11 फ़रवरी का इतिहास : 11 फ़रवरी 1509 को भारत में दीव के पास पुर्तग़ाल व तुर्की के बीच युद्ध हुआ!

11 फ़रवरी का इतिहास : 11 फ़रवरी 1509 को भारत में दीव के पास पुर्तग़ाल व तुर्की के बीच युद्ध हुआ!

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2 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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1509 – भारत में दीव (गोआ, दमन और दीव) के पास पुर्तग़ाल व तुर्की के बीच युद्ध हुआ।
1556 – चीन के शैन्सी प्रांत में आये विनाशकारी भूकंप में करीब आठ लाख तीस हजार लोगों की मौत हुई।
1626 – चार्ल्स प्रथम इंग्लैंड के सम्राट बने।
1788 – देश में प्रशासनिक सुधारों के लिये पिट्स नियामक अधिनियम को लागू किया गया।
1814 – कलकत्ता (अब कोलकाता) संग्रहालय की स्थापना हुई।
1862 – शंभूनाथ पंडित कलकत्ता उच्च न्यायालय के पहले भारतीय न्यायाधीश बने।
1878 – यूनान ने तुर्की के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1890 – अमेरिकन एक्टर चार्ल्स कोरोल का जन्म हुआ।
1892 – रशिया ने कैलिफ़ोर्निया में ‘फ़र ट्रेडिंग कॉलोनी’ की स्थापना की।
1901 – क्वीन विक्टोरिया का अंतिम संस्कार हुआ।
1913 – न्यूयार्क में ‘ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल’ की ओपनिंग हुई।
1920 – फ़्रांस ने मैमेल पर कब्ज़ा किया।
1922 – जेम्स जॉयस का लिखा उपन्यास ‘यूलिसिस’ पहली बार प्रकाशित किया गया।
1939 – हंगरी ने सोवियत संघ के साथ संबंध समाप्त किये।
1952 – मद्रास में भारत ने पहला टेस्ट क्रिकेट जीता।
1953 – अखिल भारतीय खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड का गठन किया गया।
1966 – पाकिस्तान ने ‘कश्मीर समझौते’ के लिए एक महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया।
1982 – सीरिया ने हामा पर आक्रमण किया।
1990 – अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस पर 30 वर्ष पूर्व लगा प्रतिबंध हटाया गया।
1992 – अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश एवं रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन द्वारा शीत युद्ध की समाप्ति की घोषणा।
1997 – चीन तथा सं.रा. अमेरिका के बीच वस्त्र व्यापार विवाद को समाप्त करने हेतु समझौता।
1999 – आस्ट्रेलियाई कप्तान मार्क टेलर का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्न्यास।
2001 – भारतीय नौसेना के सी किंग हेलिकाप्टरों के लिए अमेरिकी कलपुर्जों की बिक्री को अनुमति।
2002 – अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल के अपहरण काण्ड में पाकिस्तान के तीन व्यक्ति गिरफ़्तार।
2004 – स्विस टेनिस प्लेयर रोजर फ़ेडरर 237 हफ्तों तक लगातार पहली रैकिंग पर रहे। यह एक रिकार्ड है।
2007 – अंतर्राष्ट्रीय पैनल (आईपीसीसी) ने ग्लोबल वार्मिंग पर रिपोर्ट प्रस्तुत की।
2008 -राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कर्नाटक की पहली लक्जरी ट्रेन ‘गोल्डन चैरियट’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। राज्यपाल बी. एल. जोशी ने बी. के. गुप्ता को उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश की शपथ दिलाई।

2 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति
1889 – राजकुमारी अमृत कौर – भारत की एक प्रख्यात गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और एक सामाजिक कार्यकर्ता।
1890 – अमेरिकन एक्टर चार्ल्स कोरोल का जन्म हुआ।
1902 – मोटूरि सत्यनारायण – दक्षिण भारत में हिन्दी प्रचार आन्दोलन के संगठक
1915 – खुशवंत सिंह – भारत के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक, उपन्यासकार और इतिहासकार।
1979 – शमिता शेट्टी, भारतीय अभिनेत्री

2 फ़रवरी को हुए निधन
1958 – बलुसु संबमूर्ति – मद्रास के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी।
1960 – चतुरसेन शास्त्री – हिन्दी साहित्य के एक महान् उपन्यासकार।
1978 – गोविंद शंकर कुरुप (ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मलयाली भाषा के एक प्रसिद्ध साहित्यकार) (5 जून, 1901)
2007 – विजय अरोड़ा, भारतीय फ़िल्म व टेलीविजन अभिनेता (जन्म- 1944)
1982 – मोहन लाल सुखाड़िया – प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री।

2 फ़रवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)।

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11 फ़रवरी सन 660 ईसा पूर्व को जापान के पहले तानाशाह ई मू सिंहासन पर बैठे।इस प्रकार से विश्व की सबसे दीर्घकालीन राजशाही शासन व्यवस्था की स्थापना हुई। इस व्यवस्था में बहुत से उतार चढ़ाव आए। इस समय जापान में नरेश तो है किंतु सारी शक्ति प्रधान मंत्री के पास होती है। जापान के लोग इस देश में राजशाही शासन व्यवस्था की स्थापना के दिन को राष्ट्रीय दिवस के रुप में मनाते हैं।

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11 फ़रवरी सन 1929 ईसवी को वैटिकन और इटली के बीच लेटरैन समझौता हुआ जिसके बाद वैटिकन को औपचारिक रुप से स्वतंत्रता मिली। वैटिकन 19वीं शताब्दी के मध्य तक इटली की चर्च सरकार के अधीन था और इसे भी इटली का ही एक भाग समझा जाता था। वर्ष 1870 में इटली की सेना ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया किंतु इटली के नरेश ने विश्व के कैथोलिक ईसाइयों के क्रोध को दृष्टिगत रखते हुए घोषणा की थी कि वैटिकन महल पादरी के पास ही रहेगा और यह उनकी धार्मिक सरकार का केंद्र होगा। सन 1929 में लेटरैन समझौते के बाद उक्त घोषणा को औपचारिक रुप दे दिया गया। वैटिकन इटली की राजधानी रोम में स्थित है यह विश्व का सबसे छोटा और कम जनसंख्या वाला देश है यह विश्व के कैथोलिक ईसाइयों के धार्मिक नेता का केन्द्र है। इसका क्षेत्रफल आधे किलोमीटर से कम है यहॉं की जनसंख्या एक हज़ार से कुछ अधिक है ।

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11 फ़रवरी सन 1990 ईसवी को दक्षिणी अफ़्रीक़ा के नस्लभेद विरोधी नेता दिवंगत नेल्सन मंडेला 27 वर्ष जेल में व्यतीत करने के बाद स्वतंत्र हुए। मंडेला को दक्षिणी अफ़्रीक़ा की नस्लभेदी सरकार के विरुद्ध संघर्ष के कारण सन 1963 ईसवी में आजीवन कारावास का दंड दिया गया किंतु जेल में भी निरंतर संघर्ष जारी रखने तथा देश की जनता और विश्व जनमत द्वारा उनके समर्थन के कारण जेल से उन्हें मुक्ति मिली और दक्षिणी अफ़्रीक़ा के काले लोगों ने विशेष रुप से उन्हें सम्मान दिया। सन 1991 ईसवी में तत्कालीन शासन व्यवस्था को हटाने पर सहमति हुई और सन 1994 में बहुजातीय लोगों की सम्मिलिति से इस देश में चुनाव कराए गये जिसमें नेल्सन मंडेला दक्षिणी अफ़्रीका के पहले राष्ट्रपति बने।

दिसंबर 2013 में नेल्सन मंडेला का निधन हुआ।

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11 फ़रवरी वर्ष 2011 को मिस्र के तानाशाह हुस्नी मुबारक को जो स्वयं को अजीवन राष्ट्रपति कहते थे, जनक्रांति के बाद सत्ता से हटना पड़ा। हुस्नी मुबारक तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात के सहायक थे और वर्ष 1981 में एक सैन्य परेड में अनवर सादात की हत्या के बाद राष्ट्रपति बने। अनवर सादात कैंप डेविड समझौता करने और फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की उमंगों विश्वासघात करने के कारण ख़ालिद इस्लामबोली के हाथों मारे गये थे। हुस्नी मुबारक सत्ता से हटने से पहले तक अनवर सादात के मार्ग पर अग्रसर थे और मध्यपूर्व में ज़ायोनी शासन और अमरीकी नीतियों को जारी रखने वाले व्यक्ति थे। हुस्नी मुबारक ने मिस्र के भीतर भी अपातकाल लगाकर राजनैतिक घुटन का वातावरण उत्पन्न कर दिया था और जनता विशेषकर इस्लाम वादियों का दमन किया। इन्होंने मिस्र और ज़ायोनी शासन के मध्य धनिष्ठ संबंधों के बारे में जनता के विरोध पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया। उसके शासन काल में मिस्र की अर्थव्यवस्था धराशायी हो गयी थी और जनता को भीषण आर्थिक समस्याओं का सामना था। यही कारण था कि मिस्र में भी इस्लामी जागरूकता की लहर फैल गयी और जनता तानाशाही व्यवस्था को गिराने के लिए अत्तहरीर स्क्वायर पर एकत्रित होने लगी। मिस्र के तहरीर स्क्वायर से उठने वाली लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया और देश के विभिन्न क्षेत्रों में जनता तानाशाही व्यवस्था के विरुद्ध प्रदर्शन करने लगी। मिस्री सैनिकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही जनता का भरपूर दमन किया। प्रदर्शनकारी समस्त धमकियों और हिंसक घटनाओं के बावजूद 18 दिनों तक तहरीर स्क्वायर पर डटे रहे। अंततः हुस्नी मुबारक को जनता की मांगों के समक्ष घुटने टेकने पड़े और 11 फ़रवरी वर्ष 2011 को सत्ता उन्होंने अपने समर्थक जनरलों के हवाले कर दी। कुछ महीनों बाद देश की सैन्य परिषद जनता के क्रोध को कम करने के लिए हुस्नी मुबारक और उनके पुत्रों पर मुक़द्दमा चलाने पर विवश हुई।

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22 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी का दिन ईरान के लिए एक ऐतिहासिक और निर्णायक दिन था। अल्लाहो अकबर के प्रेरणादायक नारों और ईरानी जनता के बलिदान तथा त्याग ने इस देश में तानाशाही शासन के अत्याचारों और अन्याय के अंधकार का अंत करके इस्लामी क्रान्ति का प्रकाश चारों ओर फैला दिया। आज के दिन ईरान की इस्लामी क्रान्ति सफल हुई। आज के दिन महिलाएं पुरुष बूढे, बच्चे, जवान सब ही अत्याचार और अन्याय के मुकाबले में पंक्तिबद्ध हुए। जनता ने सड़कों पर पथराव किया और वे मौत की कोई परवाह किये बिना टैंकों के सामने मज़बूत दीवार के समान डट गयी।

सेना ने भी इस संघर्ष में अंतत:अपनी निष्पक्षता की घोषणा कर दी।

इसी बीच रेडियो और टीवी संस्थानों पर जनता का अधिकार हो गया जिसके कुछ ही देर बाद टीवी और रेडियो से इस्लामी क्रान्ति की सफलता के समाचार प्रसारित किये गये। यह समाचार वास्तव में अन्याय के महल के धराशायी होने पर सत्य की शुभ सूचना था इस भारी परिवर्तन से ईरान में इस्लामी शासन व्यवस्था के लिए भूमिका समतल हुई।

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24 जमादिउल अव्वल सन 1326 हिजरी क़मरी को प्रसिद्ध लेखक, संघर्षकर्ता और विचारक नसरुल्लाह मलिकुल मुतकल्लेमीन मुहम्मद अली शाह क़ाजार के पिट्ठुओं के हाथ गिरफ़्तार हुए और मार दिए गये। उनका जन्म सन 1277 हिजरी क़मरी में इस्फ़हान नगर में हुआ था। मलिकुल मुतकल्लेमीन ने वर्ष 1299 हिजरी क़मरी में भारत का दौरा किया। वे भारतीय समाज की दयनीय स्थिति और इस देश में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के वर्चस्व से बहुत प्रभावित हुए और अपनी सबसे बड़ी पुस्तक मिनल ख़ल्क़ एल हक़ प्रकाशित की। इस पुस्तक का बुद्धिजीवियों और जनता ने भव्य स्वागत किया किन्तु ब्रिटिश साम्राज्यवाद और उसके पिट्ठु क्रोधित हो उठे। उसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और ईरान की ओर देश निकाला दे दिया गया। देश निकाला दिए जाने के समय वे सैयद जमालुद्दीन असदाबादी से परिचित हुए और उनकी स्वतंत्रता प्रेमी भावनाओं और उनकी जीवन शैली से बहुत प्रभावित हुए। जब वे अपने जन्म स्थल इस्फ़हान पहुंचे तो वहां उपदेश में व्यस्त हो गये। इस दौरान वे क़ाजारी शासन की नज़र में आ गये और वर्ष 1326 हिजरी क़मरी में मुहम्मद अली शाह क़ाजार के आदेश पर उनकी हत्या कर दी गयी।