14 फ़रवरी का इतिहास : 14 फ़रवरी 1931 को महान् क्रान्तिकारी भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को फाँसी दी गयी!

14 फ़रवरी का इतिहास : 14 फ़रवरी 1931 को महान् क्रान्तिकारी भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को फाँसी दी गयी!

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14 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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1537 – गुजरात के बहादुर शाह को पुर्तग़ालियों ने धोखे से गिरफ़्तार करने की कोशिश की और भागने के चक्कर में वह डूब गया।
1556 – पंजाब के गुरदासपुर ज़िले के कलानौर में अकबर की ताजपोशी हुई।
1628 – शाहजहाँ आगरा की गद्दी पर बैठा।
1658 – दिल्ली की सत्ता हथियाने के लिए मुग़ल वंश के आपसी संघर्ष में दारा ने वाराणसी के पास बहादुरपुर की लड़ाई में शुजा को पराजित किया।
1663 – कनाडा फ़्रांस का एक प्रान्त बना।
1670 – रोमन कैथोलिक सम्राट लियोपोल्ड प्रथम ने यहूदियाें को वियना से बाहर किया।
1743 – हेनरी पेलहम ब्रिटेन के वित्त विभाग के पहले प्रमुख बने।
1846 – क्राको गणराज्य का विद्रोह पूरे पोलैंड में फैल गया।
1881 – भारत के पहले होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की कोलकाता में स्थापना।
1899 – अमेरिकी कांग्रेस ने संघीय चुनाव में वोटिंग मशीन के इस्तेमाल को मंजूरी दी।
1893 – हवाई अमेरिका का हिस्सा बना।
1912 – इंग्लैंड में पहली बार डीजल इंजन वाली पनडुब्बी का जलावतरण किया गया।
1920 – शिकागो में महिला मतदाता लीग की स्थापना की गयी।
1931 – महान् क्रान्तिकारी भगत सिंह, राजगुरु तथा सुखदेव को लाहौर के एक जेल में फाँसी दे दी गयी।
1943 – सोवियत फ़ौजों ने जर्मन फ़ौजों से रोस्तोव पुन: छीन लिया।
1945 – पेरू, पराग्वे, चिली और इक्वाडोर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य बने।
1958 – ईराक और जार्डन को मिलाकर बने फ़ेडरेशन के मुखिया शाह फ़ैजल बने।
1972 – अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार प्रतिबंधों में ढील की घोषणा की।
1978 – अमेरिका ने मिस्र, सऊदी अरब और इसरायली को अरबों डॉलर के हथियार बेचने की घोषणा की।
1979 – काबुल में अमेरिकी राजदूत एडोल्फ़ डक्स की मुस्लिम उग्रवादियों द्वारा हत्या।
1988 – फ़िलिस्तीन मुक्ति संगठन के तीन वरिष्ठ अधिकारी बम विस्फोट से साइप्रस में मारे गए।
1989 -बेल्जियम के पूर्व प्रधानमंत्री पाल्क वाडेन को एक माह बाद फिरौती देने के बाद छोड़ा गया।
1990 – बंगलौर में इंडियन एयरलाइंस 605 पर सवार 92 लोग विमान दुर्घटना में मारे गये।
1992 – सोवियत संघ से अलग हुए गणराज्यों में आधे से अधिक ने अलग सेना बनाने की घोषणा की।
1993 – कपिल देव ने 400 विकेट और 5000 रनों का रिकार्ड बनाया।
1999 – इम्फाल में पांचवे राष्ट्रीय खेलों की शुरुआत हुई।
2000 – अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रबंध निदेशक माइकल कैमडेसस ने अपने 13 वर्षीय कार्यकाल के बाद अवकाश ग्रहण किया।
2001 – अल सल्वाडोर में भूकम्प, 225 मरे।
2002 – उमर शेख़ ने कहा, पर्ल जीवित नहीं, किन्तु तलाश जारी।
2003 – श्रीलंका के तेज गेंदबाज चामिंडा वास ने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ खेलते हुए आठवें विश्व कप की पहली हैट्रिक बनाई।
2004 – जर्मन निदेशक की ‘हेड आन’ फ़िल्म को गोल्डन बीयर पुरस्कार मिला।
2005 – प्रसिद्ध साहित्यकार डाक्टर विद्यानिवास मिश्र की सड़क दुर्घटना में मृत्यु।
2006 – न्यायाधीशों के विरोध में सद्दाम हुसैन भूख हड़ताल पर गये।
2007 – मध्य प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे श्यामाचरण शुक्ल का निधन हुआ।
2008-नैया मसूद को उनके कहानी संग्रह तऊस चमन की मैना के लिए वर्ष 2007 का ‘सरस्वती सम्मान’ प्रदान किया गया।
2009 – सानिया मिर्ज़ा ने पटाया ओपन टेनिस के फाइनल में प्रवेश किया।

14 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति
1483 – बाबर – मुग़ल सम्राट (मृत्यु- 1530)
1875 – अलेक्जेन्डर मडीमैन – राज्य परिषद के अध्यक्ष थे।
1885 – सैयद ज़फ़रुल हसन – प्रमुख मुस्लिम दार्शनिक (भारतीय/पाकिस्तानी) (मृत्यु- 1949)
1925 – मोहन धारिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता
1933 – मधुबाला – भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री (मृत्यु- 1969)
1952 – सुषमा स्वराज – भारतीय जनता पार्टी की शीर्ष महिला राजनीतिज्ञ।
1962 – सकीना जाफ़री – भारतीय अभिनेत्री
1938 – कमला प्रसाद- हिन्दी के प्रसिद्ध आलोचक

14 फ़रवरी को हुए निधन
2005 – विद्यानिवास मिश्र – हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार, सफल सम्पादक, संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान् और जाने-माने भाषाविद।
1964 – वी.टी. कृष्णमाचारी – भारतीय सिविल सेवक और प्रशासक थे।

14 फ़रवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
उत्पादकता सप्ताह।
सेंट वैलेंटाइन दिवस

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14 फरवरी
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तीसरी शताब्दी में आज ही के दिन रोम में क्लाउडियस द्वितीय के शासन के दौरान वैलेंटाइन को फांसी पर चढ़ाया गया था. इसी के बाद से दुनिया में वैलेंटाइन्स डे के नाम इसे मनाया जाता है.

रोम में सम्राट क्लाउडियस के क्रूर शासन के दौरान कई अलोकप्रिय और खूनी अभियान चलाए गए. सम्राट को शक्तिशाली सेना को बनाए रखने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. क्लाउडियस को लगता था कि रोम के लोग अपनी पत्नी और परिवारों के साथ मजबूत लगाव होने की वजह से सेना में भर्ती नहीं हो रहे हैं. इस समस्या से निजात पाने के लिए क्लाउडियस ने रोम में शादी और सगाई पर पाबंदी लगा दी.

लेकिन पादरी वैलेंटाइन ने सम्राट के आदेश को लोगों के साथ नाइंसाफी के तौर पर महसूस किया. सम्राट के आदेश को चुनौती देते हुए वैलेंटाइन चोरी छिपे युवा प्रेमी जोड़ों की शादी कराते थे. जब वैलेंटाइन के काम के बारे में क्लाउडियस को पता चला तो उसने पादरी की हत्या का आदेश जारी किया. वैलेंटाइन को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया गया. अदालत ने वैलेंटाइन को मौत की सजा सुनाई.

14 फरवरी 270 को वैलेंटाइन को मौत की सजा दी गई. ऐसा भी कहा जाता है कि संत वैलेंटाइन ने जेल में रहते हुए जेलर की बेटी को खत लिखा था, जिसमें अंत में उन्होंने लिखा था “तुम्हारा वैलेंटाइन.” वैलेंटाइन के प्रेम के संदेश को आज भी लोग दुनिया में जिंदा रखे हुए हैं. वैलेंटाइन को इस महान सेवा के लिए संत की उपाधि दी गई. तब से लेकर हर साल दुनिया भर में 14 फरवरी को वैलेंटाइन्स डे के तौर पर मनाया जा रहा है. इस दिन लोग एक दूसरे को फूल, चॉकलेट और उपहार देकर अपने स्नेह का इजहार करते हैं.
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14 फ़रवरी सन 2005 को लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक़ हरीरी राजधानी बैरूत मे एक कार बम के धमाके में मारे गए।

लेबनान के बड़े उद्यमी माने जाने वाले रफ़ीक़ हरीरी की आयु उस समय 61 वर्ष थी। हरीरी लेबनान के गृह युद्ध की समाप्ति के कुछ ही समय बाद वर्ष 1992 से वर्ष 1998 तक तथा वर्ष 2000 से 2004 तक लेबनान के प्रधान मंत्री रहे। रफ़ीक़ हरीरी लेबनान में सीरिया की सेनाओं की उपस्थिति के विरोधी थे इसी लिए उनकी हत्या के बाद अमरीका और फ़्रान्स ने दावा किया कि उन्हें सीरिया के एजेंटों ने मारा है। अमरीका और फ्रान्स के भारी दबाव से संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस हत्या की जांच के लिए आयोग गठित किया इस प्रकार रफ़ीक़ हरीरी की हत्या का मामला सीरिया पर दबाव डालने और लेबनान के आंतरिक संकट को हवा देने का बहाना बन गया।

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14 फ़रवरी सन 1938 ईसवी को पालमाख़ गुट के हथियारबंद ज़ायोनियों ने फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार को जारी रखते हुए अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के सासा गांव में अपना घिनौना अपराध आरंभ किया। अगले दिन तक जारी रहने वाली इस आपराधिक कार्यवाही में 20 घरों को ध्वस्त कर दिया गया जिसके कारण 60 फ़िलिस्तीनी जिनमें अधिक संख्या महिलाओं और बच्चों की थी मलबे के नीचे दबकर शहीद हो गए। ज़ायोनी बहुत दिनों तक सासा की घटना को फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार के रूप में याद करते रहे।

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14 फ़रवरी सन 1945 ईसवी को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विश्व की सबसे भीषण ग़ैर परमाणु बम्बारी आरंभ हुई। ब्रिटेन और अमरीका के 1773 विमानों ने जर्मनी के ठिकानों को निशाना बनाया। इस निर्मम कार्यवाही में जो तीन दिन तक जारी रही, जर्मनी के कई औद्योगिक नगर राख का ढेर बन गए और डेढ़ से ढाई लाख लोग मौत के घाट उतार दिए गए।

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14 फ़रवरी सन 1963 ईसवी को ब्रिटेन के शल्य चिकित्सक मार्टिन स्काट मनुष्य के गुर्दे का प्रतिरोपण करने में सफल हुए। आज के दिन ब्रिटेन के लीड्ज़ नगर के अस्पताल में प्रोफ़ेसर स्काट ने एक व्यक्ति के गुर्दे को जिसकी कुछ ही देर पहले मृत्यु हो गई थी अपने एक रोगी के शरीर में लगा दिया। यह प्रतिरोपण सफल रहा।

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14 फ़रवरी सन 1905 ईसवी को उर्दू के प्रख्यत कवि दाग़ देहलवी का निधन हुआ। वे 25 मई सन 1831 ईसवी को दिल्ली में पैदा हुए। उन्होंने फ़ारसी की शिक्षा ग़ेयासुल्लोग़ात नामक शब्दकोष के लेखक ग़ेयासुद्दीन से प्राप्त की। शायरी में उन्होंने जौक़ को अपना उस्ताद बनाया। दाग़ वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद दिल्ली से निकल कर रामपुर पहुंचे जहां नवाब यूसुफ़ अली ख़ां और नवाब कल्बे अली ख़ां के दरबार से जुड़ गए। सन 1891 में नवाब महबूब अली ख़ां के शिक्षक नियुक्त किए गए। 14 फ़रवरी सन 1905 को 74 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उन्होंने चार ग़ज़ल संग्रह छोड़े हैं जिनके नाम गुलज़ारे दाग़, आफ़ताबे दाग़, माहताबे दाग़ और यादगारे दाग़ हैं।

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14 फ़रवरी सन 1959 ईसवी को क्यूबा पर प्रसिद्ध क्रान्तिकारी फ़ीडल कास्त्रो का शासनकाल आरंभ हुआ। क्यूबा के राजनैतिक इतिहास में कई सैनिक विद्रोह। क्रान्ति तथा आंदोलन हुए जिनमें अंतिम आंदोलन फीडल कास्त्रो का था। यह आंदोलन जिसने जनक्रान्ति का रूप ले लिया, कारण बना कि फ़ीडल कास्त्रो, बैटिस्टा की सरकार गिराने में सफल हो गए और उन्होंने क्यूबा की बागडोर संभाल ली। 25 नवम्बर 2016 में उनका 90 साल की आयु में निधन हुआ।

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25 बहमन सन 1367 हिजरी शम्सी को स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने शैतानी आयात नामक पुस्तक लिखने वाले धर्मभ्रष्ट लेखक सलमान रुश्दी के विरुद्ध फ़तवा जारी किया। सलमान रुश्दी ने इस पुस्तक में इस्लाम, क़ुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम का अनादर किया था और इस्लाम धर्म के बहुत से नियमों को तर्कहीनता पर आधारित रीति बताया था। सलमान रुश्दी की यह पुस्तक जो पश्चिमी देशों के समर्थन से व्यापक स्तर पर प्रकाशित हुई, वास्तवमें इस्लाम के विरुद्ध पश्चिमी देशों का सांस्कृतिक साज़िश थी किंतु इमाम ख़ुमैनी ने इस लेखक के विरुद्ध फ़तवा जारी करके विश्व के मुसलमानों की जागरूकता का प्रमाण दिया ताकि फिर कोई इस प्रकार का दुस्साहस न कर सके।

इस फ़त्वे के जारी होने के बाद इस्लामी जगत के धर्मगुरुओं, इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी और बहुत से बुद्धिजीवियों ने इसका समर्थन किया जबकि पश्चिमी देशों ने सलमान रुश्दी की जमकर वकालत की।

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27 जमादिल औवल सन 584 हिजरी क़मरी को पवित्र क़ुरआन के हाफ़िज़ और पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैह व आलेही व सल्लम तथा उनके परिजनों के कथनों का ज्ञान रखने वाले प्रसिद्ध ज्ञानी मुहम्मद बिन हाज़िम हमदानी का बग़दाद में स्वर्गवास हुआ। वे ज़ैनुद्दीन के नाम से भी प्रसिद्ध थे और उस समय के प्रचलित ज्ञानों में अद्वतीय व्यक्ति थे। उन्होंने अपने 35 वर्षीय जीवन के दौरान बहुत सी पुस्तकें लिखी हैं जिनमें अलएतेबार फ़ी बयानिन्नासिख़ वल मन्सूख़ का नाम विशेष रूप से लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सिलसिलतुज़्ज़हब भी उनकी एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है।

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27 जमादीउल अव्वल सन 1178 हिजरी क़मरी को पैग़म्बर इस्लाम एवं उन के परिजनों के कथनों को एकत्रित करने वाले बुद्धिजीवी अब्दुल करीम बिन अहमद का स्वर्गवास हो गया वह सीरिया के हलब नगर के सब से प्रसिध मुहद्दिस थे उन्होंने फ़िक़्ह, उसूले फ़िक़्ह, क़ुरआन की व्याख्या, हदीस और अपने काल के प्रचलित ज्ञानों को अपने पिता एवं अन्य समकालीन बुद्धिजिवियों से प्राप्त किया कुछ समय पश्चात वे नेत्रहीन हो गए किन्तु उन्हों ने अपना मनोबल गिरने नहीं दिया और ज्ञान प्राप्ति में पहले से अधिक हदीस ज्ञान में व्यस्त हो गए। हलवी की अनेक रचनाएं हैं जिन में से अद इयतुस्सफ़र पुस्तक की ओर संकेत किया जा सकता है।