कोर्ट ने 17 मुस्लिम युवकों को आतंकवाद के आरोप से किया बरी, जमीअत को मिली क़ामयाबी

कोर्ट ने 17 मुस्लिम युवकों को आतंकवाद के आरोप से किया बरी, जमीअत को मिली क़ामयाबी

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Sagar PaRvez
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यह कोई पहला या आखिरी मामला नहीं है जब अदालत ने बेकसूर आतंकवाद जैसे संगीन मामले में बरी किया है, भारत में एक समय था जब नौकरियों में जैसे बिना परीक्षा के भर्तियां होती हैं मुसलमानों को बिना गवाह, सबूत के सरकारी नौकरियों की तरह पकड़ पकड़ कर जेलों में दाल दिया जाता था, और मामला भी होता था आतंकवाद, बम्ब धमाके जैसे, यह सब कुछ उस समय तक जारी रहा जब तक कि असली आतंकवादियों का खुलासा नहीं हुआ था, जैसे ही भगवा आतंकवाद का खुलासा हुआ ऐसे मामलों में न सिर्फ कमी आयी बल्कि आतंकवादी वारदातें होना ही समाप्त हो गयी|

दिसंबर 2007 में केरल के वाघमन नामी इलाके में देश में आतंकवादी कार्रवाईयां अंजाम देने के मकसद से कथित ख़ुफ़िया बैठक करने आरोप के तहत गिरफ्तार 35 मुस्लिम नौजवानों के खिलाफ दर्ज मुकदमा का फैसला आ गया,जिसके दौरान अदालत ने 17 मुस्लिम आरोपियों को आतंकवाद सहित गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप से बरी कर दिया।

यह सूचना आज मुम्बई में आरोपियों को कानूनी मदद देने वाली संगठन जमीअत उलेमा महाराष्ट्र (अरशद मदनी) कानूनी सहायता समीति के प्रमुख गुलज़ार आजमी ने दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने बताया कि केरल के अर्नाकुलम नामी स्थान पर कायम विशेष अदालत ने एक ओर जहां 17 मुस्लिम नौजवानों को मुक़दमा से निर्दोष ठहराते हुए बरी कर दिया, वहीं 18 आरोपियों को दोषी करार दिया और उनकी सजाओं का तय अगले कुछ दिनों में कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि जमीअत उलेमा हिंद मुस्लिमो की बड़ी धार्मिक जमात है पिछले कई वर्षो में मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी पर जमीअत ने मुफ्त में क़ानूनी सहायता की।अदालत ने कई मामलो में आरोपी मुस्लिम को बेगुनाह ठहराते हुए बरी किया है।