वेदांग_परिज्ञान : वेद के यथार्थ ज्ञान के लिए इन 6 अंगों को जानना आवश्यक है!

वेदांग_परिज्ञान : वेद के यथार्थ ज्ञान के लिए इन 6 अंगों को जानना आवश्यक है!

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मुदित मिश्र विपश्यी
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वेद को जानना और समझना भाषा और भाव दोनों दृष्टि से बहुत कठिन है । इसलिए इसे सुगम बनाने एवं इसके कर्मकाण्डों के प्रतिपादन में सहायता हेतु ६ अंगों की रचना की गई है जिसे वेदाङ्ग कहा जाता है । अत: वेद के यथार्थ ज्ञान के लिए इन ६ अंगों को जानना आवश्यक है ।

यह कुल ६ है जो इस प्रकार है …..

१. शिक्षा :- इसमें वर्णोच्चारण विधि है । इसका पाणिनि मुनि कृत शिक्षासूत्रपाठ प्रमाणिक ग्रंथ है ।

२. कल्प :- इसमें वेदमंत्रों के अनुष्ठान की विधि है । इसमें श्रौतसूत्र , गृह्यसूत्र , धर्मसूत्र तथा शुल्बसूत्र आते हैं । यह यज्ञों के प्रयोगों का समर्थन करने वाले शास्त्र कहलाते है ।

३. व्याकरण :- इसमें शब्द , अर्थ और उनके परस्पर संबंध का निश्चय है । इसके प्रमाणिक ग्रंथ पाणिनिमुनि कृत अष्टाध्यायी और पतञ्जलिमुनिकृत महाभाष्य है ।इसके अतिरिक्त पाणिनिमुनिकृत उणादि-सूत्रपाठ , लिङ्गानुशासनम-सूत्रपाठ ,धातुपाठ , गणपाठ भी प्रमाणिक ग्रंथ है तथा इनके सहायक ग्रंथों में कात्यायनमुनिकृत वार्तिक-गणपाठ , पतञ्जलिमुनिकृत परिभाषा-पाठ ताथा शान्तनवप्रणीत फिट्सूत्र है । इस पर स्वामी दयानन्द रचित वेदाङ्ग प्रकाश के अष्टाध्यायी और महाभाष्य के आधार पर लिखे गए वर्णोच्चारण शिक्षा , सन्धिविषय , नामिक , कारकीय , सामसिक , स्त्रैणाताद्धित , अव्ययार्थ , आख्यातिक , सौवर , पारिभाषिक , धातुपाठ , गणपाठ , उणादिकोष हैं ।

४. निरुक्त :- इसमें वेदमंत्रों की निरुक्तियाँ है । निरुक्त निघण्टु की व्याख्या है । यह ग्रंथ यास्कमुनिकृत है ।

५. छन्द :- इसमें गायत्री आदि छन्दों के लक्षण तथा वैदिक लौकिक छन्दों का परिचय है । इसमें प्रमाणिक ग्रंथ पिङ्गलाचार्य कृत है ।

६. ज्योतिष :- इसमें भूत , भविष्य तथा वर्तमान का ज्ञान है । इसमें अंक , बीज तथा रेखागणित विद्या सच्ची है तथा फल विद्या झूठी है । इसमें वाशिष्ठ मुनिकृत ज्योतिष है तथा सूर्यसिद्धांत आदि ग्रंथ हैं ।

इसके अलावा प्रतिशाख्यों के विषय को ग्रहण कर सर्वसाधारण के लिए कारिका के रुप में अनेक ग्रंथ निबद्ध किये गए है जो शिक्षा-वेदाङ्ग से संबद्ध होने से शिक्षा ग्रंथ कहे जाते है । इनकी संख्या बहुत है ।
‘शिक्षा संग्रह’ नामक ग्रंथ में ऐसे छोटी-बड़ी ३२ शाखाओं का समुच्चय है जो कि वेद के भिन्न-भिन्न शाखाओं से संबंध रखती है । इनका नाम इस प्रकार है…….

१. याज्ञ्यवल्क्य शिक्षा
२. वाशिष्ठी शिक्षा
३. कात्यायनी शिक्षा
४. पराशरी शिक्षा
५. माण्डव्य शिक्षा
६. अमोघानन्दिनी शिक्षा
७. माध्यान्दिनी शिक्षा
८. वर्णरत्न प्रदीपिका
९. केशवी शिक्षा
१०. मल्लशर्म शिक्षा
११. स्वराङ्कुश शिक्षा
१२. षोडष श्लोकी शिक्षा
१३. अवसान-निर्णय शिक्षा
१४. स्वरभक्ति लक्षण शिक्षा
१५. प्रातिशाख्य प्रदीप शिक्षा
१६. नारदीय शिक्षा
१७. गौतमी शिक्षा
१८. लोमशी शिक्षा
१९. माण्डूकी शिक्षा
२०. क्रम-संधान शिक्षा
२१. गलद्द्क शिक्षा
२२. मन: स्वार शिक्षा

ये सभी प्रकाशित है परन्तु और भी कई शिक्षा ग्रंथ है जो प्रकाशित नहीं है और हस्तलिखित प्रतियों में सुरक्षित है ।

इन शिक्षा-ग्रंथों के अलावा प्राचीन शिक्षा-सूत्र भी विद्यमान है । इनमें आपिशली , पाणिनि और चन्द्रगोमि विरचित शिक्षा-सूत्र प्रकाशित है । यह ऊपर अपलोड किया गया है जिसका संपादन पं• युधिष्ठिर मिमांसक जी ने किया है ।

स्वामी दयानन्द जी के अनुसार इन सभी ग्रंथों में महर्षि पाणिनि कृत शिक्षा ग्रंथ प्रमाणिक है साथ ही सबसे उत्तम है । अत: प्रमाणिक ग्रंथ का ही अध्ययन-अध्यापन होना चाहिए ।। सामान्य शिक्षा अर्थात् सभी वेदों हेतु
१. पाणिनीय शिक्षा
२. वर्ण शिक्षा
सामान्य उपशिक्षा (सभी वेदों के लिए)

१. जटालक्षणम्
२. तृतीय संग्रह
३. पिण्डलक्षणम्
४. व्यक्तिलक्षणम्
५. स्वरभक्तिविषयलक्षणम्
६. वर्णक्रमदर्पणम्

ऋग्वेद का शिक्षा ग्रंथ
१. मधुसूदनी शिक्षा
२. व्याल शिक्षा
३. व्यालि शिक्षा
४. शैशिरीय शिक्षा
५. शौनक शिक्षा
६. हयग्रीवी शिक्षा
७. शमान शिक्षा
८. स्वरव्यञ्जन शिक्षा
९. स्वराङ्कुश शिक्षा
कृष्णयजुर्वेद का शिक्षा ग्रंथ

१. आत्रेय शिक्षा कारिका (हैमबर्ग)
२. आत्रेय शिक्षा (चंडीगढ़)
३. आत्रेय शिक्षा (मद्रास)
४. आपिशलि शिक्षा
५. आरण्य शिक्षा
६. कालनिर्णय शिक्षा
७. श्रीकौण्डिन्य शिक्षा (हैदराबाद)
८. कौण्डिन्य शिक्षा (मैसूर)
९. कौहलीय शिक्षा
१०. चारायणीय शिक्षा
११. भारद्वाज शिक्षा
१२. पारि शिक्षा
१३. प्लुत शिक्षा
१४. लक्ष्मीकान्त शिक्षा
१५. लक्ष्मीकान्त शिक्षा २
१६. लौगाक्षि शिक्षा
१७. वररुचि शिक्षा
१८. वासिष्ठ शिक्षा (तिरुपति)
१९. वासिष्ठ शिक्षा
२०. वेद शिक्षा
२१. व्यास शिक्षा
२२. शम्भु शिक्षा
२३. श्यामायनीय शिक्षा
२४. सर्वसंमत शिक्षा
२५. सिद्धान्त शिक्षा
२६. स्वर शिक्षा
२७. स्वरसारभूतवर्णक्रम शिक्षा

नोट : कृष्णयजुर्वेद प्रमाणिक नहीं है ।
शुक्ल यजुर्वेद का शिक्षा ग्रंथ
१. वर्णरत्नप्रदीपिका शिक्षा
२. अमोघानन्दिनी शिक्षा
३. लघ्वमोघानन्दिनी शिक्षा
४. अवसाननिर्णय शिक्षा
५. गलदृक् शिक्षा
६. काण्व शिक्षा
७. कात्यायन शिक्षा
८. कात्यायनी शिक्षा
९. केशवीय शिक्षा
१०. केशवीपद्यात्मिका शिक्षा
११. कौशिकी शिक्षा
१२. क्रमसंधान शिक्षा
१३. माध्यान्दिनीय शिक्षा
१४. लघुमाध्यान्दिनीय शिक्षा
१५. पाराशरीय शिक्षा
१६. प्रातिशाख्यप्रदीप शिक्षा
१७. मन:स्वार शिक्षा
१८. मल्लशर्म शिक्षा
१९. माण्डव्य शिक्षा
२०. यजुर्विधान शिक्षा
२१. याज्ञवल्क्य शिक्षा
२२. वासिष्ठि शिक्षा
२३. वेदपरिभाषासूत्र शिक्षा
२४. वेदपरिभाषाकारिका शिक्षा
२५. षोडशश्लोकी शिक्षा
२६. स्वरभक्तिलक्षणपरिशिष्ठा शिक्षा
२७. स्वराष्टक शिक्षा
सामवेदीय शिक्षा ग्रंथ
१. नारदीय शिक्षा
२. लोमशी शिक्षा
३. गौतमीय शिक्षा

अथर्ववेदीय शिक्षा
१. माण्डूकी शिक्षा

ऋग्वेद का उपशिक्षा

१. अथकारिलक्षणम्
२. ऋग्वर्णक्रमलक्षणम्
३. बोन्दल लक्षण्म्
४. अखण्डमञ्जरी
५. ऋग्विलङ्घ्यलक्षणम्
६. अवर्णीदीप
७. आवर्णी लक्षणम्
८. नतान्ति पदानि
९. तपरप्रकरणम्
१०. वृथाव्यक्ति
११. स्वराष्टक
१२. जटापटलकारिका

यजुर्वेद का उपशिक्षा ग्रंथ

१. पदकारिकारत्नमाला
२. पदचन्द्रिका
३. प्रतिज्ञा सूत्रम्
४. विसर्गाङ्गुलिप्रदर्शनप्रकार:

सामवेद का उपशिक्षा ग्रंथ

१. स्तोभपदलक्षणम्
२. सामवेदसप्तलक्षणम् यथा शमानम् , विसर्गलोपालोपौ , रङ्ग : , विलिङ्घ्यम् , नपरतपरे , तपरसन्धि: , आवर्णि , अनवग्रहम्
३. सामलक्षणदीपिका

अथर्ववेद का उपशिक्षा ग्रंथ

१. दन्त्योष्ठविधि :

कृष्णयजुर्वेद का उपशिक्षा ग्रंथ

१. यजुर्वेद सप्तलक्षणम्
२. अन्तनिर्देशम्
३. अरुणशमानम्
४. अर्धान्त्यम्
५. इङ्ग्यरत्नम्
६. उच्चोदर्कि
७. कम्पसूत्रम्
८. जटामणि
९. जटावल्ली
१०. जटासिद्धान्तचन्द्रिका
११. त्रिकमलक्षणम्
१२. द्वित्वलक्षणम्
१३. नारदबैठ्
१४. नारदबैठ्व्याख्या
१५. प्रणवविचार:
१६. यणादेशदीर्घिनिषेध:
१७. यमापत्ति
१८. योहिप्राप्ति
१९. योहि भाष्य
२०. रावणबैठ्
२१. रावणबैठ् परिभाषा
२२. वर्णक्रमलक्षणम्
२३. विसर्जनीयलक्षणम्
२४. वैद्यनाथबैठ्
२५. शाखाशमानम्
२६. षडि्वंशति सूत्र
२७. स्वरपञ्चाशत्
२८. स्वरसंपर्कि
२९. स्वरावधानलक्षणम्
इन सभी शिक्षा ग्रंथों में पाणिनीय शिक्षा ही सर्वाधिक व्यवहारिक, उपयोगी व प्रमाणिक है इसलिए पाणिनीय शिक्षा का ही अध्ययन करें एवं दूसरों को भी करने के लिए कहें ।