भाजपा नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी और सीमा के ‘लव जेहाद’ का क़िस्सा!

भाजपा नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी और सीमा के ‘लव जेहाद’ का क़िस्सा!

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मुहब्बत ने होती तो कुछ भी न होता, न लंका होती न रावण होता, न राम होते न राम राज होता, मुहब्बत ही तो थी कि समंदर पर बाँध बना, मुहब्बत के ही तीरों ने लंकापति रावण का अंत किया था, मुहब्बत की ख़ातिर तो ये दुनियां क़ायम की गयी, इश्क़ का रुतबा इश्क़ ही जाने,,,इस दुनियां का खेल रचाया इश्क़ की खा तिर आप खुदा ने,,,,याद रखो, तुम्हारे खुदा को मुहब्बत पसंद है, नफरत करना तो शैतानों का काम है,,,समाज में शैतानों की नहीं मुहब्बत करने वालों की इज़्ज़त होती है
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जहां ‘लव’ होता है वहां ‘जेहाद’ नहीं हो सकता और जहां ‘जेहाद’ है वहां ‘लव’ का होना नामुमकिन है। मगर भारतीय जनता पार्टी ने इन दो अलग-अलग शब्‍दों को मिलाकर एक ऐसा दर्दनाक मुद्दा सामने ला दिया है जिससे देश जल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने जिस लव जिहाद का युद्ध छेड़ा है उसका असल मतलब है गलत नीयत से मुस्लिम लड़के का हिन्दू लड़की को मोहब्‍बत में फंसाकर निकाह करना।

भाजपा में ही लव जेहादियों की लंबी कतार है। तो देखते हैं भाजपा नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी का ‘लव जेहाद’:

मुख्तार अब्बास नकवी भाजपा सांसद मुख्तार अब्बास नकवी की शादी जून 1983 में हुई थी। उन्‍होंने लव मैरिज की है। उनकी पत्नी सीमा एक हिंदू परिवार से ताल्लुक रखती हैं। सीमा की मां शादी को लेकर खिलाफ थीं, लेकिन बाद में मुख्तार और सीमा की प्रेम कहानी सफल हो गई।

साल 1975 में लगे आपातकाल ने देश को कई कद्दावर नेता दिये. आपातकाल के दौरान आंदोलन का हिस्सा रह चुके कई नेता पक्ष- विपक्ष के खेमे में हैं. इसी कतार में एक नाम मुख्तार अब्बास नकवी का आता है. नकवी को अब कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है. एक राजनीतिक के अलावा उनकी शख्सीयत के कई दूसरे आयाम भी हैं. उन्होंने हिंदुओं की पार्टी कही जाने वाली भारतीय जनता पार्टी के साथ सफर की शुरुआत की और इस पार्टी के अहम नेता की हैसियत हासिल की, जो पार्टी के रणनीतिक मामलों के साथ संसद में सरकार के लिए मजबूती से मोर्चा संभालता है.

विनम्र और मिलनसार स्वभाव के नकवी ने आज पार्टी के साथ-साथ पूरे देश में वह एक बड़े मुस्लिम नेता के रूप में अपनी पहचान कायम की है. छात्र जीवन से ही राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले नकवी भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष रहे हैं. एक-एक कदम आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपनी पहचान स्थापित की.

छात्र जीवन में राजनीति

15 अक्टूबर 1957 को इलाहाबाद में मुख्तार अब्बास नकवी का जन्म हुआ. हंडिया तहसील के प्रतापपुर ब्लॉक में एक छोटा-सा गांव है भदारी इसी गांव से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद नकवी ने जब कॉलेज का रुख किया तो राजनीति ने उन्हें आकर्षित करना शुरू कर दिया. गांव से हर दिन आना जाना जब कठिन होने लगा तो उन्होंने इलाहाबाद में ही रहकर पढ़ने का मन बनाया इसी दौरान उनकी मुलाकात समाजवादी नेता राजनारायण से हुई.

इस मुलाकात ने नकवी को राजनीति में आगे आने के लिए और प्रभावित किया. नकवी को उनका साथ भाने लगा और वह कई आंदोलन का हिस्सा रहे. आपातकाल के दौरान नकवी आंदोलन का हिस्सा रहे और जेल भी गये. जनता पार्टी की तरफ से राजनारायण ने जब इंदिरा गांधी को हराया तो नकवी समेत कई लोगों में उत्साह भर गया.

नकवी राजनीति में अब अपनी पहचान बनाने लगे थे. जन संचार में स्‍नातकोत्‍तर की डिग्री उन्हें राजनीति में काम आ रही थी. साल 1978-79 तक युवा जनता के उपाध्यक्ष बने. इसके इतर सीमा के साथ उनका प्रेम चर्चा में था. इसे लेकर जमकर बवाल कटा. कारण था सीमा का हिंदू और मुख्तार का मुस्लिम होना. सीमा और नकवी दोनों के घर में इस रिश्ते को लेकर ऐतराज था. सीमा एक्सट्रा क्लास के बहाने मुख्तार अब्बास नकवी से मिलती थीं. इन सब के बावजूद भी नकवी ने हार नहीं मानी और सारे विरोध को दरकिनार करते हुए सीमा से निकाह और शादी कर ली. उन्होंने कोर्ट मैरिज भी किया. यानी एक जोड़े ने तीन तरीके से शादी की. नकवी के घर में इस्लामिक और हिंदू दोनों त्योहार एक समान तरीके से मनाया जाता है.

नकवी ने पहला चुनाव इलाहाबाद पश्चिम से लड़ा लेकिन हार गये. अयोध्या से निर्दलीय चुनाव लड़ा हार गये. यूपी के मऊ से लड़े हार गये. नकवी की किस्मत खुली जब जनता पार्टी टूट गयी. साल 1992- 97 तक उन्हें युवा मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया. 1998 में उन्हें लोकसभा का टिकट मिला और रामपुर से चुनकर वह सीधे लोकसभा पहुंचे. नकवी की इस जीत ने कई रिकार्ड तोड़े यह पहली बार था भारतीय जनता पार्टी से कोई मुस्लिम चेहरा जीतकर लोकसभा पहुंचा था. अटल सरकार में नकवी को सूचना प्रसारण मंत्रालय दिया गया. इसके बाद नकवी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा उन्होंने पार्टी और सरकार में दोनों ही जगह कई महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. अब उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है जो उनके और बड़े होते कद का परिचय देता है.
विवाद और राजनीति

मुख्ताब अब्बास नकवी कई बार बयानों को लेकर विवाद में रहे हैं. बीफ को लेकर नकवी के बोल भी खूब चर्चा में रहे. सबसे ज्यादा विवाद साबिर अली के भाजपा में शामिल होने को लेकर हुआ था. जनता दल यूनाईडेट से भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाले साबिर अली पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कड़ा प्रहार किया था.

साबिर के भाजपा में शामिल होने के बाद ट्वीट करते हुए लिखा था, दाऊद भी जल्द ही बीजेपी ज्वाइन कर सकता है. नकवी ने ट्वीट करके साबिर अली पर आतंकियों का दोस्त होने का आरोप लगाया था. इस ट्वीट के बाद खूब हंगामा हुआ. साबिर अली की पत्नी नकवी के आवास के बाहर धरने पर बैठीं. नकवी पर आरोप लगा कि वह नहीं चाहते कि पार्टी में उनका अलावा कोई मुस्लिम चेहरा हो जो उनके महत्व को कम कर दे. हंगामे और विवाद के बाद साबिर को पार्टी से निकाल दिया गया था लेकिन बाद मे उन्हें फिर पार्टी में शामिल कर लिया गया.

 

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Exactly 30 years back in 1983, the month of June saw the whole of India erupt in joy to witness the legendary victory of its team in World Cup cricket. But the universe was parallely planning to make an eternal love story come true.

Everything happens for a reason and in this story, let the reason be love. Love was what made two people hailing from two entirely different religions fall in love with each other.

Their togetherness is ceaseless and their love is immortal but witnessing such an immense intensity there are multiple questions which arise in one’s mind.

The walls of Allahabad University were mute witnesses when the classic love tale of Mukhtar Abbas and Seema was in its initial phase.

“Chalte chalte yuhin koi mil gaya tha, sare rah chalte chalte” is how Mukhtar Abbas Naqvi describes his love fable from the film Paakeeza, and as he says , words are not enough to explain how the couple felt when they saw each other for the first time.

On one side Naqvi had marvelous leadership qualities, and on the other side, Seema was a complete introvert and did not prefer entering into conversations with boys. Two complete opposites yet their love found a way.

It was the year 1982 which saw these two completely different people getting closer and becoming inseparable.

Naqvi was a straightforward person. His thoughts knew no limitations of words and his forthright attitude was what made Seema fall in love with him.

Both developed a fondness for each other and soon they had their futures planned together.

But no love story is complete without few hitches and glitches. And in this fable, the interruptions were some serious ones.

Seema hailed from a Hindu family and Naqvi was a Muslim. Also, at that time Naqvi was still studying and did not have a sound financial backing on which Seema’s family could rely enough

On learning about Seema and Naqvi’s relationship, Seema’s mother was in a complete denial mode. Restrictions were imposed on Seema and her meetings with Naqvi were asked to be curtailed.

But as they say “lovers are liars”. Seema started making excuses to go out and meet Naqvi frequently. She went to meet him in the name of attending her extra classes

Adamant overt their decision, Naqvi and Seema sought ways to convince their families but did not achieve any fruitful results for long. Finally, after a prolonged wait, Seema’s mother gave them a ray of hope. On realizing her daughter’s immense love for Naqvi, she gave a nod to the relationship.

On June 3, 1983, Mukhtar and Seema got married in three different ways. First, the court marriage took place and then Nikaah and Hindu rituals followed.

Seema’s fears of getting introduced into an entirely new culture and religion completely vanished when a tremendous amount of comfort level was showered on her by her new family.

Within no time not only was she able to gel with her new world but also she received a lot of care and affection from her in-laws.

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Mukhar Abbas Naqvi and Ashok Singhal Relationship
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Mukhtar Abbas Naqvi is Minister of State for Minority Affairs to the Government of India. He is a prominent BJP politician and widely regarded as the Muslim face of the party. However, the dirty IT departments of Congress and AAP are sharing news over the social media about relationship between Naqvi and late Ashok Singhal. They are saying that Naqvi is the Son-in-Law of Ashok Singhal.

That being the Son-in-Law of a powerful VHP leader may not be a problem. But, through this fact they want to say that Naqvi is associated with the BJP because of his marital relationship, not because of his ideology of nationalism and belief in the Idea of India.

As a matter of fact, Ashok Singhal remained unmarried till his last breath. While pursuing Engineering from the prestigious BHU, he came in contact with the RSS. He became a pracharak and took vow to remain unmarried which he followed throughout.

Ashok Singhal was basically from Allahabad. His father was a famous businessman and had built a palatial house in this city. That house is currently used for the purpose of social work. Ashok Singhal never asked for his share of property from his extended family. His brother B. P. Singhal was the Inspector General of UP who was later sent to Rajya Sabha on a BJP ticket.

It should be noted here that Ashok Singhal had shared a very close ideological relationship with Mukhtar Abbas Naqvi.

In fact, Ashok Singhal used to visit the home of Naqvi in Delhi. That might have given these dirty minded people to make a story around these nice men.

Both Naqvi and. Seema had studied from Allahabad University. The love story started from their college days which culminated to the marriage