12 फ़रवरी का इतिहास : 12 फ़रवरी 1736 को एशिया का अन्तिम महान सेनानायक ‘नादिर शाह’ फ़्रांस का शासक बना था

12 फ़रवरी का इतिहास : 12 फ़रवरी 1736 को एशिया का अन्तिम महान सेनानायक ‘नादिर शाह’ फ़्रांस का शासक बना था

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भारत और विश्‍व की प्रमुख घटनाओं की जानकारी
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1266 – दिल्ली के सुल्तान नसीरुद्दीन शाह का निधन।

1502 – वास्को द गामा भारत की दूसरी यात्रा के लिए अपने जहाज़ में लिस्बन से रवाना हुआ।

1544 – इंग्लैंड में राजद्रोह के आरोप में जेन जेन ग्रे को मौत की सज़ा दी गई।

1577 – नीदरलैंड के नये गवर्नर आस्ट्रिया के डान जान ने गृहयुद्ध समाप्त करने का आदेश जारी किया।

1610 – फ़्रांस नरेश हेनरी चतुर्थ ने जर्मन प्रोटेस्टेंट यूनियन के साथ समझौता किया।

1689 – विलियम और मेरी इंग्लैंड के राजा तथा रानी घोषित किये गए।

1736 – नादिरशाह फ़्रांस का शासक बना। ((नादिर शाह अफ़्शार (या नादिर क़ुली बेग़) (१६८८ – १७४७) फ़ारस का शाह था (१७३६ – १७४७) और उसने सदियों के बाद क्षेत्र में ईरानी प्रभुता स्थापित की थी। उसने अपना जीवन दासता से आरंभ किया था और फ़ारस का शाह ही नहीं बना बल्कि उसने उस समय ईरानी साम्राज्य के सबल शत्रु उस्मानी साम्राज्य और रूसी साम्राज्य को ईरानी क्षेत्रों से बाहर निकाला।

उसने अफ़्शरी वंश की स्थापना की थी और उसका उदय उस समय हुआ जब ईरान में पश्चिम से उस्मानी साम्राज्य (ऑटोमन) का आक्रमण हो रहा था और पूरब से अफ़गानों ने सफ़ावी राजधानी इस्फ़हान पर अधिकार कर लिया था। उत्तर से रूस भी फ़ारस में साम्राज्य विस्तार की योजना बना रहा था। इस परिस्थिति में भी उसने अपनी सेना संगठित की और अपने सैन्य अभियानों की वज़ह से उसे फ़ारस का नेपोलियन या एशिया का अन्तिम महान सेनानायक जैसी उपाधियों से सम्मानित किया जाता है))

1742 – नाना फ़ड़नवीस का जन्म।

1809 – ब्रिटिश वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन का जन्म।

1885 – जर्मन ईस्ट अफ़्रीका कम्पनी का गठन हुआ।

1899 – जर्मनी ने स्पेन से मेरिनास कैरोलिन और पिल्यू द्वीप ख़रीदे।

1912 – चीन में मंचु वंश ने गद्दी छोड़ दी।

1928 – गांधी जी ने बारदोली में सत्याग्रह की घोषणा की।

1934 – फ़्रांस में श्रमिक आम हड़ताल पर।

1953 – सूडान के बारे में ब्रिटेन और मिस्र के बीच समझौता हुआ।

1974 – मास्को में नोबेल पुरस्कार विजेता सोवियत संघ के अलेक्जेंडर सोल्जेनित्शिन को गिरफ़्तार किया गया।

1988 –
– द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सात लाख लोगों की हत्या के सिलसिले में 86 वर्षीय एड्रिया आर्टुकोविक को मुकदमा चलाने के लिए अमेरिका से यूगोस्लाविया भेजा गया।
– पश्चिमी तट पर बसे नेबलुस शहर में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों द्वारा गोली चलाने से दो व्यक्ति मारे गए और अन्य अनेक घायल हो गए।

1996 – फ़िलिस्तीनी मुक्ति संगठन के नेता यासर अराफात को गाजा में फ़िलिस्तीन के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई।

1998 – अमेरिकी कंपनी राइसटेक को बासमती चावल का पेटेंट सं.रा. अमेरिका द्वारा प्रदत्त।

1999 – बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू।

2000 – पंडित रविशंकर फ़्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘कॉमनडियर डीला लीजंड डि आनर’ से सम्मानित, पाकिस्तान राष्ट्रमंडल संसदीय संघ से निलम्बित।

2006 – एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार दुनिया से सबसे ज़्यादा बदतर हालात नेपाल में।

2007 – बगलिहार पर विश्व बैंक ने अंतिम रिपोर्ट सौंपी।

2008 –
– उत्तर प्रदेश सरकार ने बहुचर्चित उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियन्त्रण विधोयक (यूपीकोका) को दोबारा ध्वनिमत से पारित किया।
– अमेरिका में हाइड एक्ट के सह लेखक टॉम लेंटास का निधन। अंतरिक्ष केन्द्र पर पहला यूरोपीय लैब स्थापित किया गया। पूर्वी तिमोर में राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री पर हमले के बाद प्रधानमंत्री जाना जुस्माओ ने आपातकाल की घोषणा की।

2009 – भारत के वैज्ञानिकों ने विश्व का पहला भैंस क्लोन विकसित किया। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को कैंम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने डीलिट् की उपाधि से सम्मानित करने की घोषणा की।
2010 – हरिद्वार महाकुंभ में सात अखाड़ों के क़रीब पचास हज़ार सन्न्यासियों और विभिन्न अखाड़ों के लगभग चार हज़ार नागा अवधूतों सहित लगभग 55 लाख श्रद्धालुओं ने पहले शाही स्नान पर गंगा में डुबकी लगाई।

12 फरवरी को जन्मे व्यक्ति

1742 – नाना फड़नवीस – मराठा राजनेता थे, जो पानीपत के तृतीय युद्ध के समय पेशवा की सेवा में नियुक्त थे।

1824 – दयानंद सरस्वती, आर्य समाज के प्रवर्तक और प्रखर सुधारवादी सन्न्यासी

1920 – प्राण – हिन्दी फ़िल्मों के जाने माने नायक, खलनायक और चरित्र अभिनेता।

1967 – चित्रवीणा एन रविकिरण – भारतीय संगीतकार

1972 – अजय नायडू – भारतीय-अमरीकी अभिनेता

12 फरवरी को हुए निधन

1919 – सूफ़ी अम्बा प्रसाद – प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता।

1794 – महादजी शिन्दे -रणोजी सिंधिया का अवैध पुत्र और उत्तराधिकारी था।

12 फ़रवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव

गुलाब दिवस

उत्पादकता सप्ताह।

सर्वोदय दिवस।

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12 फरवरी
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“मुश्किल का सामना तो तकरीबन हर इंसान कर लेता है, लेकिन किसी के चरित्र की असली पहचान करनी है तो उसके हाथ में ताकत दे दो.” दुनिया के सामने नजीर पेश करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन 1809 में आज ही के दिन पैदा हुए.

बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए अब्राहम लिंकन को बचपन से ही पढ़ाई लिखाई का शौक था. उन्होंने अपने बलबूते वकालत की पढ़ाई की. 20 साल तक वो गरीबों और बेबस लोगों के मुकदमे मुफ्त या बहुत ही कम दाम में लड़ते रहे. इस दौरान अमेरिका में होने वाले भेदभाव, सामाजिक अन्याय, उत्पीड़न और दास प्रथा से वो ऐसे विचलित हुए कि उन्होंने पहले गृह युद्ध में सशस्त्र विद्रोह का रास्ता चुना और फिर राजनीति की राह पकड़ी.

छह फुट चार इंच की लंबी कद कांठी वाले लिंकन ने पहला स्थानीय चुनाव बुलंदी के साथ जीता. वो मेहनत और अच्छाई का ही नारा देकर दिल जीतते रहे. उन्होंने मुखर होकर दास प्रथा के खिलाफ आवाज उठायी. जनता से कहा कि अमेरिका को कोई बाहरी देश कभी तबाह नहीं कर सकता, लेकिन अमेरिका अगर तबाह होगा तो अपने लोगों की गलतियों की वजह से.

1861 में अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति बने. राष्ट्रपति बनते ही उन्होंने नस्लभेद के खिलाफ और मुखर ढंग से आवाज उठानी शुरू की. लिंकन ने अश्वेत अमेरिकियों को मतदान का अधिकार देने की वकालत की. अमेरिका को खड़ा करने के बावजूद वो लगातार कहते रहे कि मेहनत से कमाया एक डॉलर सड़क पर मिले पांच डॉलरों से ज्यादा कीमती होता है. अश्वेतों से चिढ़ने वाले लिंकन के इन कदमों से बौखला उठे, 15 अप्रैल 1865 को लिंकन को गोली मार दी गई, लेकिन विचारों की शक्ल में वो आज भी जीवित हैं.

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12 फ़रवरी सन 1809 ईसवी को ब्रिटेन के भौतिक शास्त्री चार्ल्ज़ डारविन का जन्म हुआ।

उन्होंने विभिन्न जीव जन्तुओं की उत्पत्ति के बारे में अध्ययन किया और अपने इस अध्ययन को अंतिम चरण तक पहुँचाने के लिए उन्होंने लम्बी समुद्री यात्रा की। डारविनिज़्म विचारधारा के जनक डारविन के मतानुसार वर्तमान जीवों की उत्पत्ति एक साधारण से जीव से हुई जो बाद में विभिन्न परिस्थितियों के अंतर्गत विभिन्न प्रारुपों में बदलते गये।

सन 1882 में डारविन का निधन हुआ।

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12 फ़रवरी सन 1912 ईसवी को चीन में सोन-येत-सेन के नेतृत्व में सैनिकों और जनता के विद्रोह के बाद इस देश में मंचू वंश का राज समाप्त हुआ और उसका स्थान लोकतांत्रिक व्यवस्था ने ले लिया। सोन येत सेन ने, जो चीन के राष्ट्रपिता माने जाते हैं, इस विद्रोह के बाद राष्ट्रपति पद संभाला। कुछ ही समय बाद वे सत्ता से हट गये और यू आन शीकाय ने उनका स्थान लिया किंतु आंतरिक मतभेदों के कारण चीन की स्थिति एक बार पुन: तनावपूर्ण हो गयी। सन 1949 में चीन में एक दूसरी क्रान्ति आयी जिसके बाद इस देश में कम्युनिस्ट शासन लागू हो गया।

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12 फ़रवरी सन 1948 ईसवी को मिस्र के विख्यात संघर्षकर्ता और इख़वानुल मुसलमीन संगठन के संस्थापक हसन-अल-बन्ना को ब्रिटेन और तत्कालीन मिस्री नरेश मलिक फ़ारुक़ ने षडयंत्र रच कर शहीद करवा दिया। उन्होंने विश्व विद्यालय में अपनी शिक्षा के दौरान ही विश्व साम्राज्य और देश में उसके समर्थकों के विरुद्ध संघर्ष छेड़ दिया। सन 1928 में उन्होंने इख़वानुल मुसलेमीन नामक संगठन की स्थापना की। इस संगठन का समर्थन धीरे धीरे मिस्र के बाहर सीरिया, लेबनान, जॉर्डन और उत्तरी अफ़्रीक़ा के कुछ देशों में बढ़ता गया और हसन अलबन्ना पूरी दुनिया में विख्यात हो गये। 1948 में मिस्र के तत्कालीन प्रधान मंत्री की हत्या के आरोप में मिस्र की सरकार ने इख़वानुल मुसलेमीन पर प्रतिबंध लगा दिया। इस गुट के कई नेताओं को गिरफ़तार करवाया गया जिनमें हसन अल बन्ना सहित कुछ लोगों को मौत की सज़ा दे दी गयी किंतु यह संगठन आज भी पूरी तरह सक्रिय है।

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12 फ़रवरी सन 1804 ईसवी को जर्मनी के प्रख्यात दार्शनिक एवं विचारक इमैनुएल कांट का 80 वर्ष की आयु में निधन हुआ। वे सन 1724 में एक धार्मिक परिवार में जन्मे। कांट ने अपना पूरा जीवन शिक्षा और पठन तथा लेखन में व्यतीत किया। कांट ने गणित, भौतिकशास्त्र, खगोल शास्त्र, तर्क शस्त्र और विशेष रुप से दर्शन शास्त्र के विषय में अनेक पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने किसी भी वस्तु की सही पहचान के लिए प्रयोग और बुद्धि को प्रभावी माना है। कांट ने नैतिकशास्त्र के विषय में अनेक मूल्यवान विचार प्रसतुत किए हैं।

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12 फ़रवरी वर्ष 2008 को लेबनान के हिज़बुल्लाह संगठन के नेता एमाद मुग़निया को जो हाज रिज़वान के नाम से प्रसिद्ध थे, शहीद कर दिया गया । उनकी गाड़ी में ज़ायोनी शासन के तत्वों ने बम लगाया था। शहीद एमाद मुग़निया का जन्म वर्ष 1962 में दक्षिणी लेबनान के एक धार्मिक परिवार में हुआ था। पढ़ाई के बाद उन्होंने कुछ समय तक पीएलओ के साथ काम किया किन्तु ज़ायोनी शासन के लेबनान पर आक्रमण और इस देश से पीएलओ के निकलने के बाद वे अमल आंदोलन से जुड़ गये। कुछ दिनों बाद हिज़बुल्लाह आंदोलन के गठन के बाद वे इस से जुड़ गये और उन्होंने ज़ायोनी शासन के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा। अपनी वीरता, साहस और होशियारी के कारण एमाद मुग़निया ने हिज़बुल्लाह आंदोलन में बड़ा स्थान प्राप्त कर लिया और ज़ायोनी शासन के विरुद्ध होने वाले कई अभियानों की योजना उन्हें ने बनाई थी। यही कारण था कि औपचारिक रूप से एमाद मुग़निया का नाम ज़ायोनी शासन की हिट लिस्ट में था। वर्ष 2006 में 33 दिवसीय युद्ध में ज़ायोनी सैनिकों की भारी पराजय में एमाद मुग़निया की भूमिका से इन्कार नहीं किया जा सकता। 33 दिवसीय युद्ध में ज़ायोनी सैनिकों की भारी पराजय के कारण ज़ायोनी उनसे द्वेष रखने लगे और अपनी कायरतापूर्ण शैली के सहारे प्रतिरोध के एक चमकते दीप को बुझा दिया।

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23 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान में इस्लामी क्रान्ति की सफलता के आरंभिक दिनों में अंतरिम सरकार ने औपचारिक रुप से अपना कार्य आरंभ किया। दूसरी ओर शाह के पतन और इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बावजूद जनता उसी प्रकार उक्त शासन को जड़ से उखाड़ फैंकने के लिए प्रयासरत रही। इसी प्रकार जनता के एक अन्य गुट ने शहरों में संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण केंद्रों को बचाने का कार्य संभाला। इस दायित्व को संभालने तथा शाह से मिलीभगत रखने वालों से संघर्ष के लिए एक सुव्यवस्थित संगठन का अस्तित्व आवश्यक हो गया। इसी लिए इमाम ख़ुमैनी के आदेश पर इस्लामी क्रान्ति समिति बनायी गयी।

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25 जमादिउल अव्वल सन 643 हिजरी क़मरी को सीरिया के हलब नगर में अरब जगत के विख्यात साहित्यकार और बुद्धिजीवी इब्ने यईश का निधन हुआ। वे अरबी साहीत्य में दक्षता रखते थे। उनके अनेक शिष्य वरिष्ठ साहित्यकारों में गिने जाते है। इनमें इब्ने ख़लक़ान जैसे साहित्यकारों का नाम उल्लेखनीय है।