिखी। शाहनवाज, लड़की को देखते ही उसकी ओर आकर्षित हो गए। पहली ही नजर में उन्हें वो जंच गई। अगर कहें कि उन्हें देखते ही शाहनवाज उन पर फिदा हो गए तो कुछ गलत न होगा, लेकिन जिस पर वो फिदा हुए वो अचानक कहीं खो गई। कुछ दिनों बाद फिर शाहनावज को वह लड़की दिल्ली की बस में ही मिल गई।

इसके बाद शाहनवाज ने लड़की को फॉलो करना शुरू किया। कई बार बस में हुई मुलाकात के बाद एक दिन ऐसा मौका आया जब बस में शाहनवाज को तो सीट मिल गई, लेकिन उस लड़की को नहीं मिली, तो उन्होंने उसे अपनी सीट ऑफर कर दी।

लड़की ने तो इसे शिष्टचार के तौर पर लिया और सीट पर बैठ गई, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि उनके मन कुछ और ही चल रहा है।
प्रेम प्रस्ताव पर गुस्सा हो गई थीं रेनू

इसी आपाधपी में शाहनवाज एक दिन उस लड़की के घर पहुंच गए। इधर-उधर की बातों से लड़की के घर वालों से अच्छा रिश्ता बना लिया। इसके बाद वह लड़की घर आने-जाने लगे। बातचीत में शाहनवाज पहले से माहिर थे, इसलिए लड़की के घरवालों से अच्छी जान-पहचान हो गई।

लेकिन असल बात बनते नहीं दिख रही थी, तो अंत में शाहनवाज ने ठान लिया कि अब वह लड़की को अपने दिल की बात बता कर रहेंगे। तभी किसी रिश्तेदार के यहां कोई पार्टी हुई।

उसमें शाहनवाज हुसैन और वह लड़की दोनों पहुंचे। वहीं पर बातों ही बातों शाहनवाज ने अपने दिल की बात लड़की बताई। लेकिन उनकी बातें सुनकर लड़की गुस्सा हो गई।

दरअसल, उस जमाने में दूसरे धर्म में शादी करना टेढ़ी खीर थी। ऊपर से लड़की ने भी शाहनवाज को मना कर दिया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और एक दिन लड़की ने भी हां कर दी। वह लड़की थीं रेनू, जो आज शाहनवाज हुसैन की पत्नी हैं। हालांकि इस लव स्टोरी के हिट होते-होते नौ साल लग गई।

यह है शाहनवाज़ हुसैन और रेनू की लव स्टोरी की पूरी कहानी
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बीजेपी लीडर शाहनवाज हुसैन की लव स्टोरी की शुरुआत दिल्ली में तब हुई थी जब वो बस से कॉलेज जाया करते थे ।1986 में जब शाहनवाज हुसैन अपनी ग्रैजुएशन की पढ़ाई कर रहे थे, वे जिस बस से कॉलेज जाते थे,

उसी बस में रेनू भी जाया करती थीं। वह हायर सेकेंडरी की पढ़ाई कर रही थीं। एक ही बस में जाने के कारण दोनों की मुलाकात तो होती थी, लेकिन बातचीत नहीं। शाहनवाज हुसैन धीरे-धीरे रेनू की ओर अट्रैक्ट होने लगे और जल्द ही यह प्यार में बदल गया।

सीट ऑफर करने से शुरू हुआ बातों का सिलसिला
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शाहनवाज का अट्रैक्शन प्यार में बदल चुका था। कॉलेज जाते समय दोनों की बस में मुलाकात हो जाती थी, लेकिन अब तक कोई भी बात नहीं बनी थी। एक दिन ऐसा मौका आया जब बस में शाहनवाज को तो सीट मिल गई, लेकिन रेनू को नहीं, तो उन्होंने अपनी सीट उन्हें ऑफर कर दी। उसके बाद दोनों की जान-पहचान हुई और धीरे-धीरे दोनों की बात होने लगी।

रेनू की फैमिली के बहुत क्लोज हो गए थे शाहनवाज
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बस में मिलने के बाद कुछ दिनों तक दोनों में ऐसे ही बात होती रही। एक दिन शाहनवाज अचानक ही रेनू के घर पहुंच गए और उनके घर वालों से मिले। उसके बाद वो अक्सर रेनू के घर जाने लगे और उनकी फैमिली के क्लोज हो गए, लेकिन अभी भी वो रेनू को अपने दिल की बात नहीं बता पाए थे।

बर्थडे पर कार्ड में लिख कर दिया – ‘Will U be My Life Partner’
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शाहनवाज ने कई बार अपने दिल की बात बताने की कोशिश की, लेकिन वो कह नहीं पाए। एक दिन रेनू के बर्थडे पर उन्होंने एक ग्रीटिंग कार्ड गिफ्ट किया, उसमें लिखा था ‘Will U be My Life Partner’। हालांकि उन्होंने शहनावाज के प्रपोजल को तो एक्सेप्ट नहीं किया, लेकिन उनसे फ्रेंडशिप कर ली।

लव स्टोरी को शादी तक पहुंचने में लगे नौ साल
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शाहनवाज हुसैन ने हार नहीं मानी और अपनी कोशिश जारी रखी। धीरे-धीरे रेनू भी शाहनवाज की ओर अट्रैक्ट होने लगीं और दोनों एक-दूसरे को प्यार करने लगे। हालांकि रेनू एक हिंदू परिवार से थीं और शाहनवाज एक मुस्लिम परिवार से। इस बात की टेंशन हमेशा दोनों को रहती थी, लेकिन इन्होंने अपने रिलेशन को पूरा टाइम दिया। रेरू की फैमिली तो पहले नहीं मान रही थी, लेकिन बाद में उन्होंने इस रिलेशन को स्वीकार कर लिया। शाहनवाज की फैमिली ने उनकी पसंद पर भरोसा किया और पूरी तरह उन्हें सर्पोट किया। इसके बाद दोनों ने 1994 में शादी की।

आज भी आती है पानी पूरी की याद
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शादी के बाद रेनू की एक गर्वनमेंट स्कूल में जॉब लग गई, तो वहीं शाहनवाज अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत कर रहे थे। एक इंटरव्यू में रेनू ने बताया था कि शाहनवाज रोज उनका हाथ थामकर उन्हें स्कूल तक छोड़ने जाते थे। उन्होंने बताया था कि उस समय वॉक करते हुए इतना अच्छा लगता था कि हमें कभी गाड़ी की जरूरत नहीं लगी।

याद आती है उस समय की पानी पूरी
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रेणु ने बताया था कि आज भी उस स्कूल जाने के दौरान कभी ना खत्म होने वाली हम दोनों की बातें और चटपटा करती वो पानी पूरी (गोल गप्पे) आज भी याद आती है। अब रास्ते में खड़े होकर दोनों ही पानी पूरी नहीं खा सकते। वो अब अपने करियर में बिजी हैं और मैं अपनी जॉब में। तो क्या हुआ अब दोनों एक-दूसरे को बहुत वक्त नहीं दे पाते। लेकिन आज भी एक-दूसरे को स्पेस देते हैं।

घर में फॉलो करते है दोनों कल्चर
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कविता लिखने की शौकीन रेनू ने इंटरव्यू में बताया था कि हमारे घर में हिंदू और मुस्लिम दोनों कल्चर फॉलो होते हैं। ये एक इत्तफाक ही है कि मेरे मोबाइल नंबर और लैंडलाइन दोनों में ही लास्ट में 786 आता है। मैंने अपनी कविता शाहनवाज की मां पर लिखी है। उन्हें मैं भी अम्मीजान कहती थी