#SnoopGateसाहेब_शाह_और_साहेबा : ‘भरोसा’ रखिये सीधे मुद्दे की बात होगी,,,देखें वीडियो

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मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला, बिहार के कई चर्चित काण्ड, बाबरी मस्जिद में मूर्तियां रखने का 1949 की रात का केस और 06 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के आरोपियों के केस, मुंबई का आतंकवादी हमला तत्कालीन भारत सरकार ने करवाया था, संसद पर आतंकी हमला तत्कालीन सरकार ने करवाया था, ओखला कांड, भागलपुर के दंगे, मलयाना कांड, 1984 का सिख समाज का नरशंहार, 2002 के गुजरात दंगे, उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर का दंगा, 1993 के मुंबई दंगे, मुरादाबाद की ईदगाह में ईद की नमाज़ पढ़ते लोगों पर पुलिस/PAC की फायरिंग और दंगा,,,,कितने ही मामले हैं जो सालों, दशकों बीत जाने के बाद भी कभी हल नहीं हुए, उन में शामिल रहे आरोपियों, दोषियों, अपराधियों को सज़ा नहीं मिलीं, ऐसे मामलों को सरकारी तंत्र बहुत होशियारी से दबा देता है, समय के साथ लोग भूल जाते हैं, कुछ लोगों को याद रहता भी है तो वह याद कर अपनी आँखें भिगोलेते हैं या गाहेबगाहे जलूस, प्रदर्शन कर इन्साफ मिलने की आस को ज़िंदा रखते हैं,,,,

बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति ‘एम.एन.फ़ारूक़ी’ का एक लम्बा इंटरव्यू दैनिक जागरण में शायद छपा था जिसकी हैडिंग थी ”बात बाबरी मस्जिद के टूटने की नहीं मुसलमानों का भरोसा टुटा है”,,,जो केस, मामले ऊपर ज़िक्र में लाये गए हैं इनमे जाँच एजेंसियों/अदालतों ने सही से काम किये होते तो आज हिन्दोस्तान ‘बनाना रिपब्लिक’ न बना होता,,,हर कोई जनता है कि हिन्दोस्तान की पुलिस, ख़ुफ़िया एजेंसियां, जाँच एजेंसियां और बहुत हद तक अदालतें केसा/कैसे काम करती हैं,,,आमतौर पर लोग समझते हैं कि अदालतों में ईमानदारी से काम होता है, यह ‘भरोसा’ था जनता को अदालतों पर,,,मगर ‘भरोसा’ ‘टूटा’ है,,,कैसे 1984 के दंगों के आरोपियों को कभी सज़ा नहीं मिली, 1993 मुंबई के दंगों के आरोपियों को सज़ा नहीं मिली, बाबरी मसजिस के अंदर मूर्तियां रखने वालों को कभी सज़ा नहीं मिली, बाबरी मस्जिद विध्वंस के आरोपियों को कभी सज़ा नहीं मिली,,,गुजरात 2002 दंगों के असली ‘ज़िम्मेदारों’ के तो नाम भी पुलिस और जाँच एजेंसियों ने रिपोर्टों में दर्ज नहीं किये,,,मजबूर होकर जज मीडिया के सामने आ कर रोने को मजबूर हो जाते हैं,,,

लोग समझते हैं कि अदालतों में इन्साफ मिलता है,,,बिलकुल मिलता है और तुरंत भी मिल सकता है,,,आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खोल कर अदालत लगायी जा सकती है,,,याकूब मेमन को फांसी की सजा ऐसे ही तो सुनाई गयी थी,,,बाबरी मस्जिद विध्वंस का मामला आज भी निचली अदालत में चल रहा है, फैसला आएगा ‘भरोसा’ रख सकते हैं, ‘भरोसा’ कर कैसे लें ये कोई ज़रा समझा दे,,,शायद अदालत को इन्तिज़ार है कि मामले से जुड़े बड़े नाम वाले आरोपी ‘निकल’ लें तो कार्यवाही आगे बढ़ायें,,,

गुजरात दंगों के मामले में बहुत बड़े सेटलमेंट हुए थे, सूत्रों के मुताबिक ‘शाह’ को बचने के लिए ‘साहेब’ ने ‘सिन्हा’ को बहुत मोटा माल ‘शारजाह’ में कैश करवाया था, यह न किसी पर आरोप है न कोई फालतू का संदेह, पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी है, बिना सबूत वाली, मतलब कानों की सुनी और आँखों की देखी, मगर दस्तावेज़ी साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं,,,उस के बाद से ‘सिन्हा’ पढ़े लिखे ‘तोते’ की तरह ‘साहेब’ के इशारे पर चलते थे,,,उखाड़ लो घुईयां की जड़ कौन उखड़ेगा,,,,

एक मामला और बताता हूँ,,,यह मेरा अपना बिलकुल निजी है,,,2006 के मेरे ऊपर तीन केस हत्या के, एक हत्या का प्रयास, एक अपहरण, एक गैंग स्टार, और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनयम के तहत NSA के लगे थे,,,जेल से ज़मानत के लिए जब अदालत में बेल डालना शुरू कीं तो,,,हत्या के पहले मामले में ज़मानत जिला जज की अदालत से खारिज, हत्या के प्रयास की ज़मानत खारिज,,,एक एक कर तीसरे हत्या के केस की ज़मानत जिला जज की अदालत से खारिज,,,अब समझे आगे की असली बात,,,जिस दिन मेरी ज़मानत की सुनवाई होती थी, माननीय जज साहब के चैंम्बर में आ कर ‘बड़े साहेब’ ‘फूलों’ वाले बैठ जाते थे, ज़मानत खारिज होने की पुष्टि कर ही जाते,,,हत्या के तीसरे केस की ज़मानत खारिज करने के बाद जब ‘बड़े साहेब’ ‘फूलों’ वाले चले गए तब माननीय जज साहब ने मेरे अधिवक्ता को अपने चैम्बर में बुलाया और बोले,,’मजबूर हूँ, ज़मानत देना बनती है मगर नहीं दीं, मजबूर हूँ,,,मेरा बेटा इलाहबाद हाई कोर्ट में वकील है आप उसे केस भेज दें वह वहां से करवा देगा, कोई फीस नहीं देनी है आप को,,,हमारा आदेश अदालत में चलता है, सड़क पर आते जाते ‘फूल’ वालों का क्या भरोसा कब किस से ‘पत्थर’ फिंकवा दें,,,तब हमें भी रिपोर्ट लिखवाने इनके ही पास जाना पड़ेगा,,,माननीय को पूरा ‘भरोसा’ था कि ज़मानत दे दी तो ‘फूल’ वाले उन पर पत्थर ज़रूर मारेंगे सो उन्होंने बड़े बड़े सारे पत्थर ‘मेरे’ सर पर दे मारे,,,

लिखे वक़्त मै भी न जाने कहाँ कहाँ की राम कथा ले कर बैठ जाता हूँ,,,पढ़ने वाले समझेंगे कहानी क्या है और क्या बक रहा है, पर अब ‘भरोसा’ रखिये सीधे मुद्दे की बात होगी,,,,

जहाँ दया तें: धर्म है, जहाँ बैर तें: पाप
जहाँ क्रोध तें: काल है, जहाँ छमा तें: आप

नरेन्द्र दामोदर दास भाई मोदी आज भारत के प्रधानमंत्री हैं, मगर क्या आप ने कभी किसी देश का प्रधानमंत्री देखा है जिसमे मोदी जैसी खूबियां हों, पूरे देश में केवल एक मात्र वयक्ति मोदी खुद ही हैं जिनको पता है कि वह कहाँ तक पढ़े लिखे हैं बाकी देश की 135 करोड़ जनता में से इस का किसी को कोई इल्म नहीं है, मोदी विवाहित हैं 2014 के संसदीय चुनावों से पहले शायद बीजेपी, आरएसएस के लोगों, नेताओं को भी जानकारी न रही होगी,,,मोदी ने अपनी पत्नी को 44 वर्षों से ‘भारत माता’ की सेवा करने के लिए छोड़ रखा है, ‘भारत माता की सेवा करने की पहली शर्त मोदी के मुताबिक घर, परिवार, बीवी, बच्चों को छोड़ना है,,,बोलो,,,भारत माता की जै, वन्देमातरम,,,कभी आप ने आसाराम, राम रहीम, रामपाल आदि के किस्से उनकी पोल खुलने से पहले सुन कर उन पर यकीन किया था,,,तब आरोप लगाने वालों को ‘भक्त’ ‘ज़बान खींच के लूँ’ धमकाते थे,,,जाने भी दो यारो,,,

बात की बात ये है कि,,,, ””किस की मजाल है जो मेरे होते हुए मेरे वंश पर पे आंच भी ला सके,,,तुम्हारे लौंडों की ये हिम्मत कि मेरे कुन्दन पर हाथ उठायें,,,,नौबत लाला, आपे से बाहर मत हो वार्ना तेरे बाल बच्चों को आज ही अनाथ होना पड़ेगा,,,मर्दों के बैर में औरतों का आदर खोना नहीं सीखा मैंने,,,मै मन से चाहता हूँ कि तुम्हारा सुहाग बना रहे,,,लेकिन इस मूरख को समझाओ कि फिर कभी ‘भवानी’ प्रसाद की टक्कर पर न आये,,,…...माँ एक और भकत तेरे चरणों में आया है, आज इसे पता चलेगा कि तेरी उपासना कायरों का काम नहीं,,,बापू ऐसा लगता है हम ठगों में फँस गए हैं,,,,ये वाक्य मशहूर फिल्म ‘संघर्ष’ के हैं,,,H.S रवेल की फिल्म में दिलीप कुमार, बलराज साहनी, संजीव कुमार,,,,मै जनता था कि तू ‘भवानी’ का ये रूप देख कर डर जायेगा, मेरे बाप दादा बहुत बड़े ठग थे और ‘भवानी’ ही ठगों की कुल देवी है,,,तो समझ गए होंगे,,,देश वनारस के ‘भवानी’ लाला की ठगी का शिकार हो चुका है,,,,अब मुक्ति चाहिए तो ‘संघर्ष’ करना होगा,,,उस से पहले ‘संघर्ष फिल्म भी देख ही लें, लिंक दे रहा हूँ….. https://www.youtube.com/watch?v=PB4kzH3vI9c

नेताओं का रंगीन मिजाज़ होना कोई नई बात, बड़ी बात नहीं है और फिर 44 साल अकेले अकेले,,,,भारत माता की जय,,,,’विकास’ का रास्ता ‘प्रेम’ से निकल सकता है,,,,हर कामयाब इंसान के पीछे ‘महिला’ का हाथ होता है,,,,और ज़यादा महिलाओं का हाथ हो तो ज़यादा कामयाबी,,,,,

पहले आनंदी बेन पटेल के पति का मोदी पर आरोप पढ़िये:::::—-

– परवेज़ ख़ान

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गुजरात की पूर्व CM आनंदी बेन पटेल के पति का पुराना लेटर वायरल, मोदी पर लगाए बेहद शर्मनाक आरोप
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गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल के पति मफतभाइ पटेल द्वारा भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष एल के आडवाणी को 1995 में लिखा हुवा एक लेटर अभी वायरल हो गया है जिसकी वजह से भाजपा में अफरा तफरी मच गइ है.

लेटर इस तरह है। कह नही सकता कि यह सच है या नही, लेकिन गुजरात में घर घर में व्हाट्स एप पर है

( सूत्र बता रहे है ये आडवाणी ने ही वायरल करवाया है)

आनंदीबेन पटेल एक भारतीय राजनीतिज्ञ और गुजरात की पहली महिला रही हैं। वे 1998 से गुजरात की विधायक हैं।
वे 1987 से भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हैं और गुजरात सरकार में सड़क और भवन निर्माण, राजस्व, शहरी विकास और शहरी आवास, आपदा प्रबंधन और वित्त आदि महत्वपूर्ण विभागों की काबीना मंत्री का दायित्व निभा चुकी हैं।

दि इंडियन एक्सप्रेस के द्वारा वर्ष-2014 के शीर्ष 100 प्रभावशाली भारतीयों में उन्हें सूचीबद्ध किया गया है। वे गुजरात की राजनीति में “लौह महिला” के रूप में जानी जाती हैं।
फिलहाल हम इस लेटर के प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करते हैं

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मोदी से मेरी पत्नी को वापस दिलाओ?
By Political News India – December 10, 2017
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भारतीय जनता पार्टी के नेता, आरएसएस के स्वम सेवक, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्त्तमान में भारत के प्रधानमंत्री के जीवन से जुड़े कई ऐसे तथ्य हैं जिनकी लोगों को जानकारी नहीं है, या जानकारी छिपाई गयी, मोदी विवाहित वयक्ति हैं इस बात की जानकारी 2014 तक बीजेपी, आरएसएस और खुद मोदी ने छिपाई, चुनाव आयोग की एक शर्त के कारण मजबूरन मोदी ने बताया कि उनकी जसोदाबेन से शादी हुई थी, उसी समय देश की जनता को मोदी के वैवाहिक होने की जानकारी मिली थी|

2014 के संसदीय चुनावों से पूर्व एक महिला की जासूसी कराने का विवाद सामने आया था, महिला की जासूसी मोदी के कहने पर अमित शाह दुवारा करायी गयी थी, यह जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया और मीडिया में अनेक चर्चे चले थे|

सोशल मीडिया में एक पुरानी चिट्ठी वायरल हो रही है, चिट्ठी का मजमून कुछ ऐसा है कि यह सुर्खियों में आ गई. इस चिट्ठी की सत्यता को लेकर ”तीसरी जंग” कोई दावा नहीं करता कि यह चिट्ठी सत्य है या असत्य|

दरअसल यह चिट्ठी गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन के पति मफतलाल पटेल ने पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को लिखी थी. जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऊपर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इस चिट्ठी में मफतभाई पटेल ने नरेन्द्र मोदी से अपनी पत्नी आनंदीबेन को वापस दिलाने के लिए आडवाणी से गुहार लगाई थी.

चिट्ठी में यह भी लिखा है अगर उनकी यह समस्या हल नहीं की जाएगी तो वे पागल हो जाएंगे यहा तक कि उन्हें आत्महत्या तक करनी पड़ सकती है. चिट्ठी में मफतभाई पटेल ने मोदी के लिए चरित्रहीन और निर्दयी जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है. चिट्ठी उस दौर की है जब नरेन्द्र मोदी न तो मुख्यमंत्री थे और न ही प्रधानमंत्री और आडवाणी भी किसी बड़े संवैधानिक पदों में नहीं थे. चिट्ठी में 26 अगस्त 1985 की तिथि लिखी हुई है.

गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल के पति मफतभाइ पटेल द्वारा भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष एल के आडवाणी को 1995 में लिखा हुआ एक लेटर वायरल हो गया है, जिसकी वजह से भाजपा में अफरा तफरी मच गइ है…
लेटर इस तरह है। कह नही सकता कि यह सच है या नही, लेकिन गुजरात में घर घर में व्हाट्स एप पर है

( सूत्र बता रहे है ये आडवाणी ने ही वायरल करवाया है)

आनंदीबेन पटेल एक राजनीतिज्ञ और गुजरात की पहली महिला रही हैं। वे 1998 से गुजरात की विधायक हैं।

वे 1987 से भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हैं और गुजरात सरकार में सड़क और भवन निर्माण, राजस्व, शहरी विकास और शहरी आवास, आपदा प्रबंधन और वित्त आदि महत्वपूर्ण विभागों की काबीना मंत्री का दायित्व निभा चुकी हैं।

दि इंडियन एक्सप्रेस के द्वारा वर्ष-2014 के शीर्ष 100 प्रभावशाली भारतीयों में उन्हें सूचीबद्ध किया गया है। वे गुजरात की राजनीति में “लौह महिला” के रूप में जानी जाती हैं।

फिलहाल हम इस लेटर के प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करते हैं.

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सेक्स सीडी थी लड़की की जासूसी कराने की वजह : प्रदीप शर्मा
टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated: Nov 24, 2013
धनंजय महापात्र, नई दिल्ली
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लड़की की जासूसी के मामले में बीजेपी के पीएम कैंडिडेट और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही हैं। सस्पेंडेड आईएएस प्रदीप शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि गुजरात सरकार ने उस लड़की की जासूसी इसलिए कराई थी, क्योंकि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी उसपर फिदा थे।

इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए प्रदीप शर्मा ने कहा है कि मोदी और उनके सहयोगी अमित शाह ने महिला के निजता के अधिकार और इंडियन टेलिग्राफ ऐक्ट का उल्लंघन किया है। शर्मा ने आरोप लगाया है कि साल 2010 से 2012 के बीच उनके खिलाफ आधा दर्जन फर्जी केस लगाए गए और सस्पेंड कर दिया गया। उनका कहना है कि यह सब इसलिए किया गया, क्योंकि मोदी को शक था कि मेरे पास कोई ऐसी सीडी है, जिसमें लड़की आपत्तिजनक हालत में है।

यह पहला मौका है जब बीजेपी के पीएम कैंडिडेट मोदी पर स्नूपगेट केस में सीधे-सीधे आरोप लगे हैं। इससे पहले अमित शाह पर सीधे फंसते हुए दिख रहे थे। हालांकि अमित शाह ने जिन ‘साहेब’ के कहने पर यह जासूसी कराई थी, कयास लगाए जा रहे थे कि वह ‘साहेब’ मोदी ही हैं।

शर्मा ने इस बात को भी झूठ करार दिया है लड़की के पिता के कहने पर मोदी सरकार ने उसकी जासूसी कराई थी। शर्मा ने दावा किया है कि उन्होंने ही बेंगलुरु रह रही भुज की इस आर्किटेक्ट की मुलाकात मोदी से कराई थी। यह मुलाकात साल 2004 में उस वक्त हुई थी, जब लड़की की उम्र 27 साल थी।

शर्मा की तरफ से ऐडवोकेट सुनील फर्नांडिस द्वारा फाइल ऐप्लिकेशन में कहा गया है, ‘आवेदक शर्मा को लगता है कि मोदी और वह महिला कई सालों तक संपर्क में रहे। चर्चा थी कि इस महिला की कोई सीडी है, जिसमें वह किसी शख्स के साथ आपत्तिजनक अवस्था में है।’

ऐप्लिकेशन में कहा गया है कि हालांकि शर्मा के पास ऐसी कोई सीडी नहीं थी, लेकिन मोदी को लगता था कि उनके पास उस सीडी के अंश हैं। मोदी को डर था कि अगर यह सीडी सार्वजनिक हो गई, तो उनकी छवि खराब हो जाएगी। इसी शक की वजह से सजा देने के इरादे से शर्मा को कई सारे झूठे केसों में फंसा दिया।

शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दी ऐप्लिकेशन में कहा है कि अमित शाह ने ‘साहेब’ के कहने पर जिस तरह से आर्किटेक्ट और मुझे सर्विलांस पर रखा था, वह न सिर्फ इंडियन टेलिग्राफ ऐक्ट, बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 दिसंबर 1996 को जारी गाइडलाइंस का भी उल्लंघन है। उन्होंने मांग की है मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए।

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चर्चा: क्या जासूसी कांड में मोदी का बचाव मुश्किल हो रहा है?
hindi.news18.com/November 19, 20
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गुजरात में एक महिला की जासूसी का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। बीजेपी के लिए भी इस मसले पर पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का बचाव करना मुश्किल हो रहा है।

चर्चा: क्या जासूसी कांड में मोदी का बचाव मुश्किल हो रहा है? गुजरात में एक महिला की जासूसी का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। बीजेपी के लिए भी इस मसले पर पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का बचाव करना मुश्किल हो रहा है।

नई दिल्ली। गुजरात में एक महिला की जासूसी का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। बीजेपी के लिए भी इस मसले पर पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का बचाव करना मुश्किल हो रहा है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि आखिर पिता की शिकायत पर लड़की को सुरक्षा क्यों नहीं मुहैया कराई गई। चोरी छिपे जासूसी क्यों कराई जा रही थी। वहीं दिल्ली में सीपीआई के महिला मोर्चे ने प्रदर्शन कर मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग उठा दी है।
दरअसल बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के ख्वाबों में खलल पड़ता दिख रहा है। अवैध ढंग से एक महिला की जासूसी कराने का मामला इस कदर तूल पकड़ गया है कि अब मोदी के खिलाफ प्रदर्शन भी होने लगे हैं। कांग्रेस महिला मोर्चे के बाद सोमवार को सीपीआई एमएल के महिला मोर्चे एपवा ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। एपवा की मांग है कि मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।

लड़की की जासूसी के इस मसले पर बीजेपी की हालत सांप-छछूंदर वाली हो गई है। पार्टी ने पहले खुद ही कबूल किया कि मोदी ने लड़की के पिता की शिकायत पर उसकी निगरानी कराई। लेकिन ये कबूलनामा ही बीजेपी के गले की फांस बन गया। इस कबूलनामे ने खुद-ब-खुद कोबरापोस्ट और गुलेल की खबर पर मोहर लगा दी। अब पार्टी के लिए मोदी पर हो रहे हमलों का सामना करना मुश्किल हो रहा है। पार्टी के भीतर इस मामले को लेकर बेचैनी बढ़ गई है, क्योंकि मामला पार्टी के घोषित प्रधानमंत्री उम्मीदवार का है। पार्टी का डर ये है कि मामला अगर राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर अदालत तक चला गया तो क्या होगा। लिहाजा हर मामले की जांच कराने की मांग उठाने वाली बीजेपी इस मामले की जांच की बात सुनने तक को तैयार नहीं।

रविशंकर प्रसाद के बयान से साफ है कि बीजेपी इस मसले पर खुद को मुश्किल में पा रही है। हालांकि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह दावा कर चुके हैं कि प्रधानमंत्री उम्मीदवार बदलने का सवाल ही नहीं पैदा होता। लेकिन कांग्रेस के लिए तो किस्मत से छींका टूटा है। पहले उसने अपने महिला मोर्चे को मैदान में उतारा और अब केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी जैसे नेता ट्वीट कर चुभते सवाल उठा रहे हैं। मनीष ने पूछा बीजेपी का दावा है कि पिता के कहने पर लड़की की निगरानी की गई। क्या खतरे का आकलन किया गया था? पुलिस सुरक्षा क्यों नहीं दी गई? कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया?

तिवारी ने तो शहजादे के जवाब में साहबजादे का जुमला भी गढ़ दिया। दरअसल ये जासूसी जिस शख्स के कहने पर की गई उसे बार-बार साहब कहा गया है। उधर कांग्रेस का महिला मोर्चा लगातार दूसरे दिन भी इस मुद्दे को लेकर मोदी पर हमलावर रहा। तो बाकी पार्टियों ने भी नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

नरेंद्र मोदी भी इन आरोपों और सवालों से अछूते नहीं हैं। मध्य प्रदेश के छतरपुर की चुनावी सभा में मोदी के बयान से ये साफ हो गया। अब तक हर सभा में कांग्रेस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ आक्रामक रहे मोदी आज षड़यंत्रों की दुहाई देते नजर आए। मोदी ने कहा कि मां-बहनों का रक्षा कवच उनकी रक्षा करेगा।

दरअसल बीजेपी इस जासूसी कांड को जितना दबाने की कोशिश कर रही है, ये मसला उतना ही तूल पकड़ रहा है। पहले पार्टी एक महिला की निजता का तर्क देकर इस मामले को टालने की कोशिश कर रही थी। लेकिन महिला संगठनों के प्रदर्शन के बाद मामला उलटा हो गया है। महिला संगठनों का आरोप है कि गुजरात सरकार ने गैरकानूनी जासूसी करवा कर एक महिला की निजता का हनन किया। बहरहाल, देखना है कि आने वाले दिनों में बीजेपी अपने प्रधानमंत्री उम्मीदवार का बचाव कैसे करती है और खुद नरेंद्र मोदी इस मसले पर क्या कहते हैं। आईबीएन7 के खास कार्यक्रम एजेंडा में इसी मुद्दे पर चर्चा में शामिल थे कांग्रेस नेता रीता बहुगुणा जोशी, बीजेपी के नेता रामेश्वर चौरसिया, समाजिक कार्यकर्ता, AIPWA की सचिव कविता कृष्णन और राजनीतिक विश्लेषक प्रो पुष्पेश पंत
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`अपनी महिला मित्र के ब्वॉयफ्रेंड को मरवा सकते हैं मोदी `
Updated: Dec 30, 2013/ ज़ी मीडिया ब्यूरो
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नई दिल्ली: बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर कांग्रस ने एक बार फिर तींखा वार किया है। कांग्रेस ने मोदी पर निशाना गुजरात जासूसी कांड को लेकर साधा है। कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी अपनी गर्लफ्रेंड के ब्यॉवफ्रेंड को मरवा सकते हैं। इसलिए पीड़िता और उसके परिजनों को सुरक्षा दी जानी चाहिए।

हरिप्रसाद ने मोदी की तुलना युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन से की। उन्होंने कहा कि जैसे अमीन अपनी गर्लफ्रेंड के ब्यॉवफ्रेंड को मरवा देते थे, मुझे डर है कि कहीं मोदी भी पीड़िता के ब्वॉयफ्रेंड को न मरवा दें।

मोदी पर हमला करते हुए बी के हरिप्रसाद ने कहा कि झारखंड में 13 साल में 7 साल तक बीजेपी की सरकार था फिर भी मोदी झारखंड की बदहाली के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सिर्फ झूठ बोलते हैं, जहां भी जाते हैं सिर्फ धूर्तवाणी अलापते हैं।

दरअसल हरिप्रसाद का यह निशान उस रिपोर्ट को लेकर है जिसमें यह खुलासा किया गया था कि नरेंद्र मोदी के नजदीकी अमित शाह ने खुफिया विभाग से एक लड़की की जासूसी करवाई थी। उस वक्त अमित शाह गृहराज्य मंत्री थे। खुलासे में यह बात कही गई थी कि अमित शाह फोन पर बार-बार किसी साहेब का जिक्र कर रहे थे। इस पर कांग्रेस का कहना है कि अमित शाह के साहेब नरेंद्र मोदी ही हैं और मोदी के कहने पर ही उस लड़की पर निगरानी रखी गई थी।

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मोदी का लड़की के साथ सेक्स सीडी?

प्रदीप शर्मा ने अपने आवेदन में कहा था कि मोदी और वह महिला कई सालों तक संपर्क में रहे। चर्चा थी कि इस महिला की सेक्स सीडी है जिसमें वह किसी शख्स के साथ आपत्तिजनक अवस्था में है। हालांकि शर्मा ने कहा कि ऐसी कोई सीडी उनके पास नहीं थी, लेकिन मोदी को लगता था कि उनके पास सीडी के अंश हैं और कहीं वह इसे सार्वजनिक न कर दें।

गुजरात में पेशे से आर्किटेक्ट युवती की जासूसी कराने का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पीछा नहीं छोड़ रहा है। सरकार द्वारा निलंबित आइएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा ने यह मुद्दा 2013 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया था। सुप्रीम कोर्ट में मोदी – शाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश किये जा चुके है.

बकौल शर्मा, ‘उन्हें इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि क्योंकि वह एक युवा महिला आर्किटेक्ट के साथ मोदी की कथित निकटता से वाकिफ थे।’ उन्होंने कोर्ट को आगे बताया कि वह जब कच्छ के जिलाधिकारी थे तो उन्होंने ही 2004 में एक कार्यक्रम के दौरान उक्त युवती का परिचय मोदी से कराया था। मोदी भूकंप से तबाह भुज शहर में हिल गार्डन का उद्घाटन करने आए थे और युवती वहां पर बतौर लैंडस्केपिंग आर्किटेक्ट कार्यरत थी।’

जैसा की विडियो में आपने सुना की अमित शाह बार बार साहेब- साहेब बोल कर ऑफिसर को संबोधित कर रहे थे . अमित शाह के यह ‘साहब’ कौन थे और क्यों वह उस लड़की में उनकी इतनी दिलचस्पी क्यों थी, ये तो अब बिलकुल साफ हो गया है जब निलंबित आईएएस प्रदीप शर्मा ने अपने एफिडेविट में सुप्रीम कोर्ट को सौपा है, लेकिन वेबसाइट कोबरा पोस्ट द्वारा सीबीआई को मिले ऑडियो टेपों के हवाले से दी गई खबर के मुताबिक मॉल से लेकर प्लेन तक उस लड़की का लगातार पीछा करवाया जाता रहा। वह लड़की किससे मिलती है, किससे बात करती है और कहां-कहां जाती है यह सब गुजरात पुलिस के सीनियर अधिकारी तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अमित शाह के मौखिक आदेश पर देखते रहे। एक मौका ऐसा भी आया जब अमित शाह ने कहा कि अगर वह लड़की मुंबई जाती है तो यह पक्का करो कि वह मुंबई न जाए।

दरअसल, इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ कांड में जेल जा चुके और फिलहाल जमानत पर छूटे आईपीएस ऑफिसर जी. एल. सिंघल ने सीबीआई को बहुत सारे ऑडियो टेप सौंपे थे। वेबसाइट कोबरा पोस्ट ने करीब आधे घंटे का फोन टेप पेश करते हुए दावा किया था कि अमित शाह के निर्देश पर गुजरात पुलिस की 3 प्रमुख शाखाओं- राज्य इंटेलिजेंस ब्यूरो, क्राइम ब्रांच और एटीएस – के अधिकारियों ने मिलकर बेंगलुरु की एक महिला का अवैध ढंग से पीछा करवाया।

कोबरा पोस्ट की इस खबर के मुताबिक अमित शाह ने आईएएस ऑफिसर प्रदीप शर्मा का फोन टैप करने का भी निर्देश इन ऑफिसरों को दिया था क्योंकि कथित तौर पर उनके ‘साहब’ को शक था कि शर्मा उस लड़की से मिलने वाले हैं। शाह कथित तौर पर यह आदेश भी देते हैं कि शर्मा को वंजारा से भी ज्यादा समय के लिए अंदर कर दो। बाद में शर्मा को करप्शन के आरोपों में गिरफ्तार भी किया गया था।

गौरतलब है कि इन टेपों से अनजान प्रदीप शर्मा ने मई 2011 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि गुजरात सरकार उन्हें भ्रष्टाचार के झूठे मामलों में फंसा रही है और इसकी वजह है मोदी का एक महिला से संबंध।
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मोदी और अमित शाह के पत्नी सोनल शाह के साथ ना जायज सम्बन्ध के पोस्ट के बाद गुजरात में……

thetelegraph.co.in/September 16, 2017
थोडा अजीब लग रहा होगा, और है भी अजीब, लेकिन इस पोस्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की पत्नी सोनल शाह के बिच के रिश्ते को सनसनीखेज पोस्ट के बाद गुजरात के राजनीति में हलकान ला दिया है! जिसके बाद पहले पढ़े विशाल गुप्ता की ये फेसबुक पोस्ट….

सन 1964 में मुंबई के एक संपन्न गुजराती जैन परिवार में जन्मे अमित शाह के पिता का नाम अनिलचन्द्र शाह और माता का नाम कुसुमबा है.

अपनी 6 बहनों के बीच अमित शाह एकलौते भाई हैं. अमित शाह के परिवार में उनकी पत्नी सोनल शाह, पुत्र जय शाह और पुत्रवधू हर्षिता शाह हैं. अमित शाह का विवाह 23 वर्ष की उम्र में सन 1987 में सोनल शाह के साथ हुआ था.

बायोकेमिस्ट्री में B.SC. डिग्री धारक अमित शाह राजनीति में आने से पहले प्लास्टिक और PVC पाइप का बिज़नस करते थे. इसके अतिरिक्त अमित शाह एक स्टॉक ब्रोकर भी रह चुके हैं.

बचपन में अमित के पिता अनिलचन्द्र ने अपनें 6 बेटीयों के पिछे अपने पुत्र को लगा दिया, 6 बहने क्या करती हैं, किससे मिलती है, यह सब अमित के जिम्मे था..यानी बचपन से ही महिला जासूस था…

इमरजेन्सी के बाद लापता मोदी जब अपने गृहराज्य को लौटे, अहमदाबाद में पढाई करने वाली छात्र सोनल नामक लडकी से प्यार हुआ…

सोनल मूलता महाराष्ट्र के कोल्हापुर की रहने वाली है, उनकी फैमिली बाद में अहमदाबाद शिफ्ट हुई.

सोनल के पिता संघ के सदस्य थे, 1980 से 1984 के दौर में मोदी का संघ में अच्छा प्रभाव था, उसी समय अमित शाह और मोदी के बिच गहरी दोस्ती हुई…

सोनल नरेंद्र से शादी करना चाहती थी, लेकिन मोदी अपने राजनितिक कारणों का हवाला देकर उससे पिछा छुड़ाते थे..

जब सोनल को पता चला वह गर्भवती है, तब मोदी ने कहा के मै पहले से ही शादी शुदा हूँ…
मैंनें कुछ साल पहले ही संन्यास लिया है,

तुमसे मेरा विवाह नहीं हो सकता… नरेंद्र ने तुरंत सोनल का गृभपात करवा कर सोनल से दूरी बना ली..

कुछ महिनों बाद नरेंद्र ने बडी चालाकी से अमित और सोनल को शादी के लिए मनवा लिया, जल्द ही सोनल और अमित विवाहसूत्र में बंध गये…

सोनल से मिलने और उसके करीब रहने के लिए नरेंद्र ने अमित से और ज्यादा गहरी दोस्ती बनाई…

आज नरेंद्र के ही बदौलत अमित इतनी बड़ी उंचाई को छू सका है..

अमित ने अब तक छोटे मोटे 40 चुनाव लढे, आज तक उन्हें कभी हार का सामना नहीं करना पडा..

1990-91 के दशक में मोदी ने अमित को लालकृष्ण आडवाणी के प्रचार की अहम जिम्मेदारी दी..

सोनल अपने पति के राजनैतिक भविष्य को उज्वल बनाने के लिए नरेंद्र का शिकार होती रही..

अमित को 1996 के अंत में मोदी और सोनल के नाजायज़ संबध का पता चला तब मोदी ने अमित के गुस्से को शांत करने के लिए सरखेज उपचुनाव में विधायक का टिकट दिलवाने की बात कहकर उस मामलें को वहीं दबा दिया..

1997 में वह पहली बार विधायक के तौर पर चुने गए..

अमित शाह शंतरज के खिलाड़ी है. वह गुजरात स्टेट चेस असोसिएशन के चेअरमैन भी थे..

पार्टी हायकमान के आदेश पर मोदी मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हुए.. नरेन्द्र मोदी सोनल के प्यार में या फिर दबाव में मजबूरन अपने मंत्रीमंडल में अमित को भी जगह देनी पड़ी..

2003 में अमित गृहराज्य मंत्री बने,

2004-5 में अहमदाबाद के बाहरी इलाके में कथित रूप से एक फर्जी मुठभेड़ में 19 वर्षीय इशरत जहां, ज़ीशान जोहर और अमजद अली राणा के साथ प्रणेश की हत्या हुई थी। इस मामले में गोपीनाथ पिल्लई ने अदालत में एक आवेदन देकर मामले में अमित शाह को मुख्य आरोपी बनाने की अपील की थी..
गुजरात पोलिस के पास अमित शाह के खिलाफ कई सबूत थे..अमित शाह को उम्र कैद की सजा भी पक्की थी..

यह फर्जी मुठभेड़ मोदी के इशारों पर ही हुआ था, एक समय ऐसा भी आया था के जब मोदी अमित शाह को बली चढवाकर खुद इस केस से बचना चाहते थे..

लेकिन सोनल शाह के दबाव में आकर मोदी ने अपने मित्र अमित को इस केस से बचा लिया…

अमित शाह वही आतंकवादी है जो खुद अहमदाबाद में ब्लास्ट करवाकर 21 दिनों में केस सुलझाने का दावा किया था.
उस ब्लास्ट में 50 से ज्यादा लोंगों की मौत हुई थी.

फर्जी मुठभेड़ में 3 महिना जेल की हवा खाने बाद अदालत ने अमित को गुजरात से तडिपार इस लिए किया था के अमित किसी गवाह को नुकसान ना पहुंचा सके, लेकिन गुजरात के बाहर रहकर भी सारे रिकार्ड मिटाने में कामयाब रहे..

जब अमित तडिपार थे कभी दिल्ली कभी मुबंई भटक रहे थे, पत्नी सोनल ने मोदी को मजबूर करके दिल्ली में स्थित सरकारी गेस्ट हाउस (गुजरात भवन) में पूरे 6 महिने सुरक्षा के साथ सारी सुख सुविधाएं उपलब्ध कराई… एक आरोपी को मोदी ने सरकारी बंगले में रहने की परमिशन किस मजबूरी में दी…?

अमित शाह और मोदी के लिए सोनल हमेशा लकी साबित रही है..

अगर सोनल शादी के पहले मोदी के खिलाफ आवाज उठाती तो आज मोदी यह मुक्काम पर ना होता..??

अगर सोनल अमित शाह की बिवी ना बनती तो स्टाक ब्रोकर ही रहता..

नोट- ज्यादा से ज्यादा लोग शेअर करे, आखिर भक्तों को भी तो पता चले भारतीय राजनिती के चाणक्य ने यह मुक्काम हासिल करने क्या क्या दांव पे लगाया है..

धन्यवाद..

विशाल गुप्ता