है क्या इसका जवाब किसी के पास?

है क्या इसका जवाब किसी के पास?

Posted by

Preet Pratima
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क्या कभी किसी ने सोचा है कि ये जो टीवी डिबेट होते हैं, उनका अंत रिज़ल्ट क्या निकलता है?
नहीं कोइ नहीं सोचता, सब के सब आंखें फाड़ फाड़ कर देखते हैं, यही नहीं डिबेट खत्म होने के बाद कुछ, अपने को बुद्धि जीवी समझने वाले एंकर की पीठ भी थपथपाते हैं,

लेकिन काश यही लोग इन टीवी वालों से पूछ सकते कि भई इतना गला फाड़कर जो आप चिल्लायें हैं, उसका अंत रिज़ल्ट क्या निकला है? मज़े की बात ये है कि उस सारी एक्सरसाइज का परिणाम कुछ भी नहीं होता, ना तो जनता को ही कुछ फर्क पड़ता है ना ही सरकार के ऊपर इस सब का कोई असर होता है, और देश ज्यों का त्यों रहता है,।

कभी किसी नेता ने उस डिबेट को सुनकर अपने अंदर नहीं झांका होगा, और ना ही कहीं किसी डिबेट को सुनकर आज तक हमारे देश में कोई सुधार हुआ लगता है, तो फिर ये futile exercise क्यूँ और किसलिए की जाती है? है क्या इसका जवाब किसी के पास? शायद नहीं है, जब इन डिबेटों से ना जनता का, और ना ही देश का भला होता है तो क्यों हम इन्हें आंखें फाड़ फाड़कर देखते हैं और अपना कीमती वक्त बर्बाद करते हैं।