सावधान_दलितों और मुसलमानों को आपस में लड़ाने का जाल बुना गया है!

सावधान_दलितों और मुसलमानों को आपस में लड़ाने का जाल बुना गया है!

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उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर पिछले दिनों सम्प्रदियिक हिंसा की खबरें ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है, आम आदमी डरा हुआ है, राजनैतिक समझ रहे हैं कि यह किसी गहरी चाल का हिस्सा तो नहीं, सरकार कह रही है ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा, सरकार के सांसद कह रहे हैं ‘हमारा आदमी मारा गया है’,,,उत्तर प्रदेश के कासगंज में 26 जनवरी के दिन हिंसा हुई, यह दिन भारत के राष्ट्रीय उत्सव का दिन है, झंडा हिन्दू फहरायें या मुस्लमान, इस में किसी को क्या आपत्ति, तिरंगा यात्रा के बहाने कासगंज में जो कुछ हुआ उसका अंदाज़ा, अहसास कम से कम मुस्लिम समाज को बिलकुल भी नहीं था| सूत्रों के के अनुसार एक जनवरी को महराष्ट्र के भीमा कोरेगाव हिंसा के बाद तीन जनवरी को आगरा में हिन्दू महासभा, विहिप, बजरंग दल और संघ के कुछ ख़ास नेताओं की गुप्त मेटिंग हुई थी, जिसमे दलितों के मुद्दे को कैसे दबाया जाये पर गहराई से विचार हुआ था, सूत्रों के मुताबिक उस मीटिंग में उस समय तै हुआ था कि किसी प्रकार से दलितों और मुसलमानों को आपस में लड़वाया जाये, दलित और मुसलमानों के झगडे का सीधा लाभ भगवा को होगा, साथ ही बिखराव को रोका जा सकेगा|

सूत्रों के अनुसार आगरा के सभा में मंत्रणा के बाद उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों को चिन्हित किया जहाँ पर ये टकराव कराने का लक्ष्य तै हुआ था उन शहरों में आगरा, कानपुर, मेरठ, मुरादाबाद थे, कासगंज के हिंसा के बाद संघ और बीजेपी के नेताओं ने जिस तरह के भड़काऊ भाषण दिए थे उन्हें देख कर लगता है कि कासगंज की हिंसा उसी कड़ी का हिस्सा है| बतादें कि एक जनवरी को महराष्ट्र के भीमा कोरेगाव में संघ के लोगों ने दलितों पर रैली में शामिल होने जाते समय हमले किये थे|