JNU के नजीब अहमद की तरह अमुवि का मन्नान वानी भी लापता है, पर गये कहाँ???

JNU के नजीब अहमद की तरह अमुवि का मन्नान वानी भी लापता है, पर गये कहाँ???

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परवेज़ ख़ान
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राजनीती में बहुत कुछ ऐसा होता है जो होता ही नहीं है और जो होता है उसकी चर्चा नहीं की जाती है, इसी को कहते हैं ‘भेद’, हज़रत अली ने फ़रमाया ‘किसी भी मुहिम की कामयाबी उसके राज़ों को पोशीदा रखने में होती है’,,,मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानों की एक इंडिपेंडेंट बॉडी थी, लेकिन ज़ाती फ़ायदे के लिए बोर्ड को तोड़ दिया गया, पहले शिया – सुन्नी पर्सनल लॉ बोर्ड बन गए,,मुस्लिम महिलाओं को अपने हक़ ख़तरे में नज़र आये तो मुस्लिम महिलाओं ने भी अपना अलग बोर्ड बना लिया,,,कुछ दिन के बाद ‘शीमेल’ ‘ज़नख़ों’ ने भी अपने लिए अलग से पर्सनल लॉ बोर्ड की मांग कर दी थी,,,ज़न्खे भी मुस्लमान होते हैं,,,उनको भी अपना हक़ खतरे में लगा होगा तो वह भी मांग करने लगे थे,,,ख़ैर, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का हाल,,,इस दिल के टुकड़े हज़ार हुए कोई यहाँ गिरा कोई वहां गिरा’,,,

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ज़रूरत थी और है पर टुकड़े टुकड़े हो चुका ‘बोर्ड’ कितने काम का बचा है देखना होगा, श्री श्री रवि शंकर न तो हिन्दू समाज के प्रतनिधि हैं, न विहिप के नेता/प्रवक्ता हैं और न ही वह संघ के सीधे सीधे जुड़े हुए हैं,,,रविशंकर से मौलाना सलमान नदवी की मुलाकात और उसमे सलमान नदवी का रखा हुआ फार्मूला, संघ के कहने पर रखा गया समाधान है, संघ मुस्लिम समाज के लोगों, मौलवियों में घुसपैठ मज़बूत कर चुका है| रविशंकर के ऊपर NGT ने जुर्माना लगाया था, आज तक जमा नहीं किया है, अगर ये वयक्ति ज़रा भी समाज, मुल्क के प्रति ज़िम्मेदार होता तो जुर्माना जमा करना था|

मोहन भागवत का संगठन दो, तीन दिन के अंदर युद्ध के लिए तैयार हो जायेगा जबकि भारत की सेना को तैयार होने में 6, 7 महिने का समय लग जायेगा, मोहन भागवत के बयान से पाकिस्तान तो बहुत खुश होगा, डोकलाम पर आँखें लाल करने वाले अपनी आँखें खोल कर देख लें कि डोकलाम पर पूरी तरह से चीन का कब्ज़ा हो चुका है लेकिन भारत का मुख्यधारा का मीडिया उस पर ‘ताल ठोकर’ ”आमने सामने” ”आर पार” नहीं करेंगे,,,फिर भी देश की जनता को तैयार रहना चाहिए कि 2019 के चुनवों से पहले पाकिस्तान बोर्डेर या चीन के बोर्डेर पर एक लिमिटेड वॉर ‘छोटी जंग’ देखने को सकती है, मौजूदा सरकार जनता को बताने के लिए कोई उपलब्धियां नहीं हैं ऐसे में सरहद पर भारी तनाव या राम मंदिर का मुद्दा गरमाया जायेगा ताकि लोगों को गुमराह कर वोट हासिल किया जा सके|


अब यहाँ एक रिपोर्ट है उसे पढ़ें
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आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के पूर्व कश्मीरी छात्र मन्नान वानी ने आतंकी राह पकड़ने से पहले अपने खिलाफ सारे सबूत और निशान खत्म कर दिए हैं। मन्नान वानी के बारे में जांच कर रही खुफिया एजेंसियों व यूपी और जम्मू-कश्मीर पुलिस को जांच में यह पता लगा है कि वह आतंकी संगठन से फोन के माध्यम से बात ही नहीं करता था। वह नेट कालिंग के माध्यम से उनके संपर्क में था।

यही वजह है कि उसके नंबरों से मोबाइल या कॉल डिटेल का कोई भी संदिग्ध रिकार्ड नहीं मिला है। इस तथ्य के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की मुश्किल और भी बढ़ गई है। अब मन्नान के वर्तमान और अतीत के बीच का धागा केवल उसके राजदारों के माध्यम से ही जुड़ा हुआ है, जिनका अभी भी स्पष्ट रूप से पता नहीं लग पा रहा है। यह बात भी साफ हुई है कि वह पिछले दो साल से आतंकियों के संपर्क में था।

कश्मीर के रहने वाले एएमयू के पूर्व छात्र मन्नान वानी के विषय में चार जनवरी को पता लगा कि वह आतंकी संगठन से जुड़ गया है। फेसबुक पर हाथ में एके 56 रायफल लिए एक तस्वीर वायरल हुई। इसके बाद हिजबुल मुजाहिदीन के प्रवक्ता ने भी मन्नान के संगठन में शामिल होने की पुष्टि करते हुए बयान जारी किया। मन्नान के आतंकी कनेक्शन जाहिर होने के बाद प्रदेश और केंद्र की सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने अलीगढ़ में डेरा डाल दिया।

मन्नान के कमरे से मिले हर फोन नंबर, उसके नंबर और उससे जुड़े नाम के संबंध में जांच की गई। उस समय एएमयू में शीतकालीन अवकाश था। अब अवकाश खत्म होने के बाद विद्यार्थी भी वापस कैंपस में आ गए हैं। लेकिन तमाम नंबर खंगालने और साथी छात्रों से पूछताछ करने के बाद भी पुलिस को मन्नान का वह राजदार नहीं मिला है जो उसके अतीत और वर्तमान के बीच की कड़ी को जोड़ सके।

सुरक्षा एजेंसियों ने उसके मित्रों, रिश्तेदारों, परिचितों आदि सभी से जानकारी करी, लेकिन कोई ठोस नतीजा निकलकर नहीं आया। इस बीच जांच एजेंसियों को यह तो जाहिर ही हो चुका है कि उसके ट्विटर एकाउंट पर सिर्फ तीन भारतीय जुड़े हुए थे। एक जयराम रमेश, उमर अब्दुल्ला और सांसद असदुद्दीन ओवैसी। पाकिस्तान के तमाम क्रिकेटर और शख्सियतें उसके ट्विटर एकाउंट से जुड़ी हुई थीं।

एक बार मन्नान ने धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की शादी की भी एनआईए से जांच कराए जाने की मांग की थी। इसके आधार पर यह साफ हुआ है कि वह देश विरोधी ताकतों से इंटरनेट कालिंग के जरिये ही जुड़ा और उसी कॉलिंग के माध्यम से मोटीवेट होकर आतंकी संगठन तक पहुंचा। अब एजेंसियां इंटरनेट कॉलर्स के माध्यम से उसके राजदारों तक पहुंचने की कोशिश में हैं। मगर समस्या यह भी है कि वह लगभग दो साल से इनके संपर्क में था। इसलिए सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या वह दो साल का रिकार्ड जुटा पाएंगे।
(अमर उजाला)
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मन्नान वानी के सिलसिले से अभी तक सिर्फ अख़बारों में खबरें आ रही हैं, वह है कहाँ इसका कोई खुलासा अभी नहीं हुआ है, खुलासा तो अलीगढ में दीवाली से पहले हुए धमाकों का भी नहीं हुआ है उसमे दो लोगों की मौत हुई थी और कई मकान उड़ गए थे, अमुवि में कोई भी मन्नान वानी के तालुक से बोलने को तैयार नहीं है, JNU के नजीब अहमद की तरह मन्नान वानी भी लापता है, उसकी एक तस्वीर फेसबुक पर उपडेट हुई थी जिसमे उसके हाथ में AK – 56 गन थी, फेसबुक पर तस्वीर खुद मन्नान वानी ने लगायी थी या उसको ग़ायब करने के बाद किसी और ने, यह भी हो सकता है कि मन्नान वानी को किसी ख़ास मक़सद के लिए ग़ायब किया गया हो, हो क्या नहीं सकता, अक्षरधाम मंदिर का आतंकवादी हमला फ़र्ज़ी था, इशरत जहाँ एनकाउंटर का मामला आगे नहीं बढ़ा, शोहराबुद्दीन एनकाउंटर का मामला भी संदिग्ध यानि कि फ़र्ज़ी कहा जाता है, मलियाना के दंगों में जो लोग PAC की गोलियों से मारे गये थे, उनके केस में सभी आरोपी पुलिसकर्मी बरी हो गए,,,

मन्नान वानी का लापता होना मामूली घटना नहीं माना जाना चाहिए, इस में कुछ तो गड़बड़ है, गड़बड़ का खुलासा होना चाहिए, मगर होगा कैसे एजेंसीज, ख़ुफ़िया विभाग को कारगिल में घुस आये पाकिस्तानी आतंकवादियों, सेना का भी पता नहीं चल पाया था वह खुलासा वहां के चरवाहे ने किया था, ख़ुफ़िया विभाग नजीब अहमद का भी सुराग नहीं लगा पाया है, वैसे पूरा मामला मीडिया के हाथ में होता तो नजीब को अब तक वह सीरिया, इराक या अफ़ग़ानिस्तान पहुंचा चुके होते,

बाबरी मस्जिद मामला अदालत में शुरू हो चुका है, उम्मीद की जा सकती है कि इसी साल इस केस का फ़ैसला सर्वोच्च अदालत से आ जायेगा, अदालत का फैसला आने से पहले बहुत काम सरकारों, हिंदूवादी संगठन के लोगों और सुरक्षा एजेंसियों को भी करने होंगे, इलाहबाद कोर्ट से फैसला आते वक़्त ही शहरों में कर्फ्यू जैसा माहौल था, फ्लैग मार्च हुए थे, इस बार इंतिज़ाम ज़यादा करने होंगे,

बाबरी विध्वंस के बाद से ही भारत में आतंकवाद की शुरुवात हुई थी, हर आतंकी वारदात में मुसलमानों को पकड़ा गया था, बाबरी के सम्बन्ध में अब जब बड़ा फैसला अदालत से आने वाला है तब पता नहीं क्या क्या देखने को मिलगा, मन्नान वानी का पता शायद खुदा को ही मालूम होगा कि वह कहाँ गया…

सब्ज़ियों, फलों को सुरक्षित रखने के लिए देशभर में कोल्ड स्टोरेज बने हुए हैं, सालों तक फल, सब्ज़ियां यहाँ रखी जाती हैं, ज़रूरत पड़ने पर, बाजार में मांग बढ़ने पर और सही दाम मिलने पर उनको वहां से निकाला जाता है…… परवेज़ ख़ान