या अल्लाह ! इन सबको जन्नत में मेरा रफ़ीक़ बना दे

या अल्लाह ! इन सबको जन्नत में मेरा रफ़ीक़ बना दे

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हजरते बीबी उम्मे उम्मारा रजियल्लाहु अन्हा के फरजन्द हजरते अब्दुल्लाह रजियल्लाहु अन्हु कहते है कि जंगे उ-हद में मुझे काफिर ने ज़ख्मी कर दिया और मेरे जख़्म से खून बन्द नही हो रहा था | मेरी वालिदा हजरते उम्मे उम्मारा ने फौरन अपना कपडा फाडकर जख़्म पर बाँध दिया और कहा कि :-

“बेटा उठो, ! खडे हो जाओ” और फिर से जिहाद में मशगूल हो जाओ |

इत्तिफाक से वही काफिर हुजूर ﷺ के सामने आया तो आपने फरमाया कि ए उम्मे उम्मारा देख ! तेरे बेटे को जख़्मी करने वाला यही है, यह सुनते ही हजरते बीबी उम्मे उम्मारा रजियल्लाहु अन्हा ने झपटकर उस काफिर की टाँग पर तलवार का ऐसा वार किया कि वह काफिर गिर पडा और फिर चल न सका बल्कि जमीन के बल घसीटता हुआ भागा यह मंजर देखकर हुजूर ﷺ हंस पडे और फरमाया कि उम्मे उम्मारा ! तू खुदा का शुक्र अदा कर कि उसने तुझको इतनी ताकत और हिम्मत अता फरमाई कि तूने खुदा की राह में जिहाद किया |

बीबी उम्मे उम्मारा ने अर्ज किया कि या रसूलुल्लाह ﷺ दूआ फरमाइए कि हम लोगों का जन्नत में आपकी ख़िदमत – गुजारी का शर्फ हासिल हो जाए | उसी वक्त आप ﷺ ने उनके लिए उनके शौहर के लिए और उनके बेटों के लिए इस तरह दूआ फरमाई कि :-

तरजमा :- “या अल्लाह ! इन सबको जन्नत में मेरा रफीक बना दे |

हजरते बीबी उम्मे उम्मारा रजियल्लाहु अन्हा ज़िन्दगी भर अलानिया यह कहती रही कि रसूलुल्लाह ﷺ की इस दुआ के बाद दुनिया में बडी से बडी मुसिबत भी मुझ पर आ जाए तो मुझे इसकी कोई परवाह नही है |

(मदारिज जि•2, सफा * 126)
(सीरतुल मुस्तफा ﷺ